यूक्रेन के राष्ट्रपति से मिले जयशंकर: रूस से तेल खरीदने पर दो टूक जवाब; बोले- भारत के फैसलों का सम्मान जरूरी
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की भारत की कोशिशों और शांति के स्पष्ट रुख की सराहना की। जेलेंस्की ने भारत के समर्थन के लिए आभार जताते हुए कहा कि यह समय युद्ध का नहीं, बल्कि शांति का होना चाहिए।
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यूक्रेन के दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार शाम को राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक दूसरे का स्वागत किया। मुलाकत की तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए जेलेंस्की ने रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को खत्म करने में भारत के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री से मुलाकात की और पत्रकारों के सवालों का भी जवाब दिया। इस दौरान जब यूक्रेन के पत्रकार ने उनसे रूस से तेल खरीदने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने सीधा जवाब दिया और कहा कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
रूसी तेल पर जयशंकर का स्पष्ट रुख
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान इस बात से नहीं होगा कि कोई देश रूसी तेल, खनिज या अन्य वस्तुएं खरीदता है या नहीं। यह संघर्ष केवल संवाद, कूटनीति और बातचीत के जरिए ही सुलझ सकता है। कीव में जयशंकर ने कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना भारत के लिए बड़ी चुनौती है। यूक्रेन के दृष्टिकोण का भारत सम्मान करता है और उम्मीद करता है कि भारत के पक्ष का भी दूसरे देश सम्मान करेंगे।
रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध का प्रस्ताव
अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 86-11 मतों से पारित किया। प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन रूस के प्रमुख कच्चे तेल खरीदारों में शामिल हैं। विधेयक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं और युद्ध से जुड़े संस्थानों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है।
'एक भरोसेमंद शांति स्थापित होनी चाहिए'
जयशंकर से मुलाकात के बाद जेलेंस्की ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि मैंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। हमने अहम मुद्दों पर चर्चा की। हम रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस अन्यायपूर्ण युद्ध को खत्म करने की भारत की प्रतिबद्धता के लिए आभारी हैं। यह समय निश्चित रूप से युद्ध का नहीं है। शांति की जरूरत है। भारत का रुख बिल्कुल साफ है। आज, जब मंत्री हमारे साथ कीव में थे, रूस ने एक बार फिर जेट-पावर्ड 'शहेद' ड्रोन छोड़े, जिन्हें ईरान की मदद के बिना नहीं बनाया गया था। हालांकि हमारी कॉम्बैट एविएशन (लड़ाकू विमान सेवा) की वजह से प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा, क्योंकि यूक्रेनी लड़ाकू विमान ही इनमें से ज्यादातर ड्रोन को मार गिराते हैं। हमें उम्मीद है कि दुनिया की अन्य बड़ी ताकतें भी स्पष्ट रुख अपनाएंगी कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए और एक भरोसेमंद शांति स्थापित होनी चाहिए।
'सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा'
बेशक, हमने ब्लैक सी (काला सागर) की स्थिति पर भी चर्चा की, जिसमें आम नागरिकों के जहाजों के लिए मौजूद खतरे भी शामिल हैं। हम इस बात से सहमत हैं कि उन इलाकों में खाने-पीने की सप्लाई रोकना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है, जहां यह मामला बहुत संवेदनशील है और लोग इन समुद्री रास्तों पर निर्भर हैं। रूस की ओर से हमारे बंदरगाहों, हमारे फूड कॉरिडोर और हमारी सप्लाई को रोकने की कोशिशों से वैश्विक संबंधों में बड़ी रुकावट आ रही है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा।
यूक्रेन के विदेश मंत्री से भी मिले जयशंकर
राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए ही संभव है। जयशंकर ने संकेत दिया कि रूस और यूक्रेन दोनों की सहमति होने पर भारत शांति प्रयासों में सहयोग करने, यहां तक कि मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए भी तैयार है।
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3 से 5 सितंबर तक चलेगा जयशंकर का दौरा
जयशंकर का तीन दिवसीय राजनयिक दौरा 3 से 5 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान वह यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा करेंगे। दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम घटनाक्रमों पर चर्चा करना है।