नेपाल आपदा: सात दिन से अपनों का इंतजार, जिंदा होने की आस टूटी; त्रिशूली मठ में परिजन कर रहे अंतिम प्रार्थना
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद सात दिन से लापता अपनों की तलाश के बीच त्रिशूली मठ में परिजन भावुक होकर प्रार्थना और अंतिम अनुष्ठान कर रहे हैं। अब तक 1,252 शव मिले और करीब 4800 लोग लापता हैं। आखिर इन परिवारों पर क्या बीत रही है? आइए, विस्तार से जानते हैं...
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नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद त्रिशूली मठ में गुरुवार को भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। सात दिन से लापता अपनों की कोई खबर नहीं मिलने पर परिवार और स्थानीय लोग उनकी सलामती की उम्मीद के साथ प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं, कुछ परिवारों ने अपने लापता परिजनों की आत्मा की शांति के लिए अंतिम धार्मिक अनुष्ठान भी शुरू कर दिए हैं। मठ में बड़ी संख्या में लोग उन लोगों के लिए प्रार्थना करने पहुंच रहे हैं, जिन्हें बाढ़ अपने साथ बहा ले गई। परिजनों के पास यह पुष्टि नहीं है कि उनके प्रियजन जीवित हैं या नहीं, लेकिन सात दिन से कोई संपर्क नहीं होने के कारण वे अब उनकी आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।
सात दिन से नहीं मिला कोई सुराग
रसुवा के रहने वाले तिशुंग घाले ने बताया कि उनके इलाके में कई लोग घरों समेत बाढ़ में बह गए और एक सप्ताह बीतने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल सका है। उनके परिवार के कई सदस्य भी लापता हैं। घाले ने बताया कि वह अपने लापता रिश्तेदारों के लिए मठ में प्रार्थना कर रहे हैं। उनके मुताबिक, लगातार सात दिनों से संपर्क नहीं होने के कारण उन्हें आशंका है कि शायद वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनके प्रियजनों की मौत हो चुकी है तो उनके नाम पर की गई प्रार्थना से उनकी आत्मा को शांति मिल सकती है।
एक परिवार के नहीं, कई परिवारों के लोग लापता
घाले ने बताया कि उनका अपना परिवार सुरक्षित है, लेकिन कई रिश्तेदार बाढ़ की चपेट में आ गए। उन्होंने कहा कि जिस इलाके में वे ठहरे हुए थे, वहां से करीब 42 लोगों के बह जाने की जानकारी है। उनके मुताबिक, उनके क्षेत्र में 400 से अधिक लोग लापता या प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बहन, छोटी बहन और उसका पूरा परिवार बाढ़ में बह गया। बड़ी बहन की एक बेटी, अन्य रिश्तेदार और उनकी बुजुर्ग मौसी भी लापता हैं। घाले ने कहा कि परिवार दर परिवार लोगों के गायब होने का सिलसिला सामने आया और उनके जानने वाले करीब 42 लोग इस आपदा में बिछड़ गए।
बौद्ध परंपरा के अनुसार मठ में हो रही प्रार्थना
स्थानीय निवासी बोम बहादुर तामांग ने बताया कि चीन की ओर से अचानक आए पानी ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए स्थानीय लोग मठ में प्रार्थना कर रहे हैं। तामांग के मुताबिक, मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना बौद्ध धर्म की परंपरा का हिस्सा है। इसी परंपरा के तहत लोग मठ में एकत्र होकर अपने लापता और मृत माने जा रहे परिजनों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।