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नौ दिन तक सुरंग में कैद: जुबां पर ‘हरे कृष्ण’, जन्माष्टमी के दिन निकला जिंदा, संजय के साथ कैसे हुआ ये चमत्कार?
Fri, 04 Sep 2026 03:40 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, काठमांडो।
पीटीआई, काठमांडो।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 04 Sep 2026 03:40 PM IST
सार
नेपाल की त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में नौ दिन तक फंसे संजय साह को शुक्रवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वह इन नौ दिनों में लगातार ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप करते रहे। संयोग से उनका बचाव कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुआ। संजय ने सुरंग के भीतर और लोगों के फंसे होने की आशंका जताई है, जिसके बाद तलाश अभियान जारी है।
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संजय के साथ चमत्कार
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नेपाल की एक सुरंग में नौ दिन तक जिंदगी और मौत के बीच फंसे संजय साह शुक्रवार को सुरक्षित बाहर निकले। इन नौ दिनों में उनके पास न रोशनी थी, न बाहर निकलने का रास्ता। ऐसे वक्त में संजय ने उम्मीद नहीं छोड़ी। वह लगातार ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप करते रहे।
संजय को जिस दिन सुरंग से बाहर निकाला गया, वह दिन भी खास था। शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी थी। यानी जिस भगवान कृष्ण का नाम लेते हुए संजय नौ दिन तक सुरंग में जिंदगी की उम्मीद लगाए बैठे रहे, उसी जन्माष्टमी के दिन उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। संजय ने बाहर आने के बाद सुरक्षा कर्मियों को बताया, 'मैं पिछले नौ दिनों से हरे कृष्ण महामंत्र का जाप कर रहा था।'
कौन हैं सुरंग में फंसे संजय?
संजय साह की उम्र 30 साल है। वह नेपाल के मधेश प्रांत के सप्तरी जिले के रहने वाले हैं। वह नेपाल विद्युत प्राधिकरण में कर्मचारी हैं और परियोजना में फोरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। हादसे के समय संजय नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे। वहां उनकी जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी।
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खुद को खतरे में डालकर सहकर्मियों को क्यों बचाया?
संजय ने हादसे के शुरुआती पल भी बताए। उन्होंने कहा कि वह नियंत्रण कक्ष में काम कर रहे थे। हादसा होते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों से भागने को कहा। संजय के मुताबिक उन्होंने लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा। दूसरे लोग किसी तरह बाहर निकल गए। लेकिन तब तक संजय के लिए खुद बाहर निकलना मुश्किल हो चुका था।
संजय ने बताया कि वह दूसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी महसूस कर रहे थे। इसी वजह से वह बाकी लोगों के साथ समय रहते बाहर नहीं निकल पाए। इसके बाद हालात बदल गए और वह खुद सुरंग के भीतर फंस गए। अगले नौ दिन उनके लिए इंतजार और अनिश्चितता से भरे रहे।
क्या सुरंग में और लोग भी फंसे हैं?
सुरंग से बाहर आने के बाद संजय ने बचाव दल को एक अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुरंग के आसपास तीन या चार लोगों से उनका संपर्क हुआ था। यह संपर्क बातचीत या आवाज के जरिए हुआ था। संजय ने कहा, 'हम आसपास केवल तीन या चार लोगों से बात करके या आवाज के जरिए संपर्क कर पा रहे थे।' लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। संजय को आशंका है कि सुरंग के और अंदर भी लोग फंसे हो सकते हैं।
बाढ़ का पानी लोगों को अंदर तक ले गया?
संजय ने बताया कि सुरंग काफी लंबी है। उनका कहना है कि हादसे के दौरान बाढ़ के तेज पानी कुछ लोगों को सुरंग के काफी अंदर तक ले गया हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि सभी लोग समय रहते बाहर न निकल पाए हों। इसी वजह से सुरंग के भीतर आगे तक तलाश जारी है।
यह भी पढ़ें: देश में जन्माष्टमी की धूम: मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, तस्वीरों में देखिए दही हांडी उत्सव की तैयारी
संजय की हालत अब कैसी है?
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, संजय की हालत स्थिर है। उन्हें फिलहाल स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी नहीं है। सुरंग से बाहर निकालने के बाद उन्हें त्रिशूली के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। नौ दिन तक सुरंग में फंसे रहने के बाद उनका सुरक्षित बाहर आना बचाव अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
संजय के साथ 45 वर्षीय कबीर महर्जन को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि उनकी हालत को देखते हुए उन्हें आगे इलाज की जरूरत थी। कबीर को हवाई मार्ग से काठमांडो स्थित नेपाल आर्मी अस्पताल, छाउनी ले जाया गया। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण वहां भर्ती कराया गया है।
नेपाल सेना के नेतृत्व में सुरक्षा बल लगातार बचाव अभियान चला रहे हैं। सुरंग के अंदर लोगों की तलाश के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। संजय की जानकारी ने बचाव दल के सामने सुरंग के उन हिस्सों पर भी ध्यान बढ़ा दिया है, जहां लोग फंसे हो सकते हैं। फिलहाल अभियान का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरंग के भीतर और कितने लोग मौजूद हैं।
नौ दिन की कहानी में सबसे बड़ा संयोग क्या?
संजय की कहानी सिर्फ एक बचाव अभियान की कहानी नहीं है। यह नौ दिनों तक उम्मीद बनाए रखने की कहानी भी है। वह अंधेरी सुरंग में फंसे रहे और ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप करते रहे। फिर नौवें दिन उन्हें बाहर निकाला गया। जिस दिन उन्होंने फिर से खुली हवा देखी, उसी दिन कृष्ण जन्माष्टमी थी। यही संयोग इस पूरे घटनाक्रम को और भी खास बना देता है।
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संजय को जिस दिन सुरंग से बाहर निकाला गया, वह दिन भी खास था। शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी थी। यानी जिस भगवान कृष्ण का नाम लेते हुए संजय नौ दिन तक सुरंग में जिंदगी की उम्मीद लगाए बैठे रहे, उसी जन्माष्टमी के दिन उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। संजय ने बाहर आने के बाद सुरक्षा कर्मियों को बताया, 'मैं पिछले नौ दिनों से हरे कृष्ण महामंत्र का जाप कर रहा था।'
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कौन हैं सुरंग में फंसे संजय?
संजय साह की उम्र 30 साल है। वह नेपाल के मधेश प्रांत के सप्तरी जिले के रहने वाले हैं। वह नेपाल विद्युत प्राधिकरण में कर्मचारी हैं और परियोजना में फोरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। हादसे के समय संजय नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे। वहां उनकी जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी।
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खुद को खतरे में डालकर सहकर्मियों को क्यों बचाया?
संजय ने हादसे के शुरुआती पल भी बताए। उन्होंने कहा कि वह नियंत्रण कक्ष में काम कर रहे थे। हादसा होते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों से भागने को कहा। संजय के मुताबिक उन्होंने लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा। दूसरे लोग किसी तरह बाहर निकल गए। लेकिन तब तक संजय के लिए खुद बाहर निकलना मुश्किल हो चुका था।
संजय ने बताया कि वह दूसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी महसूस कर रहे थे। इसी वजह से वह बाकी लोगों के साथ समय रहते बाहर नहीं निकल पाए। इसके बाद हालात बदल गए और वह खुद सुरंग के भीतर फंस गए। अगले नौ दिन उनके लिए इंतजार और अनिश्चितता से भरे रहे।
क्या सुरंग में और लोग भी फंसे हैं?
सुरंग से बाहर आने के बाद संजय ने बचाव दल को एक अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुरंग के आसपास तीन या चार लोगों से उनका संपर्क हुआ था। यह संपर्क बातचीत या आवाज के जरिए हुआ था। संजय ने कहा, 'हम आसपास केवल तीन या चार लोगों से बात करके या आवाज के जरिए संपर्क कर पा रहे थे।' लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। संजय को आशंका है कि सुरंग के और अंदर भी लोग फंसे हो सकते हैं।
बाढ़ का पानी लोगों को अंदर तक ले गया?
संजय ने बताया कि सुरंग काफी लंबी है। उनका कहना है कि हादसे के दौरान बाढ़ के तेज पानी कुछ लोगों को सुरंग के काफी अंदर तक ले गया हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि सभी लोग समय रहते बाहर न निकल पाए हों। इसी वजह से सुरंग के भीतर आगे तक तलाश जारी है।
यह भी पढ़ें: देश में जन्माष्टमी की धूम: मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, तस्वीरों में देखिए दही हांडी उत्सव की तैयारी
संजय की हालत अब कैसी है?
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, संजय की हालत स्थिर है। उन्हें फिलहाल स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी नहीं है। सुरंग से बाहर निकालने के बाद उन्हें त्रिशूली के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। नौ दिन तक सुरंग में फंसे रहने के बाद उनका सुरक्षित बाहर आना बचाव अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
संजय के साथ 45 वर्षीय कबीर महर्जन को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि उनकी हालत को देखते हुए उन्हें आगे इलाज की जरूरत थी। कबीर को हवाई मार्ग से काठमांडो स्थित नेपाल आर्मी अस्पताल, छाउनी ले जाया गया। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण वहां भर्ती कराया गया है।
नेपाल सेना के नेतृत्व में सुरक्षा बल लगातार बचाव अभियान चला रहे हैं। सुरंग के अंदर लोगों की तलाश के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। संजय की जानकारी ने बचाव दल के सामने सुरंग के उन हिस्सों पर भी ध्यान बढ़ा दिया है, जहां लोग फंसे हो सकते हैं। फिलहाल अभियान का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरंग के भीतर और कितने लोग मौजूद हैं।
नौ दिन की कहानी में सबसे बड़ा संयोग क्या?
संजय की कहानी सिर्फ एक बचाव अभियान की कहानी नहीं है। यह नौ दिनों तक उम्मीद बनाए रखने की कहानी भी है। वह अंधेरी सुरंग में फंसे रहे और ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप करते रहे। फिर नौवें दिन उन्हें बाहर निकाला गया। जिस दिन उन्होंने फिर से खुली हवा देखी, उसी दिन कृष्ण जन्माष्टमी थी। यही संयोग इस पूरे घटनाक्रम को और भी खास बना देता है।