Pakistan: दिवालिया होते पाकिस्तान में कई फैक्ट्रियों पर लगा ताला, संकट दूर करने के लिए क्या कर रही है सरकार?
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विस्तार
पाकिस्तान में आर्थिक संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। संकटग्रस्त देश में कई बड़ी कंपनियों ने कच्चे माल या विदेशी मुद्रा की कमी के कारण काम बंद कर दिया है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिलने वाली वित्तीय मदद भी रुक चुकी है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था ने कहा कि सार्वजनिक या निजी क्षेत्र में अच्छा पैसा कमा रहे लोगों को अर्थव्यवस्था में योगदान देने की जरूरत है। उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो चीन का दौरा करने वाले हैं जिससे एक बार फिर देश को आर्थिक सहयोग की उम्मीद है।
पाकिस्तान में मौजूदा हालत क्या हैं? बिगड़ती अर्थव्यवस्था का क्या प्रभाव पड़ रहा है? चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की क्या स्थिति है? समझौता रुकने के बाद आईएमएफ ने क्या कहा? पाकिस्तान सरकार क्या कर रही है? आइये जानते हैं…
पाकिस्तान में मौजूदा हालत क्या हैं?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरने की बजाय दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। 2022-23 की पहली दो तिमाहियों में पाकिस्तान की विदेशी ऋण अदायगी में 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे डॉलर में और कमी आ गई। 10 फरवरी तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 3.193 अरब डॉलर हो गया। जानकारों के मुताबिक, इस वित्तीय वर्ष के अंत में आर्थिक विकास घटकर 1-1.25 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसी बीच देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि देश पहले ही दिवालिया हो चुका है।
देश में इस संकट का असर सबसे ज्यादा आम लोगों पर पड़ रहा है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यहां दूध की कीमत ₹250 प्रति लीटर और चिकन की कीमतें ₹780 प्रति किलोग्राम तक बढ़ गईं हैं।
बिगड़ती अर्थव्यवस्था का क्या प्रभाव पड़ रहा है?
पाकिस्तान में आर्थिक संकट का असर हर ओर दिख रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में कई बड़ी कंपनियों ने कच्चे माल या विदेशी मुद्रा की कमी के कारण काम करना बंद कर दिया है। शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंज के एक बयान के मुताबिक, सुजुकी मोटर कॉर्प की स्थानीय इकाई ने अपने विनिर्माण संयंत्र को 21 फरवरी तक बंद कर दिया। कंपनी ने कहा कि पुर्जों की कमी बनी हुई है। सुजुकी की तरह, होंडा मोटर कंपनी और टोयोटा मोटर कॉर्प की स्थानीय इकाइयां भी सप्ताह भर बंद रहीं। पाकिस्तान ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में कार की बिक्री जनवरी में लगभग तीन साल में सबसे कम 65 फीसदी हो गई। उर्वरक, स्टील और कपड़ा के निर्माताओं ने अपने कारखानों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है। ये नकदी की कमी और मांग में गिरावट से जूझ रहे हैं।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की क्या स्थिति है?
पाकिस्तान में चल रहे वित्तीय संकट और चीन में आर्थिक मंदी का चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) कार्यक्रम की प्रगति पर असर पड़ा है। एक दशक पहले शुरू हुई सीपीईसी परियोजना को पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए का अहम माना गया था। हालांकि, सात साल बाद सीपीईसी के तहत कई परियोजनाएं अभी भी शुरू नहीं हुई हैं, जबकि चालू हो चुकी परियोजनाओं में से कुछ घाटे में चल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट पैसों की कमी से भी जूझ रहा है। इसके अलावा, चीन द्वारा वादा किए गए धन को जारी करने से इनकार करने से सीपीईसी के कार्यान्वयन पर असर पड़ा है और साथ ही, नकदी की तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को अब तक लिए गए चीनी ऋणों को चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
एक अहम परियोजना, कराची सर्कुलर रेलवे (केसीआर) को सीपीईसी परियोजनाओं की सूची से हटा दिया गया है। पाकिस्तान के पास इसे बनाने के लिए धन नहीं है। इसके अलावा, 2022 में चीन की आर्थिक स्थिति पिछले पांच दशकों में सबसे खराब रही है इसलिए वह पाकिस्तान को वित्तीय सहायता देने की हालत में नहीं है। चीन से वित्तीय सहायता कम होने की वजह से सीपीईसी परियोजनाओं की प्रगति धीमी हो रही है। इसके अलावा पाकिस्तान पर चीनी ऋण चुकाने का दवाब है जो उसके कुल विदेशी ऋण का 30 फीसदी है।
समझौता रुकने के बाद आईएमएफ ने क्या कहा?
पाकिस्तान की आर्थिक हालत में सुधार के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का बेलआउट पैकेज काफी अहम है। हालांकि, यह पैकेज भी अभी बीच में अटका हुआ है। इसी बीच आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान को गरीबों को सुरक्षित करने और अमीरों पर कर लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'हम दो चीजों पर जोर दे रहे हैं। नंबर एक, कर राजस्व। जो लोग कर दे सकते हैं, जो सार्वजनिक या निजी क्षेत्र में अच्छा पैसा कमा रहे हैं उन्हें अर्थव्यवस्था में योगदान देने की जरूरत है। दूसरे, सब्सिडी को केवल उन लोगों को वितरण करना चाहिए जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है।'
बता दें, पाकिस्तान ने 31 जनवरी से 9 फरवरी तक इस्लामाबाद में आईएमएफ प्रतिनिधिमंडल के साथ 10 दिनों की वार्ता की, लेकिन यह समझौता पूरा नहीं हो सका था। हालांकि, आईएमएफ ने कहा है कि दोनों पक्ष वर्चुअल माध्यम से वार्ता जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं।
पाकिस्तान सरकार क्या कर रही है?
देश में जारी आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी शनिवार को पहली बार चीन का दौरा करेंगे। दो दिवसीय यात्रा के बारे में कहा गया कि बिलावल अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मिलेंगे जिसमें मजबूत व्यापार और आर्थिक सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चीन हाल के वर्षों में देश को मुसीबत में मदद करता रहा है। लेकिन चीनी नागिरकों पर हुए हालिया हमलों ने पाकिस्तान और चीन के रिश्तों में कड़वाहट पैदा की है। उधर आईएमएफ की रिपोर्ट है कि पाकिस्तान पर चीन का 18.4 अरब डॉलर का कर्ज बकाया है।
सरकार नए कर नियमों को लागू करने और आईएमएफ के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए असमंजस की स्थिति में है क्योंकि देश का भंडार $2.9 बिलियन तक गिर गया है। विशेषज्ञों की मानें तो पाकिस्तान इतने भंडार से केवल 16 या 17 दिनों तक का ही आयात कर सकता है। अगर आईएमएफ के साथ समझौते पूरा हो जाता है तो इसे न केवल 1.2 अरब डॉलर का फंड मिलेगा बल्कि मित्र देशों से मिलने वाला फंड, जो रुका हुआ है, वह भी मिल जाएगा।