फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Nuclear Threat: Indira Gandhi Opposed Strike on Pakistan’s Kahuta Nuclear Site, Says Ex-CIA Officer

Nuclear Threat: क्या इंदिरा गांधी PAK के परमाणु ठिकाने पर हमले से नहीं थीं सहमत? पूर्व CIA अफसर ने कही ये बात

Sat, 08 Nov 2025 09:42 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 08 Nov 2025 09:42 AM IST
सार

पूर्व सीआईए अधिकारी रिचर्ड बार्लो ने खुलासा किया कि 1980 के दशक में भारत और इस्राइल ने पाकिस्तान के कहूटा परमाणु संयंत्र पर हमले की योजना बनाई थी, लेकिन इंदिरा गांधी ने इसे मंजूरी नहीं दी।

विज्ञापन
Nuclear Threat: Indira Gandhi Opposed Strike on Pakistan’s Kahuta Nuclear Site, Says Ex-CIA Officer
पाक परमाणु ठिकाने पर हमले की योजना को इंदिरा गांधी ने नहीं दी मंजूरी - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी रिचर्ड बार्लो ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि 1980 के दशक में भारत और इस्राइल ने पाकिस्तान के कहूटा स्थित परमाणु संयंत्र पर हवाई हमले की योजना बनाई थी। हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी। बार्लो ने इसे शर्म की बात बताते हुए कहा कि अगर यह हमला हुआ होता तो कई समस्याएं सुलझ सकती थीं।

विज्ञापन


पूर्व CIA अधिकारी का बयान
रिचर्ड बार्लो ने न्यूज एजेंसी 'एएनआई' से बातचीत में कहा यह अफसोसजनक है कि इंदिरा गांधी ने हमले की मंजूरी नहीं दी, इससे कई समस्याएं हल हो सकती थीं। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन किसी भी ऐसे हमले का विरोध करते क्योंकि यह अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ चल रहे अमेरिकी मिशन को बाधित कर सकता था।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- पूर्व CIA अधिकारी का खुलासा: 'भारत विरोधी था PAK का परमाणु कार्यक्रम, एक्यू खान ने इसे इस्लामी बम में बदला'
विज्ञापन
विज्ञापन


अमेरिका और पाकिस्तान की भूमिका
बार्लो ने बताया कि पाकिस्तान ने अमेरिका की इस निर्भरता का लाभ उठाया। पाकिस्तान के परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व प्रमुख मुनीर अहमद खान ने अमेरिकी सांसदों को चेतावनी दी थी कि अगर वाशिंगटन सहायता रोकेगा तो मोजाहिदीन को दी जा रही मदद भी बंद कर दी जाएगी। बार्लो के मुताबिक मुनीर खान की यह रणनीति ब्लैकमेल जैसी थी, उन्होंने कहा कि अगर मदद रोकी, तो हम अफगान युद्ध में सहयोग बंद कर देंगे।

भारत-इस्राइल की संयुक्त योजना
डिक्लासिफाइड रिपोर्ट्स और खुफिया दस्तावेजों के अनुसार, भारत और इस्राइल ने पाकिस्तान के कहूटा संयंत्र को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। इस संयंत्र में पाकिस्तान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम चल रहा था, जिसे रोकने के लिए दोनों देशों ने प्रि-एम्प्टिव स्ट्राइक (पूर्व-निवारक हमला) की रणनीति बनाई थी।

ये भी पढ़ें:- Melissa: कैरेबियाई तूफान मेलिसा के बाद भारत की बड़ी मदद, क्यूबा और जमैका ने कहा- हम नहीं भूलेंगे ये समर्थन

निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर निशाना
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक बयान में कहा है कि पाकिस्तान ने 1980 में परमाणु बम बनाना शुरू किया था और जब यह जानकारी सामने आई तो इस्राइल भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान पर हमला करना चाहता था। दुबे ने दावा किया कि 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना को कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा अगर उस समय पाकिस्तान पर कार्रवाई की जाती, तो आज वह देश टुकड़ों में बंट चुका होता। लेकिन अब वही हमारे लिए सिरदर्द बन गया है।


कहूटा संयंत्र बना पाकिस्तान की परमाणु ताकत की नींव
कहूटा प्लांट पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम का मुख्य केंद्र माना जाता है, जिसकी निगरानी डॉ. ए.क्यू. खान करते थे। यही संयंत्र आगे चलकर पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम का केंद्र बना। इसी संयंत्र के माध्यम से पाकिस्तान ने 1998 में अपने पहले परमाणु परीक्षण किए।

अमेरिका ने 20 से 24 वर्षों तक कुछ नहीं किया: बार्लो
बार्लो ने सीआईए में अपने कार्यकाल के दौरान परमाणु हथियारों के प्रसार की गतिविधियों की जांच की थी। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पाकिस्तान के गुप्त परमाणु सौदों पर वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया में लापरवाही देखने को मिली। बार्लो ने कहा, अमेरिका ने 1987 और 1988 में इसके खिलाफ कुछ भी करने से इनकार ही नहीं किया, बल्कि अगले 20 से 24 वर्षों तक कुछ भी नहीं किया। पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के संबंध में बार्लो ने दावा किया कि गैस सेंट्रीफ्यूज विकास में ईरान की प्रगति सीधे अब्दुल कादिर खान के नेटवर्क द्वारा प्रदान की गई तकनीक से जुड़ी हुई थी। उन्होंने कहा, ईरान कभी भी बिना पाकिस्तान की मदद के गैस सेंट्रीफ्यूज नहीं बना सकता था। यह बहुत कठिन कार्य है।

बार्लो ने आगे कहा कि हालांकि ईरान ने बाद में अपने दम पर काफी प्रगति की है, लेकिन उनके कार्यक्रम की नींव पाकिस्तान की मदद पर बनी थी। उन्होंने कहा, अब लगता है कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम काफी अपडेट है, लेकिन यह पाकिस्तान की मदद के बिना शुरू नहीं हो सकता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed