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Pakistan Budget: विदेशी कर्ज इतना चढ़ गया कि अब उसे छिपाने लगी है शरीफ सरकार!

Tue, 14 Jun 2022 05:07 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 14 Jun 2022 05:07 PM IST
सार

विश्लेषकों ने कहा है कि वित्त वर्ष में 2022-23 पाकिस्तान सरकार जितना कर्ज लेने की योजना बनाई है, उससे देश पर विदेशी कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा। इस कर्ज पर ब्याज और उसकी किस्तें चुकाना तब एक बड़ी चुनौती साबित होगा। अगर कर्ज देनदारी के अनुपात में देश में विदेशी मुद्रा की आवक नहीं बढ़ी, तो पाकिस्तान के डिफॉल्ट करने की नौबत आ जाएगी...

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Pakistan: After looking at the budget document, economic experts pointed out that the Finance Minister has underestimated the foreign debt on the country
पाकिस्तान बजट: शाहबाज शरीफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान सरकार ने देश पर मौजूद विदेशी कर्ज को छिपाने की कोशिश की, लेकिन सच सबके सामने आ गया। वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल की ये सफाई यहां किसी के गले नहीं उतर रही है कि गलती से वे पूरे कर्ज का जिक्र बजट में करना भूल गए। इस्माइल ने पिछले हफ्ते अगले वित्त वर्ष का बजट पेश किया था। अब विदेशी कर्ज के पूरे आंकड़े सामने आने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष में इस बात पर जुबानी जंग छिड़ गई है कि देश को कर्ज में डुबाने के लिए असल में कौऩ जिम्मेदार है?

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बजट दस्तावेज पर गौर करने के बाद आर्थिक विशेषज्ञों ने इस तरफ इशारा किया कि वित्त मंत्री ने देश पर मौजूद विदेशी कर्ज को कम करके बताया है। उन्होंने कहा कि बजट दस्तावेज में दिखाया गया कर्ज असल विदेशी कर्ज से सात बिलियन डॉलर कम है। ये बात सामने आने के बाद मिफ्ताह इस्माइल ने स्वीकार किया कि वे ‘भूल वश’ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और चीन के कुछ कर्जों का जिक्र बजट में करना भूल गए। अब पूरी रकम सामने आने के बाद पता चला है कि पाकिस्तान कर्ज में इस हद तक डूबा हुआ है कि उसके कर्ज के जाल में फंस जाने का ठोस अंदेशा है।

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शरीफ से चीन से मांगा तुरंत कर्ज

बजट में जिन कर्जों का जिक्र नहीं किया गया, उनमें चार बिलियन डॉलर चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज (एसएएफई) से लिए गए हैं। आईएमएफ से लिए गए कम से कम तीन बिलियन डॉलर के कर्ज का उल्लेख भी बजट दस्तावेज में नहीं था। अब खबर आई है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चीन से तुरंत दो बिलियन का कर्ज देने की गुजारिश की है, ताकि पाकिस्तान अपने पुराने कर्ज की किस्तें चुका सके।

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सरकार की तरफ से कर्ज के बोझ की पूरी सूरत ना बताए जाने की बात सामने आने के बाद विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने सरकार पर कड़ा हमला बोला। इसके जवाब में वित्त मंत्री इस्माइल ने कहा कि देश को पर कर्ज लादने का दोष पूर्व पीटीआई सरकार पर ही है। उन्होंने कहा कि पीटीआई के शासनकाल में देश पर कर्ज की कुल मात्रा में 78 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

आ सकती है डिफॉल्ट की नौबत

पीटीआई ने इसके जवाब में कहा कि वित्त मंत्री देश को गुमराह कर रहे हैं। पीटीआई के प्रवक्ता फव्वाद चौधरी ने कहा कि पीटीआई सरकार ने कुल 52 बिलियन डॉलर के विदेशी कर्ज लिए थे, जिनमें से 38 बिलियन डॉलर उसके पहले की सरकारों द्वारा लिए गए कर्ज को चुकाने के लिए थे। चौधरी ने एक अलग ट्विट में बताया कि पाकिस्तान पर 2008-09 में 45 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज था, जो 2018-19 में 70.5 बिलियन और 2022 में 88 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।



विश्लेषकों ने कहा है कि वित्त वर्ष में 2022-23 पाकिस्तान सरकार जितना कर्ज लेने की योजना बनाई है, उससे देश पर विदेशी कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा। इस कर्ज पर ब्याज और उसकी किस्तें चुकाना तब एक बड़ी चुनौती साबित होगा। अगर कर्ज देनदारी के अनुपात में देश में विदेशी मुद्रा की आवक नहीं बढ़ी, तो पाकिस्तान के डिफॉल्ट करने की नौबत आ जाएगी। कुल मिला कर देश कर्ज के जाल में फंसता नजर आ रहा है।

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