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Russia Ukraine War: जुबानी है सहानुभूति, यूक्रेन को जल्द यूरोपियन यूनियन की सदस्यता मिलने की संभावना नहीं

Thu, 03 Mar 2022 04:17 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 03 Mar 2022 04:17 PM IST
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सार
तीन बाल्टिक देशों और ग्रीस ने सदस्यता देने के मुद्दे पर यूक्रेन का समर्थन किया है। लेकिन आम समझ यह है कि यूक्रेन को तुरंत ईयू की सदस्यता मिलना आसान नहीं है। उसकी एक वजह यह है कि ईयू की सदस्यता के लिए यूक्रेन की अर्जी आने से पहले से कई दूसरे देशों की अर्जी लंबित पड़ी हुई हैं। उनमें अल्बानिया, नॉर्थ मेसिडोनिया, मोंटनेग्रो, सर्बिया और टर्की शामिल हैँ...
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Russia Ukraine War: European Union has deep sympathy for Ukraine, but it is unlikely to get EU membership in the near future
यूरोपीय संघ में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की - फोटो : Agency

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) में यूक्रेन के प्रति गहरी सहानुभूति है, लेकिन उसे निकट भविष्य में ईयू की सदस्यता मिलने की संभावना नहीं है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बुधवार को एक जज्बाती वीडियो संदेश जारी किया था। उसमें उन्होंने ईयू से अपील की थी कि यूक्रेन को सदस्यता देने की प्रक्रिया वह तेज करे। जेलेंस्की ने ईयू को संबोधित करते हुए कहा- ‘यह तटस्थ रहने का समय नहीं है।’



इसके पहले मंगलवार को यूरोपियन संसद को दिए अपने संदेश में जेलेंस्की ने कहा था- ‘आप यह साबित करें कि आप हमारे साथ हैं।’ उनके इस बयान पर यूरोपीय संसद के सदस्यों ने खड़े होकर देर तक तालियां बजाईं। इसे यूक्रेन के प्रति यूरोपीय संसद की सहानुभूति और समर्थन के रूप में देखा गया। यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित कहा कि यूक्रेन को ईयू की सदस्यता दी जानी चाहिए।

रूस में वार्ता में जेलेंस्की को मिल सकता है फायदा

विश्लेषकों का कहना है कि ईयू की सदस्यता मिलने से मौजूदा संकट के समाधान की राह निकल सकती है। युद्धविराम के लिए रूस ने शर्त रखी है कि यूक्रेन अपनी सैन्य क्षमता खत्म करे और यह एलान करे कि वह नाटो (उत्तरी अटालांटिक संधि संगठन) का सदस्य नहीं बनेगा। कूटनीति विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ईयू की सदस्यता मिल जाए, तो इन शर्तों पर बातचीत में जेलेंस्की के लिए अनुकूल स्थिति बनेगी। ईयू के एक अधिकारी ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘मेरी राय में यह भी एक कारण है, जिससे जेलेंस्की ईयू की सदस्यता पाने के लिए जोर लगा रहे हैं।’

तीन बाल्टिक देशों और ग्रीस ने सदस्यता देने के मुद्दे पर यूक्रेन का समर्थन किया है। लेकिन आम समझ यह है कि यूक्रेन को तुरंत ईयू की सदस्यता मिलना आसान नहीं है। उसकी एक वजह यह है कि ईयू की सदस्यता के लिए यूक्रेन की अर्जी आने से पहले से कई दूसरे देशों की अर्जी लंबित पड़ी हुई हैं। उनमें अल्बानिया, नॉर्थ मेसिडोनिया, मोंटनेग्रो, सर्बिया और टर्की शामिल हैँ। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उदारता से ईयू की सदस्यता देने के विरोधी रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इसके पहले कि किसी नए देश को सदस्य बनाया जाए, पोलैंड और हंगरी में लोकतंत्र के ह्रास के मसले को सुलझाया जाना चाहिए।

यूक्रेन यूरोप में दूसरा सबसे ज्यादा भ्रष्ट देश

साल 2008 में यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर युश्चेंको ने दावा किया था कि उन्हें ईयू की सदस्यता मिलने के बारे में उन्हें आशाजनक संदेश मिला है। लेकिन जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड्स और लक्जमबर्ग ने इस प्रक्रिया को तब रोक दिया था। ईयू की सदस्यता पाने के लिए लोकतंत्र और और स्वच्छ प्रशासन के इंडेक्स पर बेहतर रिकॉर्ड जरूरी समझा जाता है। जबकि फिलहाल गैर सरकारी संस्था- ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल के भ्रष्टचार इंडेक्स के मुताबिक यूक्रेन यूरोप में दूसरा सबसे ज्यादा भ्रष्ट देश है।


जानकारों का कहना है कि ईयू की सदस्यता देने की प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम 18 महीने लगते हैँ। अगर ईयू परिषद इस पर राजी हो जाए, तो फिर यूरोपियन कमीशन की राय मांगी जाती है। इस बीच यूक्रेन को ईयू के तमाम कानूनों का अनुमोदन करना होगा। इसमें भी समय लगेगा। वैसे ये संभावना जताई जा रही है कि अपनी अगली शिखर बैठक में ईयू नेता यूक्रेन की अर्जी पर विचार करेंगे।

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