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PAK Protest: खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में भड़की हिंसा, ईरान समर्थक प्रदर्शनों में अब तक 10 लोगों की मौत
Sun, 01 Mar 2026 11:30 PM IST
Himanshu Singh Chandel
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:30 PM IST
सार
Pakistan Protest Violence: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन भड़क गए। गिलगित और कराची में हिंसक झड़पों के दौरान कई लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हो गए। अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाने की कोशिश के बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की।
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पाकिस्तान में प्रदर्शन तेज
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब पड़ोसी देशों में भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका-इस्राइल हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इन प्रदर्शनों ने कई जगह हिंसक रूप ले लिया, जिसमें उत्तरी शहर गिलगित और कराची में कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।
पाकिस्तान में क्यों भड़के प्रदर्शन?
दरअसल खामनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद पाकिस्तान में बड़ी संख्या में ईरान समर्थक प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ नारेबाजी की और कई जगह सरकारी व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को निशाना बनाया। हालात उस समय बिगड़ गए जब कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों से झड़प शुरू हो गई।
गिलगित में क्या हुआ?
पाकिस्तान के उत्तरी गिलगित शहर में हजारों प्रदर्शनकारियों ने विरोध मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह टकराव हुआ। झड़पों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कार्यालयों और सरकारी इमारतों पर हमला किया तथा कुछ जगहों पर आगजनी भी की गई। बाद में सेना और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर हालात पर काबू पाया गया।
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ये भी पढ़ें- यूएई पर ईरानी हमले में भारतीय नागरिक घायल: दूतावास सक्रिय; भारत ने नागरिकों की सुरक्षा पर बढ़ाई निगरानी
कराची में अमेरिकी दूतावास बना निशाना
कराची में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण रही। ईरान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर पहुंचने की कोशिश की और पत्थरबाजी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया। अस्पताल अधिकारियों के अनुसार झड़पों में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। दूतावास परिसर की खिड़कियां तोड़ी गईं और पास स्थित पुलिस चौकी को आग लगा दी गई।
देशभर में बढ़ाई गई सुरक्षा
स्थिति बिगड़ने के बाद इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर समेत कई शहरों में अमेरिकी दूतावासों और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि दुख और गुस्से के बावजूद कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।
सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खामनेई की मौत पर गहरा दुख जताया और ईरान के साथ एकजुटता व्यक्त की। वहीं प्रशासन ने चेतावनी दी कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अधिकारियों का कहना है कि हालात अब नियंत्रण में हैं, लेकिन विरोध प्रदर्शन जारी रहने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
क्षेत्रीय तनाव का बढ़ता असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-अमेरिका-इस्राइल संघर्ष का असर अब पूरे क्षेत्र में फैल रहा है। पाकिस्तान में शिया समुदाय बड़ी संख्या में मौजूद है और पहले भी अमेरिका व इस्राइल विरोधी प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन इस स्तर की हिंसा दुर्लभ मानी जा रही है। खामनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और प्रदर्शन हो सकते हैं। सरकार ने संवेदनशील शहरों में अतिरिक्त बल तैनात कर दिए हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर दक्षिण एशिया तक पहुंचने से अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बढ़ गई है।
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पाकिस्तान में क्यों भड़के प्रदर्शन?
दरअसल खामनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद पाकिस्तान में बड़ी संख्या में ईरान समर्थक प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ नारेबाजी की और कई जगह सरकारी व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को निशाना बनाया। हालात उस समय बिगड़ गए जब कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों से झड़प शुरू हो गई।
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गिलगित में क्या हुआ?
पाकिस्तान के उत्तरी गिलगित शहर में हजारों प्रदर्शनकारियों ने विरोध मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह टकराव हुआ। झड़पों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कार्यालयों और सरकारी इमारतों पर हमला किया तथा कुछ जगहों पर आगजनी भी की गई। बाद में सेना और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर हालात पर काबू पाया गया।
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कराची में अमेरिकी दूतावास बना निशाना
कराची में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण रही। ईरान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर पहुंचने की कोशिश की और पत्थरबाजी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया। अस्पताल अधिकारियों के अनुसार झड़पों में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। दूतावास परिसर की खिड़कियां तोड़ी गईं और पास स्थित पुलिस चौकी को आग लगा दी गई।
देशभर में बढ़ाई गई सुरक्षा
स्थिति बिगड़ने के बाद इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर समेत कई शहरों में अमेरिकी दूतावासों और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि दुख और गुस्से के बावजूद कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।
सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खामनेई की मौत पर गहरा दुख जताया और ईरान के साथ एकजुटता व्यक्त की। वहीं प्रशासन ने चेतावनी दी कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अधिकारियों का कहना है कि हालात अब नियंत्रण में हैं, लेकिन विरोध प्रदर्शन जारी रहने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
क्षेत्रीय तनाव का बढ़ता असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-अमेरिका-इस्राइल संघर्ष का असर अब पूरे क्षेत्र में फैल रहा है। पाकिस्तान में शिया समुदाय बड़ी संख्या में मौजूद है और पहले भी अमेरिका व इस्राइल विरोधी प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन इस स्तर की हिंसा दुर्लभ मानी जा रही है। खामनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और प्रदर्शन हो सकते हैं। सरकार ने संवेदनशील शहरों में अतिरिक्त बल तैनात कर दिए हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर दक्षिण एशिया तक पहुंचने से अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बढ़ गई है।
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