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Security: 'आतंकियों तक संदेश पहुंचाने का ISI ने निकाला नया तरीका, नशेड़ी लोगों और महिलाओं का कर रहा इस्तेमाल

Sun, 08 Dec 2024 04:45 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 08 Dec 2024 04:45 PM IST
सार

Security: अधिकारियों ने कहा कि आईएसआई घुसपैठ की रणनीति में महिलाओं और नाबालिगों का इस्तेमाल करती हैं। उन्हें भी संदेशवाहक के रूप में भेजा जाता है। जुलाई में पाकिस्तान के एक नाबालिग को पंजाब में पकड़ा गया था। जब सुरक्षा कर्मियों ने उसकी तलाशी ली तो उन्हें एक गीला कागज मिला, जिसमें अरबी में कुछ लिखा था।

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Pak's ISI pushes drug addicts as terror couriers in Indian jails, say officials
भारत पाकिस्तान सीमा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेंज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने नशे की लत से प्रभावित और मासनिक रूप से अस्वस्थ लोगों को भारत भेजने का एक नया तरीका अपना है। इन लोगों को भारत में घुसाकर उनका उपयोग देश की जेलों में बंद आतंकवादियों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने के लिए किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि जुलाई के महीने से अब तक इस तरह के दस से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें पाकिस्तान के नागरिक पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से आए हैं। इन लोगों को जम्मू, पंजाब और राजस्थान की जेलों में भेजा गया है।
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'सुरक्षा बलों से बचने के लिए दिया जा रहा प्रशिक्षण'
अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि ये लोग आईएसआई के संदेशवाहक हो सकते हैं, आतंकियों तक महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने का काम करते हैं। इन लोगों से पूछताछ करने पर यह सामने आया है कि उन्हें सुरक्षा बलों से बचने के लिए प्रतिरोध की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है। 
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'घुसपैठ के पीछे हो सकती है कोई बड़ी साजिश'
अधिकारियों ने कहा, इन लोगों का व्यवहार संदिग्ध है और इनके जवाबों से लगता है कि इनकी घुसपैठ के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। साथ ही, इनका मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग ऐसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य छोड़ता है, जो यह बता सकते हैं कि सीमा पार (पाकिस्तान) में काम कर रहे सरकारी या गैर-सरकारी तत्व (जैसे आतंकवादी संगठन) क्या योजना बना रहे हैं।
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'रणनीति में महिलाओं और नाबालिगों का इस्तेमाल'
उन्होंने बताया कि आईएसआई ने यह नई रणनीति अपनाई है। आईसएआई घुसपैठ की रणनीति में महिलाओं और नाबालिगों का इस्तेमाल करती हैं। उन्हें भी संदेशवाहक के रूप में भेजा जाता है। जुलाई में पाकिस्तान के एक नाबालिग को पंजाब में पकड़ा गया था। जब सुरक्षा कर्मियों ने उसकी तलाशी ली तो उन्हें एक गीला कागज मिला, जिसमें अरबी में कुछ लिखा था। हालांकि वह पढ़ने योग्य नहीं था। 

'बीएसएफ की तैनाती की जानकारी एकत्र कर रहे घुसपैठिए'
उन्होंने बताया कि आईएसआई की घुसपैठ की रणनीतियां मादक पदार्थों की तस्करी से भी जुड़ी हुई हैं। राजस्थान के बिजनौर गांव से एक पाकिस्तान नागरिक को गिरफ्तार किया गया था। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का नाटक कर रहा था। जब उससे कड़ा से पूछताछ की गई तो पता चला कि उसे पाकिस्तान के दो ड्रग माफिया सरफराज जोहिया और नवाज ने भारत में नशे की तस्करी करने और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की तैनाती पर जानकारी इकट्ठा करने के लिए के लिए भर्ती किया था। 

'संदेशवाहक के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे कुछ लोग'
एक अन्य घटना में, पाकिस्तान के लाहौर से एक युवक मोहम्मद असद अपनी मोटरसाइकिल से भारत की सीमा पर पहुंचा और बीएसएफ ने उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि उसे अपनी प्रेमिका को लेकर पारिवारिक विवाद था। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि असद एक संदेशवाहक के रूप में काम कर रहा था और उन्होंने पूछताछ के लिए उसकी अतिरिक्त हिरासत की मांग की है। अक्तूबर में शाहिद इमरान (31 वर्षीय) नाम का एक व्यक्ति जम्मू सेक्टर के जरिए भारत में घुसा और उसने दावा किया कि वह शादी करने के लिए काली मंदिर जाना चाहता था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे लोग आमतौर पर विदेशियों के लिए कानून और पासपोर्ट अधिनियम के तहत गिरफ्तार किए जाते हैं, जिसके लिए सजा दो साल से लेकर आठ साल तक हो सकती है और फिर इन्हें इनके देश निर्वासित कर दिया जाता है। 


'आतंकवादियों को वित्तीय मदद पहुंचाते थे सवारी ऑपरेटर'
अधिकारियों का कहना है कि 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में आईएसआई ने भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन का उपयोग गोपनीय संदेशवाहक अभियानों के लिए किया था। आईएसआई मादक पदार्थों की तस्करी और जम्मू-कश्मीर व पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय मदद प्रदान करने का काम करती थी। इसके लिए वह जिन व्यक्तियों का इस्तेमाल करती थी, उन्हें सवारी ऑपरेटर कहा जाता था। 2019 में ट्रेन सेवा बंद होने के बाद यह सेवा खत्म हो गई थी। 

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