पाकिस्तान: भीड़ के ‘समुद्र’ के साथ गुजरांवाला पहुंचे 11 दलों के नेता, पीएम इमरान खान के खिलाफ भरी हुंकार
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पाकिस्तान का विपक्ष जनमत की पवित्रता बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। ये बात जमीयत उलमा-आई-इस्लाम के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान ने 11 विपक्षी दलों की तरफ से गुजरांवाला में सरकार विरोधी अभियान की मजबूती दिखाने के लिए बुलाई गई महारैली के लिए रवानगी से पहले कही। उधर, पीएमएल-एन (पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज ने भी लाहौर से महारैली के लिए रवानगी से पहले कहा कि वे यह मिशन नवाज (पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री) की सिपाही के तौर पर शुरू कर रही हैं।
विपक्षी दलों के नेता जनता की भारी भीड़ के साथ गुजरांवाला पहुंच रहे हैं। मरियम के काफिले को समर्थकों की भारी भीड़ के कारण लाहौर से बाहर निकलने में ही छह घंटे लग गए। उन्होंने ट्विटर पर अपने समर्थकों की भीड़ के वीडियो और फोटो अपलोड करते हुए कहा कि उनके आगे, पीछे, दाएं और बाएं हर तरफ लोगों का समुद्र है। मरियम ने लाहौर के जाति उमरा स्थित अपने आवास से निकलते समय ट्वीट में लिखा, मैंने खुद को पाकिस्तान और उसके लोगों के लिए अपने संघर्ष, अपने मिशन के लिए समर्पित कर दिया है। अल्लाह हमारा साथ दे और हम फतह के साथ लौटें।
पाकिस्तानी समाचार पत्र डान की रिपोर्ट के मुताबिक, पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो भारी भीड़ के साथ गुजरांवाला शहर में पहुंच चुके हैं, जबकि फजलुर रहमान का काफिला भी कुछ ही घंटे की दूरी पर पहुंच चुका है। रहमान ने गुजरांवाला के लिए रवाना होने से पहले लाहौर में मीडिया से कहा, विपक्ष प्रतिबद्ध है और इस बात के कोई संकेत नहीं है कि कोई भी दल किसी समझौते के लिए इंतजार कर रहा है। सभी दल जनमत की पवित्रता की बहाली के लिए एकजुट और प्रतिबद्ध हैं। रहमान ने कहा, हमारी किसी के साथ निजी दुश्मनी नहीं है। लेकिन यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पाकिस्तान पश्चिमी संस्थाओं का नहीं सिर्फ पाकिस्तानियों का है।
रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरांवाला के जिन्ना स्टेडियम में विपक्षी दलों के हजारों समर्थक पहले से ही डेरा जमा चुके हैं। हर तरफ विपक्षी दलों के नारे लिखे बैनर और झंडे ही लहराते दिख रहे हैं। स्टेडियम की क्षमता करीब 35 हजार लोगों के बैठने की है, जबकि मैदान में भी 10 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्टेडियम में विभिन्न हिस्सों में 25 हजार लोगों को और समायोजित किया जा सकता है। पाकिस्तानी मीडिया ने इससे ज्यादा लोगों के विपक्षी दलों के नेताओं के साथ स्टेडियम पहुंचने का आकलन लगाया है।
बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ हाल ही में गठित 11 दलों के संयुक्त पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) का पहला प्रदर्शन गुजरांवाला में आयोजित हो रहा है। गुजरांवाला महारैली में पीएलएल-एन , पीपीपी (पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी) और जेयूआई-एफ (जमीयत उलमा-ए-इस्लाम-फजल) समेत 11 प्रमुख विपक्षी दल हिस्सेदारी कर रहे हैं। रैली का आयोजन सेना के अत्याचारों पर रोक लगाने और इमरान खान के पद से इस्तीफा देने से जुड़ी है।
Gujranwala (Pak): Pakistan's opposition parties including Pakistan Muslim League (Nawaz), Pakistan Peoples Party, and Jamiat Ulema-e-Islam-Fazl hold rally against Prime Minister Imran Khan-led government. pic.twitter.com/pf05pGYbEf
— ANI (@ANI) October 16, 2020
इस रैली से पहले लाहौर और पंजाब प्रांत के अन्य इलाकों में विपक्षी पार्टियों के 450 से अधिक कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किया गया था। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि देश की सेना ने 2018 के चुनावों में हेरफेर और धांधली की जिसके चलते इमरान खान की तहरीक ए इंसाफ पार्टी सत्ता में आई।
दूसरी रैली 18 अक्तूबर को कराची में, क्वेटा में 25 अक्तूबर को, पेशावर में 22 नवंबर को, मुल्तान में 30 नवंबर को और फिर 13 दिसंबर को लाहौर में होगी। इसके बाद जनवरी 2021 में इस्लामाबाद की ओर एक निर्णायक ‘लॉन्ग मार्च’ किए जाने की योजना है।
बता दें कि पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं ने यह घोषणा की है कि वे प्रधानमंत्री इमरान खान के इस्तीफे की मांग करने के लिये सभी राजनीतिक और लोकतांत्रिक विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। इनमें अविश्वास प्रस्ताव लाना और संसद से बड़े पैमाने पर इस्तीफा देना भी शामिल है।