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Pakistan: मुनीर के राष्ट्रपति बनने की अटकलों पर पाकिस्तान की सेना का बयान, कहा- ये सभी अटकलें बेबुनियाद
Wed, 06 Aug 2025 05:01 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 06 Aug 2025 05:01 PM IST
सार
पाकिस्तानी सेना ने साफ कहा है कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर के राष्ट्रपति बनने की कोई योजना नहीं है। सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताया। सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को खारिज करते हुए कहा गया कि जनरल मुनीर का ध्यान केवल पाकिस्तान की स्थिरता पर है। आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने भी राष्ट्रपति जरदारी को हटाने की अटकलों को गलत बताया।
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आसिम मुनीर
- फोटो : एक्स/डीजी आईएसपीआर
विस्तार
पाकिस्तान में बीते कुछ हफ्तों से यह चर्चा तेज हो गई थी कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर राष्ट्रपति बनने की तैयारी में हैं और वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाया जा सकता है। इस तरह की अफवाहें खासतौर पर सोशल मीडिया पर चल रही थीं, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सेना अब खुलकर सत्ता में आने की तैयारी कर रही है। लेकिन अब खुद सेना ने इन चर्चाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने द इकोनॉमिस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि जनरल आसिम मुनीर के राष्ट्रपति बनने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने साफ किया कि ऐसी कोई योजना न तो चल रही है और न ही विचाराधीन है। पाकिस्तान के सरकारी टेलीविजन चैनल पीटीवी ने भी इस बयान को बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा किया।
जरदारी की कुर्सी खतरे में नहीं
इससे पहले 10 जुलाई को आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने भी इन अफवाहों को ‘षड्यंत्रकारी अभियान’ करार देते हुए खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति जरदारी और सेना के नेतृत्व के बीच सम्मान और विश्वास का संबंध है। नकवी ने यह भी जोड़ा कि जनरल मुनीर का पूरा ध्यान केवल पाकिस्तान की मजबूती और स्थिरता पर है, न कि किसी राजनीतिक पद या ताकत पर।
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इस अफवाह के पीछे किसका हाथ?
सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर चल रही इस मुहिम के पीछे कुछ ऐसे गुटों का हाथ माना जा रहा है जो सेना और सरकार के बीच टकराव का माहौल बनाना चाहते हैं। इन अफवाहों में कहा गया कि मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा देकर उन्हें राष्ट्रपति भवन तक लाने की तैयारी हो रही है। जबकि हकीकत में न तो पाकिस्तान में फील्ड मार्शल का एक्टिव रोल है और न ही इस पद पर कोई संवैधानिक शक्ति होती है।
ये भी पढ़ें- रूस-यूक्रेन शांति वार्ता की नई उम्मीद, मॉस्को पहुंचे ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकोफ
सेना की छवि बचाने की कोशिश
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती जा रही है और सेना की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इमरान खान की गिरफ्तारी, चुनाव में धांधली के आरोप और विपक्षी दलों की नाराजगी ने सेना की छवि को प्रभावित किया है। ऐसे में सेना चाहती है कि वो खुद को राजनीति से दूर और ‘संविधान के रक्षक’ की भूमिका में दिखाए।
ये भी पढ़ें- 'सुनिश्चित करेंगे दोबारा न हो ऐसी त्रासदी...', हिरोशिमा परमाणु बम हमले की 80वीं बरसी पर बोले पीएम इशिबा
सेना की छवि और स्थिरता दोनों का संतुलन
सेना के इस बयान को सिर्फ अफवाहों को खारिज करना नहीं, बल्कि अपनी भूमिका को स्पष्ट करना भी माना जा रहा है। यह संदेश देने की कोशिश है कि सेना सत्ता में दखल नहीं देना चाहती और वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करती है। हालांकि, पाकिस्तान की राजनीति में सेना की बैकडोर भूमिका हमेशा से रही है, इसलिए ऐसी अफवाहों का उभरना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार सेना ने सार्वजनिक रूप से इसका खंडन कर एक सख्त संदेश देने की कोशिश की है।
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पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने द इकोनॉमिस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि जनरल आसिम मुनीर के राष्ट्रपति बनने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने साफ किया कि ऐसी कोई योजना न तो चल रही है और न ही विचाराधीन है। पाकिस्तान के सरकारी टेलीविजन चैनल पीटीवी ने भी इस बयान को बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा किया।
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जरदारी की कुर्सी खतरे में नहीं
इससे पहले 10 जुलाई को आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने भी इन अफवाहों को ‘षड्यंत्रकारी अभियान’ करार देते हुए खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति जरदारी और सेना के नेतृत्व के बीच सम्मान और विश्वास का संबंध है। नकवी ने यह भी जोड़ा कि जनरल मुनीर का पूरा ध्यान केवल पाकिस्तान की मजबूती और स्थिरता पर है, न कि किसी राजनीतिक पद या ताकत पर।
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इस अफवाह के पीछे किसका हाथ?
सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर चल रही इस मुहिम के पीछे कुछ ऐसे गुटों का हाथ माना जा रहा है जो सेना और सरकार के बीच टकराव का माहौल बनाना चाहते हैं। इन अफवाहों में कहा गया कि मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा देकर उन्हें राष्ट्रपति भवन तक लाने की तैयारी हो रही है। जबकि हकीकत में न तो पाकिस्तान में फील्ड मार्शल का एक्टिव रोल है और न ही इस पद पर कोई संवैधानिक शक्ति होती है।
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सेना की छवि बचाने की कोशिश
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती जा रही है और सेना की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इमरान खान की गिरफ्तारी, चुनाव में धांधली के आरोप और विपक्षी दलों की नाराजगी ने सेना की छवि को प्रभावित किया है। ऐसे में सेना चाहती है कि वो खुद को राजनीति से दूर और ‘संविधान के रक्षक’ की भूमिका में दिखाए।
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सेना की छवि और स्थिरता दोनों का संतुलन
सेना के इस बयान को सिर्फ अफवाहों को खारिज करना नहीं, बल्कि अपनी भूमिका को स्पष्ट करना भी माना जा रहा है। यह संदेश देने की कोशिश है कि सेना सत्ता में दखल नहीं देना चाहती और वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करती है। हालांकि, पाकिस्तान की राजनीति में सेना की बैकडोर भूमिका हमेशा से रही है, इसलिए ऐसी अफवाहों का उभरना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार सेना ने सार्वजनिक रूप से इसका खंडन कर एक सख्त संदेश देने की कोशिश की है।
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