क्या है OPEC+ का नया प्लान?: होर्मुज की नाकेबंदी के बाद सस्ता होगा तेल, इस फैसले से दुनिया को मिलेगी राहत
पश्चिम एशिया में भारी तनाव और होर्मुज की नाकेबंदी के बीच ओपेक+ देशों ने एक बड़ा फैसला लिया है। इससे दुनिया को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यूएई ओपेक प्लस से बाहर हो गया है, जो संगठन के लिए तगड़ा झटका है। आइए, विस्तार से जानते हैं ओपेक+ देशों ने क्या फैसला लिया है...
विस्तार
पश्चिम एशिया में इस वक्त भारी तनाव का माहौल है। होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है। इस बड़े संकट के बीच, तेल निर्यातक देशों के समूह ओपेक+ ने एक बड़ा फैसला लिया है। ओपेक प्लस ने सैद्धांतिक रूप से जून महीने में अपना कच्चे तेल का उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने पर अपनी पूरी सहमति दे दी है। यह कदम दुनिया भर में तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए उठाया गया है।
ओपेक प्लस की उत्पादन पर क्या योजना?
- कई रिपोर्टों के अनुसार, ओपेक प्लस के सात देशों ने अगले महीने तेल उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाने पर सहमति जताई है।
- इसके तहत लगभग 1,88,000 बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
- हालांकि, जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से नहीं खुल जाता, तब तक उत्पादन में यह बढ़ोतरी सिर्फ नाम मात्र ही मानी जाएगी।
- भौगोलिक और राजनीतिक संकट के बीच, यह लगातार तीसरा महीना है जब इस तरह तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
यूएई के बाहर होना कितना बड़ा झटका?
पिछले हफ्ते, यूएई ने ओपेक और ओपेक प्लस समूह से पूरी तरह बाहर होने की घोषणा कर दी थी। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस तेल निर्यातक समूह के लिए यूएई का यह फैसला एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। यूएई ने कहा है कि यह कड़ा फैसला उसकी लंबी अवधि की रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि को ध्यान में रखकर लिया गया है। यूएई के बाहर होने से यह समूह ऐसे समय में कमजोर होगा जब होर्मुज की नाकेबंदी के कारण खाड़ी देशों का निर्यात पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। आपको बता दें कि ओपेक के कुल तेल निर्यात में यूएई की बहुत बड़ी हिस्सेदारी थी, जो लगभग 15 प्रतिशत थी।
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नाकेबंदी के बीच कुवैत-ईरान के तेल निर्यात कैसा?
यूएई के जाने के बाद अब ओपेक प्लस में ईरान सहित कुल 21 सदस्य देश बचे हैं। होर्मुज की नाकेबंदी के कारण खुद ईरान के अपने तेल निर्यात में भी बहुत भारी गिरावट आई है। वहीं, कुवैत की स्थिति सबसे खराब है क्योंकि अप्रैल में कुवैत ने शून्य (जीरो) बैरल कच्चा तेल निर्यात किया है। साल 1991 में इराक के कब्जे के बाद से कुवैत में ऐसी गंभीर और खराब स्थिति पहली बार देखी गई है। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने 'फोर्स मेज्योर' (मजबूरी की स्थिति) की घोषणा कर दी है, जिससे हर दिन करीब 20 लाख बैरल तेल का निर्यात रुक गया है।
उत्पादन पर आधिकारिक आंकड़े?
हालांकि ओपेक प्लस में 21 सदस्य हैं, लेकिन हर महीने उत्पादन का फैसला केवल सात देश (और पहले यूएई) ही लेते रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के महीने में सभी ओपेक प्लस सदस्यों का औसत कच्चा तेल उत्पादन 3.50 करोड़ (35.06 मिलियन) बैरल प्रतिदिन रहा। यह आंकड़ा फरवरी के महीने के मुकाबले काफी कम रहा है। फरवरी की तुलना में मार्च में तेल उत्पादन में 77 लाख (7.70 मिलियन) बैरल प्रतिदिन की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
एक तरफ तेल का संकट गहरा रहा है, तो दूसरी तरफ कीमतों में अचानक गिरावट भी देखने को मिली है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने पाकिस्तान को मध्यस्थ (बिचौलिया) बनाकर अमेरिका के साथ नई बातचीत का प्रस्ताव दिया है। इस खबर के बाजार में आते ही कच्चे तेल की कीमतें धड़ाम से गिर गईं। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई, जो बाद में थोड़ी सुधरकर 101.7 डॉलर हो गई। इसी तरह ब्रेंट क्रूड भी 3 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 106.98 डॉलर पर आ गया था, जो बाद में फिर से बढ़कर 108.4 डॉलर तक पहुंच गया।
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