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Presidential Debate: यूएस चुनाव में प्रेसिडेंशियल डिबेट अहम क्यों, पहली बहस में बाइडन-ट्रंप के बीच क्या हुआ?

Sat, 29 Jun 2024 03:38 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sat, 29 Jun 2024 03:38 PM IST
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सार
US Presidential Debates: अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग के छह हफ्ते पहले दो प्रमुख पार्टियों रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवारों के बीच टीवी पर तीन बार बहस होती है। टेलीविजन पर होने वाली बहसें दशकों से राष्ट्रपति चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती रही हैं। ये मतदाताओं को उम्मीदवारों को परखने के लिए एक मंच होती हैं।
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presidential debate importance in US elections and first debate analysis between Biden Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 - फोटो : amar ujala

विस्तार

अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। नवंबर में होने वाले चुनाव को लेकर मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके प्रतिद्वंद्वी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच गुरुवार को पहली प्रेसिडेंशियल बहस हुई। दोनों ने करीब 75 मिनट तक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए और निजी हमले भी किए। 


राष्ट्रपति बाइडन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच दूसरी बहस 10 सितंबर को आयोजित की जाएगी। अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रेसिडेंशियल बहस एक अहम कड़ी मानी जाती है। इस बहस में दोनों उम्मीदवार एक-दूसरे की कमजोरियों को उजागर करने की कोशिश करते हैं।


आइये जानते हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है? राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया क्या है? अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में प्रेसिडेंशियल डिबेट क्या होती है? चुनाव में प्रेसिडेंशियल बहस की भूमिका क्या होती है? पहली बहस में बाइडन और ट्रंप के बीच क्या हुआ? 

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 - फोटो : amar ujala
पहले जानते हैं कि कैसे होता है अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव? 
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव भारत के आम चुनाव से काफी अलग होता है। भारत में पार्टियां आम चुनाव में बहुमत हासिल करने की कोशिश करती हैं। बहुमत वाले दल या गठबंधन के सांसद अपना नेता चुनते हैं। चुना हुआ नेता प्रधानमंत्री बनता है। अमेरिका में ठीक इसके उलट है। यहां की दो प्रमुख पार्टियां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति उम्मीदवार के चयन को लेकर भी जनता के बीच जाती हैं। अमेरिका में द्विदलीय व्यवस्था है, भारत की तरह अमेरिका में बहुदलीय व्यवस्था नहीं है।

चरण 1: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया चार चरण में संपन्न होती है। इसमें पहला चरण प्राइमरी और कॉकस चुनाव का होता है। हर पार्टी में ऐसे कई लोग होते हैं जो राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। प्रत्येक के पास सरकार के काम करने के तरीके के बारे में अपने विचार होते हैं और एक मत वाले लोग एक ही राजनीतिक दल से हो सकते हैं, यहीं पर प्राइमरी और कॉकस की भूमिका सामने आती है। प्राइमरी में पार्टी के सदस्य आम चुनाव में उनका प्रतिनिधित्व करने वाले सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार के लिए वोट करते हैं। वहीं दूसरी ओर कॉकस में पार्टी के सदस्य चर्चाओं और मतदान के माध्यम से सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार का चयन करते हैं। प्राइमरी और कॉकस चुनाव में जो जीतता है वह दोनों पार्टियों की ओर से औपचारिक उम्मीदवार बनता है। इसके बाद प्रत्येक राजनीतिक दल के उम्मीदवार अपने पार्टी सदस्यों का समर्थन जुटाने के लिए पूरे देश में प्रचार करते हैं।

राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ के औपचारिक रूप से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद शुरू होती है। अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीतने वाले दोनों उम्मीदवार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ते हैं। 

चरण 2: अमेरिकी चुनाव के दूसरे चरण में राष्ट्रीय सम्मेलन शामिल है। प्रत्येक सम्मेलन में, राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार एक उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनता है। उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रत्येक पार्टी अंतिम राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चयन करने के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करती है। 

वोटिंग के छह हफ्ते पहले दोनों उम्मीदवारों के बीच टीवी पर राष्ट्रपति पद के लिए तीन बार बहस होती है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति बाइडन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच पहली बहस 27 जून को आयोजित की गई। दो और बहस होनी बाकी है। 

चरण 3: तीनों बहस होने के बाद मतदान की प्रक्रिया होती है जो अमेरिका चुनाव प्रक्रिया का तीसरा चरण होता है। इस चरण में देश भर के हर राज्य में लोग एक राष्ट्रपति और एक उप राष्ट्रपति के लिए वोट करते हैं। जब लोग अपना वोट डालते हैं, तो वे वास्तव में एक ऐसे समूह के लिए वोट कर रहे होते हैं, जिन्हें इलेक्टर कहा जाता है। 

चरण 4: चौथे और अंतिम स्थान पर आता है इलेक्टोरल कॉलेज। दरअसल, अमेरिका के चुनाव में इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम बेहद अहम है। यह लोगों का समूह होता है जो 538 इलेक्टर्स को चुनता है। जिसे 270 इलेक्टर्स का समर्थन मिल जाता है, वह अमेरिका का राष्ट्रपति बनता है। इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम में, प्रत्येक राज्य को कांग्रेस यानी संसद में उसके प्रतिनिधित्व के आधार पर एक निश्चित संख्या में इलेक्टर मिलते हैं। आम चुनाव के बाद प्रत्येक इलेक्टर वोट डालता है और जिस उम्मीदवार को 538 इलेक्टोरल वोट में से आधे से अधिक (270) वोट मिलते हैं, वह जीत जाता है। जीत के बाद नव निर्वाचित राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जनवरी 2025 में पदभार ग्रहण करेंगे।

बाइडन बनाम ट्रंप
बाइडन बनाम ट्रंप - फोटो : Amar Ujala
राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया को समझें…
राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया में लगभग दो साल लगते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए उम्मीदवारों को बुनियादी शर्तों को पूरा करना चाहिए। यहां राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए नियम के मुताबिक जन्म से अमेरिका का नागरिक होना होता है। उम्र भी कम से कम 35 साल होनी चाहिए और 14 साल से वहां का निवासी होना चाहिए। 
 
प्राइमरी (इसका संचालन नियमित पोलिंग स्टेशन पर होता है) और कॉकस (एक तरह की स्थानीय बैठक) दो तरीके हैं जिनसे लोग राज्यों और राजनीतिक दलों को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुनने में मदद करते हैं। राजनीतिक दल राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के अपने चयन को अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करते हैं। हर चार साल में, अमेरिकी नागरिक आम चुनाव के दौरान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए मतदान करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज तय करता है कि अमेरिका का राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति कौन चुना जाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडन
डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडन - फोटो : ANI
...तो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रेसिडेंशियल डिबेट कैसे होती है?
जॉर्जिया की राजधानी अटलांटा में सीएनएन के स्टूडियो में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच पहली बहस हुई। इसे प्रेसिडेंशियल डिबेट कहा जाता है, क्योंकि सीधे तौर पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच होती है। इस बहस को करीब 8 करोड़ लोगों ने देखा। बहस के तौर तरीकों पर बात करें तो इसकी मेजबानी सीएनएन के दो एंकर जेक टैपर और डाना बैश ने की। इन्हें मध्यस्थ या मॉडरेटर भी कहा जाता है। नियम के अनुसार, बहस के दौरान दोनों उम्मीदवार एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं और आरोपों का जवाब देते हैं। आरोप-प्रत्यारोप और जवाब से बारी-बारी दोनों को एक-एक मिनट का समय मिलता है। जबकि, एंकरों की तरफ से अहम मुद्दों पर पूछे गए सवालों के जवाब देने के लिए दो मिनट का समय दिया जाता है। बहस के बाद हार-जीत चार बड़े पैमानों पर तय होती है। इन चार पैमानों में मीडिया और एक्सपर्ट्स की राय, ओपिनियन पोल्स के नतीजे, सोशल मीडिया का रुख और वोटिंग इंटेंशन सर्वे शामिल होते हैं।

फिलहाल दोनों की बहस को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। वहीं, अमेरिका के ज्यादातर बड़े मीडिया हाउस और न्यूज चैनलों ने बहस में ट्रंप को विजेता करार दिया है। सीएनएन के इंस्टेंट पोल में भी 67 फीसदी से ज्यादा लोगों ने ट्रंप को विजेता माना है।

जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप
जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : पीटीआई
चुनाव में प्रेसिडेंशियल बहस की भूमिका क्या होती है?
टेलीविजन पर होने वाली बहसें दशकों से राष्ट्रपति चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती रही हैं। ये मतदाताओं को उम्मीदवारों का मूल्यांकन करने के लिए एक मंच मुहैया कराती हैं। बहस के दौरान कभी-कभी ऐसे निर्णायक क्षण आते हैं जिसमें एक उम्मीदवार खुद को दूसरे से बेहतर दिखा सकता है। 1987 के बाद पहली बार, प्रमुख पार्टी के उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार करने वालों ने टीवी बहसों पर सहमति जताई।

डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन
डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन - फोटो : अमर उजाला
पहली बहस में बाइडन और ट्रंप के बीच क्या हुआ? 
पहली बहस में ट्रंप ने बाइडन प्रशासन की तमाम नीतियों की आलोचना की तो पलटवार में बाइडन ने ट्रंप को उनके कार्यकाल में हुए कथित गलत कामों को गिनाया। 

बहस के केंद्र में रहे ये बड़े सवाल

चीन से आने वाला नशीला पदार्थ फेंटानिल: एंकरों ने नशे की ओवरडोज से बढ़ रही मौतों पर सवाल किया तो ट्रंप ने कहा, बाइडन के कार्यकाल में देश को बहुत नुकसान हुआ है। इनको चीन से पैसे मिलते हैं। वे एक मंचूरियन कैंडिडेट हैं। इसका जवाब देते हुए बाइडन बोले-ट्रंप के आरोप झूठे हैं। मेरे कार्यकाल में चीन से हो रही फेंटानिल की तस्करी में कमी आई है।


अर्थव्यवस्था मजबूत हुई फिर भी जरूरी सामान महंगा: एंकरों ने बाइडन से पूछा देश में महंगाई बढ़ने की रफ्तार कम हुई है, लेकिन अब भी जरूरी सामानों की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस पर बाइडन बोले, सब जानते हैं, ट्रंप मेरे लिए बीमार अर्थव्यवस्था छोड़कर गए थे। हमने 15 हजार नई नौकरियां पैदा की हैं, आगे और करेंगे। ट्रंप बोले- बाइडेन ने सिर्फ अवैध प्रवासियों को नौकरियां दी हैं। जबकि, मैंने अमेरिका के लोगों को सबसे ऊपर रखा था।

कर व्यवस्था में अमीरों को फायदा: ट्रंप से पूछा गया कि उन्हें क्यों लगता है कि अमेरिका के अमीरों को कम टैक्स देना चाहिए व आम लोगों पर टैक्स का बोझ कितना सही है। इस पर ट्रंप बोले-मैंने सिर्फ अमीरों को ही नहीं बल्कि सभी के टैक्स में छूट दी थी। वहीं, बाइडन ने इस पर दो टूक कहा कि ट्रंप ने टैक्स में कटौती कर देश के अमीरों को फायदा पहुंचाया है।

विदेश नीति, अफगानिस्तान व युद्ध: ट्रंप से बाइडन की विदेश नीति की आलोचना पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बाइडन अब तक के सबसे बुरे कमांडर-इन-चीफ साबित हुए हैं। उनका इशारा अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी पर था। इस पर बाइडन ने ट्रंप को उनका एक पुराना बयान याद दिलाया, जिसमें उन्होंनेे देश के सैनिकों को लूजर कहा था।

जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप
जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : पीटीआई
दोनों उम्मीदवारों के लिए चुनाव के मुद्दे क्या हैं?
पहली बहस में ट्रंप और बाइडन के बीच तमाम मुद्दों पर तीखी बहस हुई। अब चुनाव अभियान के दौरान भी दोनों एक दूसरे को घेरने के लिए कई मुद्दे सामने ला सकते हैं। डेमोक्रेट्स के बीच इस बात पर बहस चल रही है कि बाइडन को ट्रंप के खिलाफ आपराधिक मामलों को कितना अहम मुद्दा बनाना चाहिए। इसमें 2016 के चुनाव को प्रभावित करने के अलावा, ट्रंप पर तीन और आपराधिक मुकदमों में गंभीर आरोप भी लगे हैं।

डेमोक्रेट्स ने ट्रम्प के अपराधों और लंबित मामलों को कानून के राज और न्याय की जीत के रूप में पेश करने की कोशिश की है, जबकि पूर्व राष्ट्रपति ने दावा किया है कि मामला धांधली और एक घोटाला था।

इस बीच, दूसरे कार्यकाल के लिए ट्रम्प की योजनाओं में उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर मुकदमा चलाना और कैपिटल हिल पर 6 जनवरी के हमले में शामिल लोगों के मुकदमे को वापस लेने का वादा शामिल है। ट्रंप बाइडन के बेटे हंटर का भी मुद्दा उठा सकते हैं, जिन्हें हाल ही में बंदूक खरीदने से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया गया था। ट्रंप और उनके सहयोगियों ने हंटर के विदेशी व्यापारिक सौदों को राष्ट्रपति से जोड़ने की भी कोशिश की है।

राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप ने तीन रूढ़िवादी न्यायाधीशों को नामित किया था जिन्होंने गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के लिए मतदान किया। इस कदम से मुख्य रूप से रूढ़िवादी राज्यों में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।

बाइडन के सामने अर्थव्यवस्था और यूएस-मेक्सिको सीमा को संभालने के उनके तरीके से उपजे असंतोष जैसे सवाल भी विपक्ष की तरफ से होने की उम्मीद है।
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