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रोजीना इस्लाम को जमानत: उपनिवेशकालीन कानूनों के तहत बांग्लादेश में किया गया था गिरफ्तार
Sun, 23 May 2021 04:57 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sun, 23 May 2021 04:57 PM IST
सार
महिला पत्रकार रोजीना इस्लाम की गिरफ्तारी की काफी आलोचना हुई थी। संयुक्त राष्ट्र ने भी उनकी गिरफ्तारी की निंदा की थी।
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रोजीना इस्लाम
- फोटो : twitter
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विस्तार
बांग्लादेश की एक अदालत ने रविवार को वरिष्ठ महिला खोजी पत्रकार रोजीना इस्लाम को जमानत प्रदान कर दी। रोजीना को उपनिवेशकालीन सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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बांग्ला दैनिक 'प्रथम आलो' की वरिष्ठ संवाददाता रोजीना इस्लाम को गत सोमवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने करीब पांच घंटे तक हिरासत में रखा था। उन पर बिना अनुमति के एक दस्तावेज का फोटो खींचने का आरोप था। बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
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जमा करना होगा पासपोर्ट
डेली स्टार अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मोहम्मद बकी बिल्लाह की अदालत ने दो जमानतदारों को पेश करने के साथ ही 5,000 टका का मुचलका भरने की शर्त पर जमानत प्रदान की। साथ ही जमानत के लिए पासपोर्ट जमा कराने की शर्त भी रखी गई। जमानत आदेश सुनाने के दौरान मजिस्ट्रेट ने कहा, 'पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे राज्य एवं समाज की छवि का संरक्षण करें। मुझे उम्मीद है कि अब से हम सभी पूरी जिम्मेदारी से कार्य करेंगे।'
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1923 के गोपनीयता कानून में मृत्युदंड का प्रावधान
रोजीना इस्लाम को काशिमपुर की केंद्रीय महिला जेल में रखा गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रोजीना के खिलाफ 1923 के सरकारी गोपनीयता कानून के तहत मामला दर्ज कराया था, इसके तहत मृत्युदंड की सजा का भी प्रावधान है। रोजीना खोजी पत्रकार हैं, जिन्होंने हाल के महीनों में कई खबरें प्रकाशित कर कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय के कथित भ्रष्टाचारों को उजागर किया है।
कई विधि विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों ने कहा कि उन्हें पुराना ऐसा कोई मामला याद नहीं है जब किसी पत्रकार के खिलाफ 1923 के सरकारी गोपनीयता कानून के तहत मामला दर्ज किया गया हो।