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सुप्रीम कोर्ट के लिए जस्टिस के नामांकन से खफा हुआ 'साउथ एशियन फॉर बिडेन' संगठन, ट्रंप की निंदा की
Sat, 26 Sep 2020 11:21 AM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, वाशिंगटन
पीटीआई, वाशिंगटन
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sat, 26 Sep 2020 11:21 AM IST
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
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'साउथ एशियन फॉर बिडेन' ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चुनाव के बीच में सुप्रीम कोर्ट के लिए अपने पसंद के उम्मीदवार को नामांकित करने की योजनाओं के लिए उनकी कड़ी निंदा की। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रूथ बदर गिंसबर्ग के स्थान पर अपने पंसद के उम्मीदवार को नामित करने की योजना बनाई है। गौरतलब है कि जस्टिस गिंसबर्ग का पिछले सप्ताह निधन हो गया।
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'साउथ एशियन फॉर बिडेन' की नेशनल डायरेक्टर नेहा दीवान ने कहा, 'साउथ एशियन फॉर बिडेन' ने राष्ट्रपति ट्रंप के न्यायाधीश एमी कोनी बैरेट के नामांकन की कड़ी निंदा की है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रूथ बदर गिंसबर्ग के स्थान पर नामांकित किया गया है।
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दीवान ने कहा, देशभर में अमेरिकी नागरिक मतपत्र डाल रहे हैं, इस दौरान राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के जज का नामांकन करना लोकतंत्र के मूल्यों के साथ असंगत है। ट्रंप द्वारा चुनाव से पहले इस सीट को भरने का प्रयास किया जा रहा है और मतदाताओं की इच्छा की अवहेलना की जा रही है।
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उन्होंने कहा, हमारे जीवनकाल में सबसे महत्वपूर्ण चुनाव की पूर्व संध्या पर, इस नामांकन के माध्यम से अब सुप्रीम कोर्ट की वैधता और सभी अमेरिकियों के लिए एक गैर-न्यायकारी मध्यस्थ के रूप में इसकी ऐतिहासिक भूमिका पर गहरा असर पड़ेगा।
इससे पहले भी डोनाल्ड ट्रंप विवादों में घिर गए थे, जब उन्होंने डाक से चुनाव (मेल-इन बैलट) पर अविश्वास जताया था और तीन नवंबर को होने वाले चुनाव में हार की स्थिति में आसानी से सत्ता छोड़ने से इनकार कर दिया था।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के परिणामों को स्वीकार करेंगे। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव ने गुरुवार को यह कहते हुए उन चिंताओं पर विराम लगाया जो ट्रंप के एक बयान के बाद उपजी थीं।
ट्रंप के शांतिपूर्वक सत्ता न छोड़ने को लेकर एक सवाल के जवाब में व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव केली मैकएनानी ने कहा, 'राष्ट्रपति एक मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के परिणामों को स्वीकार करेंगे। लेकिन मुझे लगता है कि आपको यह सवाल डेमोक्रेट्स से पूछना चाहिए था, ये ज्यादा बेहतर होता, जो पहले से ही इस बात को सबके सामने कह रहे हैं कि वे चुनाव के परिणामों को स्वीकार नहीं करेंगे।