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PTI: क्या पाकिस्तान की राजनीति से खत्म हो जाएगा PTI का वजूद, इमरान की पार्टी में मची भगदड़ के पीछे की क्या वजह?
Mon, 05 Jun 2023 06:45 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Mon, 05 Jun 2023 06:45 PM IST
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इमरान खान
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) इन दिनों अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर में है। अल कादिर ट्रस्ट केस में इमरान की गिरफ्तारी के बाद से पीटीआई के 80 से अधिक नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। वहीं, कुछ नेताओं ने तो राजनीति से ही संन्यास का एलान कर दिया है। इससे पहले इमरान ने एक बयान में कहा कि वह अकेले भी होंगे तो भी लड़ाई जारी रहेगी।
मीनार-ए-पाकिस्तान में पीटीआई की जनसभा
- फोटो :
सोशल मीडिया
पीटीआई का इतिहास क्या है?
पीटीआई की स्थापना 25 अप्रैल 1996 को लाहौर में हुई। पार्टी ने 2002 के चुनावों के दौरान अपनी पहली सीट जीती, जब इमरान खान ने मियांवाली की राष्ट्रीय असेंबली सीट जीती थी। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर 2008 के आम चुनावों का बहिष्कार किया। 2013 में इसे 75 लाख वोट मिले, जो चुनावों में दूसरे सबसे ज्यादा वोट थे। खैबर पख्तूनख्वा प्रान्त में पीटीआई ने खुद की सरकार बनाई।
2018 के आम चुनावों में पीटीआई सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और इसने गठबंधन की सरकार बनाई। तब पार्टी के मुखिया इमरान खान ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी। पिछले साल अप्रैल में गठबंधन सरकार के घटकों के अलग होने से यह सरकार चली गई।
पीटीआई की स्थापना 25 अप्रैल 1996 को लाहौर में हुई। पार्टी ने 2002 के चुनावों के दौरान अपनी पहली सीट जीती, जब इमरान खान ने मियांवाली की राष्ट्रीय असेंबली सीट जीती थी। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर 2008 के आम चुनावों का बहिष्कार किया। 2013 में इसे 75 लाख वोट मिले, जो चुनावों में दूसरे सबसे ज्यादा वोट थे। खैबर पख्तूनख्वा प्रान्त में पीटीआई ने खुद की सरकार बनाई।
2018 के आम चुनावों में पीटीआई सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और इसने गठबंधन की सरकार बनाई। तब पार्टी के मुखिया इमरान खान ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी। पिछले साल अप्रैल में गठबंधन सरकार के घटकों के अलग होने से यह सरकार चली गई।
इस्लामाबाद में पीटीआई समर्थक
- फोटो :
Agency (File Photo)
इमरान खान की पार्टी पीटीआई पर क्या संकट है?
पीटीआई की महिला सदस्य आयशा इकबाल ने रविवार को पार्टी को अलविदा कह दिया। वह प्रोविंसियल असेम्ब्ली की सदस्य रह चुकी हैं। नौ मई को इमरान खान की गिरफ्तारी और उसके बाद हुई हिंसा के बाद से ही ये सिलसिला चल रहा है। अब तक पार्टी के 80 नेता एक-एक करके पार्टी का दामन छोड़ चुके हैं।
इनमें इमरान के करीबी पूर्व मंत्री असद उमर, शिरीन मजारी, फवाद चौधरी और फिरदौस आशिक अवान जैसे नाम शामिल हैं। कहा ये भी जा रहा है कि आने वाले दिनों में पीटीआई के पहले, दूसरे और तीसरे स्तर के कई और नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं।
इस्तीफे के अलावा पार्टी के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी ने इमरान को परेशानियों को और बढ़ा दिया है। इमरान के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले पार्टी के उपाध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सहित कई अन्य पीटीआई नेता इस वक्त जेल में बंद हैं।
पीटीआई की महिला सदस्य आयशा इकबाल ने रविवार को पार्टी को अलविदा कह दिया। वह प्रोविंसियल असेम्ब्ली की सदस्य रह चुकी हैं। नौ मई को इमरान खान की गिरफ्तारी और उसके बाद हुई हिंसा के बाद से ही ये सिलसिला चल रहा है। अब तक पार्टी के 80 नेता एक-एक करके पार्टी का दामन छोड़ चुके हैं।
इनमें इमरान के करीबी पूर्व मंत्री असद उमर, शिरीन मजारी, फवाद चौधरी और फिरदौस आशिक अवान जैसे नाम शामिल हैं। कहा ये भी जा रहा है कि आने वाले दिनों में पीटीआई के पहले, दूसरे और तीसरे स्तर के कई और नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं।
इस्तीफे के अलावा पार्टी के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी ने इमरान को परेशानियों को और बढ़ा दिया है। इमरान के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले पार्टी के उपाध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सहित कई अन्य पीटीआई नेता इस वक्त जेल में बंद हैं।
PTI protest in Islamabad
- फोटो :
ANI
पीटीआई पर बैन का भी संकट
हिंसक घटनाओं के बाद पाकिस्तान की गठबंधन सरकार के कई नेताओं ने 27 साल पुरानी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के संकेत भी दिए। गठबंधन सरकार की पार्टियों पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पाकिस्तान-फजल (जेयूआई-एफ) ने अतिवाद और हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा समर्थित पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया था।
इन हमलों के बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया था कि सत्तारूढ़ गठबंधन जल्द ही संसद में पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश करेगा। आसिफ ने कहा था कि संघीय सरकार के सभी गठबंधन सहयोगियों को इस मुद्दे पर साथ लिया जाएगा।
हिंसक घटनाओं के बाद पाकिस्तान की गठबंधन सरकार के कई नेताओं ने 27 साल पुरानी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के संकेत भी दिए। गठबंधन सरकार की पार्टियों पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पाकिस्तान-फजल (जेयूआई-एफ) ने अतिवाद और हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा समर्थित पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया था।
इन हमलों के बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया था कि सत्तारूढ़ गठबंधन जल्द ही संसद में पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश करेगा। आसिफ ने कहा था कि संघीय सरकार के सभी गठबंधन सहयोगियों को इस मुद्दे पर साथ लिया जाएगा।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान
- फोटो :
सोशल मीडिया
पीटीआई में क्यों हो रहा सामूहिक पलायन?
पीटीआई छोड़ने वाली नेताओं ने काफी हद तक एक ही वजह का हवाला दिया है। ज्यादातर पार्टी नेताओं ने यह कहते हुए पीटीआई छोड़ी कि वे या तो विराम ले रहे हैं या सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रहे हैं। हालांकि, इन नेताओं ने जोर देकर कहा है कि उन्होंने किसी बाहरी दबाव में पद छोड़ने का निर्णय नहीं लिया, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने सेना के दबाव के कारण इस्तीफा दिया है।
लंदन के एसओएएस विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के एक सहयोगी प्रोफेसर अविनाश पालीवाल ने बताया, 'यह नाटकीय कार्रवाई सेना द्वारा उन सभी को तोड़ने की एक स्पष्ट रणनीति है जो इमरान खान के साथ हैं। एक बार उन लोगों के चले जाने के बाद, अगला नंबर खान का होगा।’
पीटीआई छोड़ने वाली नेताओं ने काफी हद तक एक ही वजह का हवाला दिया है। ज्यादातर पार्टी नेताओं ने यह कहते हुए पीटीआई छोड़ी कि वे या तो विराम ले रहे हैं या सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रहे हैं। हालांकि, इन नेताओं ने जोर देकर कहा है कि उन्होंने किसी बाहरी दबाव में पद छोड़ने का निर्णय नहीं लिया, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने सेना के दबाव के कारण इस्तीफा दिया है।
लंदन के एसओएएस विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के एक सहयोगी प्रोफेसर अविनाश पालीवाल ने बताया, 'यह नाटकीय कार्रवाई सेना द्वारा उन सभी को तोड़ने की एक स्पष्ट रणनीति है जो इमरान खान के साथ हैं। एक बार उन लोगों के चले जाने के बाद, अगला नंबर खान का होगा।’
rallies held by PTI in Khyber Pakhtunkhwa
- फोटो :
twitter
इस्तीफों पर इमरान की प्रतिक्रिया क्या है?
इमरान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी के सदस्यों को बंदूक की नोक पर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कथित जबरदस्ती के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया। इमरान खान ने यह भी कहा कि अगर सभी नेता पार्टी छोड़ देते हैं और वे अकेले रह जाते हैं तो भी उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
इमरान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी के सदस्यों को बंदूक की नोक पर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कथित जबरदस्ती के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया। इमरान खान ने यह भी कहा कि अगर सभी नेता पार्टी छोड़ देते हैं और वे अकेले रह जाते हैं तो भी उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में विरोध-प्रदर्शन।
- फोटो :
सोशल मीडिया
आगे क्या होगा?
अपनी पार्टी से कई इस्तीफों के बावजूद, पूर्व पीएम चुनाव जीतने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहे कितने भी लोग चले जाएं, जिसे भी पीटीआई का टिकट मिलेगा वह चुनाव जीत जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान की सियासत पर करीबी नजर रखने वालों को लगता है कि इमरान की पाकिस्तान के शीर्ष नेता के रूप में वापसी की संभावना कम दिख रही है। उनके अधिकांश सहयोगियों के पार्टी छोड़ने या जेल जाने के बाद, लगता है कि पीटीआई प्रमुख अलग-थलग पड़ गए हैं। इसके साथ ही उनका समर्थन भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
अपनी पार्टी से कई इस्तीफों के बावजूद, पूर्व पीएम चुनाव जीतने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहे कितने भी लोग चले जाएं, जिसे भी पीटीआई का टिकट मिलेगा वह चुनाव जीत जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान की सियासत पर करीबी नजर रखने वालों को लगता है कि इमरान की पाकिस्तान के शीर्ष नेता के रूप में वापसी की संभावना कम दिख रही है। उनके अधिकांश सहयोगियों के पार्टी छोड़ने या जेल जाने के बाद, लगता है कि पीटीआई प्रमुख अलग-थलग पड़ गए हैं। इसके साथ ही उनका समर्थन भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।