Russia-Ukraine War: यूक्रेन युद्ध के बीच चीन की मंशा पर अटकलों का बाजार गर्म, रूस जाएंगे जिनपिंग
Russia-Ukraine War: रूस सरकार के सूत्रों ने मीडिया को जानकारी दी कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जल्द ही रूस की यात्रा करेंगे। संभव है कि यह यात्रा मार्च में ही हो...
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Russia-Ukraine War: यूक्रेन युद्ध में मदद के लिए रूस को हथियार देने की चीन की योजना के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से चीन के विदेश नीति प्रमुख वांग यी की यहां हुई मुलाकात को बेहद महत्त्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। वांग की यहां रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव से भी बातचीत हुई। बाद में रूस सरकार के सूत्रों ने मीडिया को जानकारी दी कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जल्द ही रूस की यात्रा करेंगे। संभव है कि यह यात्रा मार्च में ही हो।
अमेरिकी थिंक टैंक कारनेगी एन्डॉवमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनियर फेलॉ एलेक्जेंडर गुबयेव ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से बातचीत में कहा- ‘वांग की मास्को यात्रा से यह जाहिर हुआ है कि रूस और चीन के बीच संबंध ना सिर्फ पटरी पर हैं, बल्कि इनका तेजी से विस्तार हो रहा है।’
इस बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में चीन के नए वैश्विक सुरक्षा पहल (जीएसआई) दस्तावेज की भी काफी चर्चा है। चीन ने यह दस्तावेज मंगलवार को जारी किया था। इसमें मौजूदा दुनिया के प्रति चीन की नीति और सिद्धांतों का ब्योरा दिया गया है। विश्लेषकों ने इस बात पर गौर किया है कि इस दस्तावेज में ‘विवादों के निपटारे के लिए प्रतिबंधों के इस्तेमाल’ को सिरे से नकारा गया है। इस बीच खबर है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग यूक्रेन युद्ध का साल भर पूरा होने के मौके पर शुक्रवार को एक विशेष भाषण देंगे। चीनी मीडिया में इसे ‘शांति संबोधन’ नाम दिया गया है।
चीन की बढ़ती सक्रियता से पश्चिमी राजधानियों में यह चिंता गहरा गई है कि रूस को अगर चीन ने हथियार दिए, तो उससे मौजूदा युद्ध वैश्विक आकार ले सकता है। लेकिन गुबयेव ने इन अटकलों पर शक जताया है कि चीन तुरंत रूस को ऐसे हथियार देने की तैयारी में है, जिससे युद्ध की दिशा प्रभावित होगी।
ब्रिटेन की ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय के प्रोफेसर रोजमेरी फुट ने राय जताई है कि चीन की प्राथमिकता अपने आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करना है। इसलिए वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में स्थिरता चाहता है। वांग ने अपनी मौजूदा यूरोप यात्रा के दौरान यही संदेश देने की कोशिश की है कि चीन यूक्रेन मसले का ‘शांतिपूर्ण समाधान’ चाहता है।
कुछ विश्लेषकों ने राय जताई है कि चीन रूस को उसके मौजूदा रूप में इसलिए बनाए रखना चाहता है, क्योंकि अगर रूस पराजित हो गया, तो पश्चिम का सारा ध्यान चीन पर केंद्रित हो जाएगा। जर्मनी की खुफिया सेवा के प्रमुख थॉमस हेल्डेनवांग ने पिछले साल कहा था कि रूस एक तूफान है, जबकि चीन जलवायु परिवर्तन (यानी असल खतरा) है। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई-5 के निदेशक केन मैकलम भी ऐसी राय जता चुके हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक इन टिप्पणियों से चीन में यह आशंका गहराई है कि रूस अगर एक बड़ी ताकत के रूप में मौजूद नहीं रहा, तो पश्चिमी देश उसे घेरने में अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। इसीलिए चीन रूस को हर तरह की आर्थिक मदद दे रहा है और जरूरी हुआ तो वह सैन्य मदद भी उसे उपलब्ध कराएगा।