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No Kings Protests: अमेरिका के शहरों में सड़कों पर उतरे हजारों लोग, ट्रंप पर लगाया सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
Sun, 19 Oct 2025 08:50 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क,अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क,अमर उजाला, वॉशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 19 Oct 2025 08:50 AM IST
सार
No Kings Protests: अमेरिका के कई शहरों में हजारों लोगों ने ट्रंप प्रशासन के 'सत्तावादी रवैये' और नीतियों के खिलाफ 'नो किंग्स' नाम के प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रंप लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं। जबकि रिपब्लिकन पार्टी इसे 'हेट अमेरिका' आंदोलन बताया। ये प्रदर्शन पिछले जून के बाद से तेज हुए हैं और कई संगठनों ने मिलकर इनका आयोजन किया है।
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अमेरिका में 'नो किंग्स' आंदोलन
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अमेरिका के वॉशिंगटन और कई अन्य शहरों में हजारों लोगों ने एक साथ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियों और उनके 'सत्तावादी रवैये' के खिलाफ किए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रंप लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहे हैं। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी ने इन प्रदर्शनों को 'हेट अमेरिका' आंदोलन करार दिया है, यानी अमेरिका से नफरत करने वालों का आंदोलन।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के आयोजकों ने कहा कि दिन खत्म होने तक लाखों लोग अमेरिका के बड़े शहरों, छोटे कस्बों में इन प्रदर्शनों में शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि विदेश के कुछ शहरों में भी इन प्रदर्शनों के समर्थन में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं।
ये भी पढ़ें: अमेरिका की चेतावनी- फलस्तीनियों पर हमले की योजना बना रहा हमास, यह संघर्ष विराम समझौते का होगा सीधा उल्लंघन
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जून के महीने में 'नो किंग्स' नाम से पहला बड़ा प्रदर्शन हुआ था। अब यह आंदोलन फिर से तेज हो गया है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में कुछ विवादित फैसले लिए हैं। इनमें राजनीतिक विरोधियों पर आपराधिक मामले चलाना, प्रवासियों पर छापेमारी और कई अमेरिकी शहरों में संघीय बलों की तैनाती शामिल है।
वॉशिंगटन में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर रैलियां निकालीं और अमेरिकी संसद भवन की ओर बढ़े। रॉयटर्स के मुताबिक, प्रदर्शन का माहौल एक त्योहार जैसा दिखा। लोग हाथों में पोस्टर, अमेरिकी झंडे और गुब्बारे लिए हुए थे। कुछ लोग तो खास तरह की पोशाकें पहनकर भी आए थे।
केवल वॉशिंगटन ही नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क, बोस्टन, शिकागो और अटलांटा जैसे शहरों में भी इन रैलियों में काफी संख्या में लोग जुटे। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वह लोकतंत्र और न्याय के लिए यहां खड़े हैं। उन्होंने कहा कि वह सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
ये भी पढ़ें: अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष विराम पर सहमत, कतर सरकार ने जारी किया बयान
मैं कोई राजा नहीं हूं: डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद कोई बयान नहीं दिया। लेकिन इससे पहले उन्होंने इन रैलियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था- वे मुझे राजा कह रहे हैं, लेकिन मैं कोई राजा नहीं हूं। फॉक्स बिजनेस के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह बयान दिया था। इन रैलियों का आयोजन 'इंडिविजिबल' नाम के संगठन ने किया है। इसके सह-संस्थापक लिया ग्रीनबर्ग के अनुसार, करीब 300 छोटे-बड़े सामाजिक संगठनों ने मिलकर इन प्रदर्शनों को आयोजित किया है।
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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के आयोजकों ने कहा कि दिन खत्म होने तक लाखों लोग अमेरिका के बड़े शहरों, छोटे कस्बों में इन प्रदर्शनों में शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि विदेश के कुछ शहरों में भी इन प्रदर्शनों के समर्थन में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं।
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जून के महीने में 'नो किंग्स' नाम से पहला बड़ा प्रदर्शन हुआ था। अब यह आंदोलन फिर से तेज हो गया है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में कुछ विवादित फैसले लिए हैं। इनमें राजनीतिक विरोधियों पर आपराधिक मामले चलाना, प्रवासियों पर छापेमारी और कई अमेरिकी शहरों में संघीय बलों की तैनाती शामिल है।
वॉशिंगटन में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर रैलियां निकालीं और अमेरिकी संसद भवन की ओर बढ़े। रॉयटर्स के मुताबिक, प्रदर्शन का माहौल एक त्योहार जैसा दिखा। लोग हाथों में पोस्टर, अमेरिकी झंडे और गुब्बारे लिए हुए थे। कुछ लोग तो खास तरह की पोशाकें पहनकर भी आए थे।
केवल वॉशिंगटन ही नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क, बोस्टन, शिकागो और अटलांटा जैसे शहरों में भी इन रैलियों में काफी संख्या में लोग जुटे। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वह लोकतंत्र और न्याय के लिए यहां खड़े हैं। उन्होंने कहा कि वह सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
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मैं कोई राजा नहीं हूं: डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद कोई बयान नहीं दिया। लेकिन इससे पहले उन्होंने इन रैलियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था- वे मुझे राजा कह रहे हैं, लेकिन मैं कोई राजा नहीं हूं। फॉक्स बिजनेस के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह बयान दिया था। इन रैलियों का आयोजन 'इंडिविजिबल' नाम के संगठन ने किया है। इसके सह-संस्थापक लिया ग्रीनबर्ग के अनुसार, करीब 300 छोटे-बड़े सामाजिक संगठनों ने मिलकर इन प्रदर्शनों को आयोजित किया है।
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