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जो चीन चाहता है वही करने को मजबूर हो गया है पाकिस्तान, अपने इस अफसर को ड्रैगन के दबाव में हटाया

Thu, 12 Aug 2021 07:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 12 Aug 2021 07:04 PM IST
सार

पिछले हफ्ते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एलान किया कि अब व्यापारी खालिद मंसूर सीपीईसी के बारे में पाकिस्तान की तरफ से मुख्य संपर्क सूत्र होंगे। अभी तक ये जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा निभा रहे थे...

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Pakistan PM Imran Khan announced that now businessman Khalid Mansoor will be main contact person about CPEC
सीपेक-ग्वादर बंदरगाह - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

चीन की परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के बारे में पाकिस्तान ने अपनी नीति में एक अहम बदलाव किया है। बताया जाता है कि ऐसा उसने चीन को खुश करने के लिए किया है। पाकिस्तान में किए अपने निवेश और वहां तैनात अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चीन की चिंताएं हाल में बढ़ी हैं। खासकर हाल में बेल्ट एंड रोड इनशिएटिव (बीआरआई) परियोजना के तहत बन रहे एक बांध पर हुए हमले के बाद उसने बेलाग ढंग से पाकिस्तान को अपनी ये चिंताएं बताई हैं।  

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बीआरआई प्रोजेक्ट के तहत चीन पाकिस्तान में 62 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। इसके तहत चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) बनाया जा रहा है। पिछले हफ्ते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एलान किया कि अब व्यापारी खालिद मंसूर सीपीईसी के बारे में पाकिस्तान की तरफ से मुख्य संपर्क सूत्र होंगे। अभी तक ये जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा निभा रहे थे। वे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर ऑथरिटी (सीपीईसीए) के प्रमुख रहे हैं। अब एलान किया गया है कि वे इस्तीफा दे देंगे।
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जानकारों के मुताबिक बीते 16 जुलाई को बांध परियोजना स्थल पर बम हमले के बाद चीन काफी चिंतित हो गया है। इस हमले में चीन के नौ नागरिक मारे गए थे। पाकिस्तान के अधिकारियों ने उस हमले के बाद कहा था कि इस कार्रवाई को ईस्ट तुर्कमेनिस्तान इस्लामिक मूवमंट (ईटीआईएम) ने अंजाम दिया। ईटीआईएम का मकसद उइघुर मुसलमानों की बहुलता वाले चीन के शिनजियांग प्रांत को आजाद कराना बताया जाता है।

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प्रधानमंत्री इमरान खान ने ये साफ तौर पर नहीं कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा को उनके कार्यकाल के बीच में ही क्यों हटाया जा रहा है। सीपीईसीए के प्रमुख पद पर अगली नियुक्ति का एलान भी अभी नहीं किया गया है। खालिद मंसूर व्यापारी हैं और सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाओं से संबंधित रहे हैं। चीनी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों से वे लगातार संपर्क में रहे हैं। इस कारण समझा जाता है कि चीनी अधिकारियों की चिंताओं को दूर करने की वे बेहतर स्थिति में हैं। लेकिन उन्हें सीपीईसीए का प्रमुख नहीं बनाया गया है।

पाकिस्तानी मीडिया की खबरों के मुताबिक ले.ज.बाजवा पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं। विपक्षी दल उन पर और उनके परिजनों पर लगे आरोपों की न्यायिक जांच कराने की मांग पर अभी भी अडिग हैं। लेकिन पर्यवेक्षकों की राय है कि इस मौके पर बाजवा को चीन के कहने पर हटाया गया है। चीन न सिर्फ सुरक्षा के मुद्दों को लेकर, बल्कि सीपीईसी परियोजनाओं पर प्रगति की धीमी रफ्तार से भी चिंतित रहा है। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि बाजवा को हटाने की घोषणा से कुछ दिन पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री मकदूम शाह महमूद कुरैशी और खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख फैज हमीद ने बीजिंग की यात्रा की थी। दोनों वहां ये भरोसा देने गए थे कि पाकिस्तान की सेना सीपीईसी परियोजनाओं को पूरी सुरक्षा मुहैया कराएगी।

पिछले साल सीपीईसीए का गठन हुआ था। उसका मकसद परियोजना की गति बढ़ाना था। इस प्राधिकरण को सीपीईसी परियोजना संबंधी व्यापक अधिकार दिए गए। लेकिन आरोप है कि बाजवा उन्हें दी गई जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पाए। पाकिस्तान के पूर्व नियोजन मंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के महासचिव अहसान इकबाल ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा कि सीपीईसीए का गठन ही समस्याग्रस्त था। फिर उसके प्रमुख पद पर किसी ऐसे राजनीतिक व्यक्ति की नियुक्ति होनी चाहिए थी, जो टेक्नोलॉजी में माहिर हो।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक प्रगति की धीमी रफ्तार और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण चीन नाराज हुआ। अब उसे खुश करने के लिए इमरान खान सरकार ने कदम उठाए हैं। इससे ये जाहिर हुआ है कि पाकिस्तान के अंदरूनी फैसले भी अब चीन की मर्जी से तय हो रहे हैं।

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