{"_id":"58f5dfe34f1c1b1974472445","slug":"north-korea-s-missiles-can-make-america-even-worse","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"उत्तर कोरिया की ये 1000 मिसाइलें, तहस-नहस कर सकती हैं अमेरिका को","category":{"title":"Rest of World","title_hn":"अन्य देश","slug":"rest-of-world"}}
उत्तर कोरिया की ये 1000 मिसाइलें, तहस-नहस कर सकती हैं अमेरिका को
amarujala.com- submitted by: आनंद
Updated Tue, 18 Apr 2017 03:17 PM IST
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North Korea Missile Testing
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माना जाता है कि उत्तर कोरिया के पास अलग-अलग क्षमता की एक हजार मिसाइलें हैं। इसमें वो मिसाइलें भी शामिल हैं, जो किसी दिन अमेरिका तक निशाना लगा सकती हैं। उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम ने पिछले कुछ दशक में काफी तरक्की की है।
उसके हथियारों के खजाने में 1960 और 70 के दशक में रॉकेट होते थे। 1980-90 के दशक तक उसके पास छोटी और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। अभी हाल ही में उत्तर कोरिया ने घोषणा की है कि वह इंटरकांटिनेंटल मिसाइल बना रहा है। जिसके जरिए वो पश्चिमी देशों में निशाने भेद सकता है।
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उसके हथियारों के खजाने में 1960 और 70 के दशक में रॉकेट होते थे। 1980-90 के दशक तक उसके पास छोटी और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। अभी हाल ही में उत्तर कोरिया ने घोषणा की है कि वह इंटरकांटिनेंटल मिसाइल बना रहा है। जिसके जरिए वो पश्चिमी देशों में निशाने भेद सकता है।
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मिसाइलों की क्षमता
. छोटी दूरी : 1000 किमी या उससे कम।
. मध्यम दूरी : एक से तीन हजार किमी।
. इंटरमीडिएट रेंज : तीन हजार किमी से साढ़े पांच हजार किमी तक
. इंटरकांटिनेटल : साढ़े पांच हजार किमी से अधिक की दूरी।
. आइए जानते हैं उत्तर कोरिया की मिसाइलें और उनकी क्षमता के बारे में।
. मध्यम दूरी : एक से तीन हजार किमी।
. इंटरमीडिएट रेंज : तीन हजार किमी से साढ़े पांच हजार किमी तक
. इंटरकांटिनेटल : साढ़े पांच हजार किमी से अधिक की दूरी।
. आइए जानते हैं उत्तर कोरिया की मिसाइलें और उनकी क्षमता के बारे में।
छोटी दूरी की मिसाइल
उत्तर कोरिया की आधुनिक मिसाइल परियोजना की शुरुआत स्कड से हुई। खबरों के मुताबिक ये उसके पास 1976 में मिस्र के जरिए आई। उसने 1984 में इसका देसी संस्करण ह्वानसांग तैयार कर लिया। माना जाता है कि इससे वो अपने पड़ोसी दक्षिण कोरिया को निशाना बना सकता है जिसके साथ उसके रिश्ते काफी खराब हैं। ह्वानसांग-5 और ह्वानसांग-6 को स्कड-बी और स्कड-सी के नाम से जाना जाता है। इसकी क्षमता क्रमश: तीन सौ और पांच सौ किलोमीटर मार करने की है।
ये मिसाइलें परंपरागत हथियारों के साथ-साथ जैविक, रासायनिक और परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हैं। इन दोनों मिसाइलों को परीक्षण के बाद तैनात किया जा चुका है। इन्हें ईरान को बेचा भी गया है। उत्तर कोरिया ने 1980 के अंत में मध्यम दूरी की एक नई मिसाइल पर काम शुरू किया। इसे नोडांग के नाम से जाना जाता है। यह करीब एक हजार किमी तक मार कर सकती है। यह मिसाइल स्कड के डिजाइन पर आधारित है।लेकिन यह उससे 50 फीसद अधिक बड़ी है और अधिक शक्तिशाली इंजन लगा हुआ है।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज के अप्रैल 2016 में किए गए एक विश्लेषण के मुताबिक ये मिसाइल पूरे दक्षिण कोरिया और अधिकांश जापान को निशाना बना सकती है। इसके मुताबिक अक्तूबर में 2010 में प्रदर्शित इसके एक संस्करण की क्षमता संभत 1600 किमी है। इससे जापानी राज्य ओकिनावा में स्थित अमरीकी ठिकाने को निशाना बनाया जा सकता है। माना जाता है कि नोडांग का 2006, 2009, 2014 और 2016 में परीक्षण किया गया।
ये मिसाइलें परंपरागत हथियारों के साथ-साथ जैविक, रासायनिक और परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हैं। इन दोनों मिसाइलों को परीक्षण के बाद तैनात किया जा चुका है। इन्हें ईरान को बेचा भी गया है। उत्तर कोरिया ने 1980 के अंत में मध्यम दूरी की एक नई मिसाइल पर काम शुरू किया। इसे नोडांग के नाम से जाना जाता है। यह करीब एक हजार किमी तक मार कर सकती है। यह मिसाइल स्कड के डिजाइन पर आधारित है।लेकिन यह उससे 50 फीसद अधिक बड़ी है और अधिक शक्तिशाली इंजन लगा हुआ है।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज के अप्रैल 2016 में किए गए एक विश्लेषण के मुताबिक ये मिसाइल पूरे दक्षिण कोरिया और अधिकांश जापान को निशाना बना सकती है। इसके मुताबिक अक्तूबर में 2010 में प्रदर्शित इसके एक संस्करण की क्षमता संभत 1600 किमी है। इससे जापानी राज्य ओकिनावा में स्थित अमरीकी ठिकाने को निशाना बनाया जा सकता है। माना जाता है कि नोडांग का 2006, 2009, 2014 और 2016 में परीक्षण किया गया।
इंटरमीडिएट मिसाइलें
उत्तर कोरिया मुसुडान मिसाइल का कई सालों से विकास कर रहा है। उसने 2016 में इसका कई बार परीक्षण भी किया। हालांकि इसकी क्षमता को लेकर संदेह भी जताया जाता रहा है। इसराइल के खुफिया सूत्रों के मुताबिक इसकी रेंज 2500 किलोमीटर है। वहीं अमरीकी मिसाइल डिफेंस एजेंसी का अनुमान है कि इसकी क्षमता 3200 किलोमीटर है। वहीं अन्य स्रोत इसकी क्षमता करीब चार हजार किमी तक बताते हैं।
मुसुडान की कम क्षमता वाली मिसाइलों को नोडांग- बी या तेईपोडांग-एक्स के नाम से जाना जाता है। यह पूरे दक्षिण कोरिया और जापान को निशाना बना सकता है। वहीं इसका उन्नत संस्करण गुआम में स्थित अमरीकी ठिकाने को निशाना बना सकता है। हालांकि यह तो नहीं पता है कि यह कितना वजन ले जा सकती है। लेकिन अनुमानों के मुताबिक यह एक से सवा टन तक वजन उठा सकती है।
उत्तर कोरिया ने अगस्त 2016 में दावा किया था कि उसने एक पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। यह सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। फरवरी 2017 में इसका जमीन से भी परीक्षण किया गया। उत्तर कोरिया का कहना है कि उसने इसमें ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया ।
मुसुडान की कम क्षमता वाली मिसाइलों को नोडांग- बी या तेईपोडांग-एक्स के नाम से जाना जाता है। यह पूरे दक्षिण कोरिया और जापान को निशाना बना सकता है। वहीं इसका उन्नत संस्करण गुआम में स्थित अमरीकी ठिकाने को निशाना बना सकता है। हालांकि यह तो नहीं पता है कि यह कितना वजन ले जा सकती है। लेकिन अनुमानों के मुताबिक यह एक से सवा टन तक वजन उठा सकती है।
उत्तर कोरिया ने अगस्त 2016 में दावा किया था कि उसने एक पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। यह सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। फरवरी 2017 में इसका जमीन से भी परीक्षण किया गया। उत्तर कोरिया का कहना है कि उसने इसमें ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया ।
मल्टिस्टेज मिसाइल
तेपोडांग-1 को उत्तर कोरिया में पाकेतुसान-1 के नाम से भी जाना जाता है। यह उसकी पहली मल्टीस्टेज मिसाइल है। उसने इसका 1998 में परीक्षण शुरू किया। थिंक टैंक फेडरेशन ऑफ अमरीकन साइंटिंस्ट (एफएएस) का मानना है कि इसका पहला स्टेज नोडांग मिसाइल थी और दूसरा स्टेज ह्वासांग-6 था। ताइपेडांग-2 इसका दूसरे और पाकेटुसान-2 इसका तीसरे स्टेज की बैलिस्टिक मिसाइल थी।
बीते दशक में इसका कई बार परीणक्ष किया गया। अनुमानों के मुताबिक इसकी रेंज पांच से 15 हजार किमी के बीच थी। अगर ताइपेडांग-2 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया और वह अधिकतम ऊंचाई तक पहुंचा तो इसका मतलब यह हुआ कि उसके निशाने पर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कुछ हिस्से आ जाएँगे।
बीते दशक में इसका कई बार परीणक्ष किया गया। अनुमानों के मुताबिक इसकी रेंज पांच से 15 हजार किमी के बीच थी। अगर ताइपेडांग-2 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया और वह अधिकतम ऊंचाई तक पहुंचा तो इसका मतलब यह हुआ कि उसके निशाने पर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कुछ हिस्से आ जाएँगे।
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल
माना जाता है कि उत्तर कोरिया अपनी सबसे अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का विकास कर रहा है। इसे केएन-08 या ह्वासांग-13 के नाम से जाना जाता है। इसका पहला सबूत तब मिला जब सितंबर 2016 में उत्तर कोरिया ने अपने नए रॉकेट इंजन का परीक्षण किया।
इसके बाद कहा गया कि इस इंजन को इंटरकांटिनेंटल मिसाइल पर लगाया जा सकता है। अमरीकी रक्षा मंत्रालय का मानना है कि उत्तर कोरिया के पास कम से कम छह केएन-08 मिसाइलें हैं, जो कि अमेरिका के अधिकांश हिस्से तक मार करने में सक्षम हैं। माना यह भी जाता है कि उसने केएन-14 के नाम से इसका एक उन्नत संस्करण भी तैयार किया है।
लेकिन इसका कभी सार्वजनिक परीक्षण नहीं किया गया। हालांकि जनवरी 2017 में इसके कुछ संकेत जरूर मिले जब उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने यह दावा किया कि उनका देश इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के अंतिम चरण में हैं।
इसके बाद कहा गया कि इस इंजन को इंटरकांटिनेंटल मिसाइल पर लगाया जा सकता है। अमरीकी रक्षा मंत्रालय का मानना है कि उत्तर कोरिया के पास कम से कम छह केएन-08 मिसाइलें हैं, जो कि अमेरिका के अधिकांश हिस्से तक मार करने में सक्षम हैं। माना यह भी जाता है कि उसने केएन-14 के नाम से इसका एक उन्नत संस्करण भी तैयार किया है।
लेकिन इसका कभी सार्वजनिक परीक्षण नहीं किया गया। हालांकि जनवरी 2017 में इसके कुछ संकेत जरूर मिले जब उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने यह दावा किया कि उनका देश इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के अंतिम चरण में हैं।