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MEA: एस. जयशंकर और फ्रांसीसी विदेश मंत्री की मुलाकात; रक्षा, अंतरिक्ष और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर
Fri, 13 Jun 2025 11:00 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मर्सिले
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मर्सिले
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 13 Jun 2025 11:00 PM IST
सार
India-France Relations: जयशंकर ने बताया कि बातचीत में यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व की स्थिति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। उन्होंने जोर दिया, 'यह युद्धों का युग नहीं है। समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही निकल सकता है। मैदान में कोई समाधान नहीं मिलेगा।'
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फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर
- फोटो : X @DrSJaishankar
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विस्तार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो के साथ मर्सिले शहर में एक अहम बैठक की। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष, नागरिक परमाणु सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की और आपसी सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया। इसके बाद प्रेस वार्ता में विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए सीमा पार आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए फ्रांस का गहरा आभार जताया। उन्होंने कहा, 'हम फ्रांस के उस स्पष्ट समर्थन के लिए धन्यवाद करते हैं जिसमें उन्होंने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को पूरी तरह से सही ठहराया है।'
रणनीतिक साझेदारी और साझा विश्वास
जयशंकर ने कहा कि भारत और फ्रांस के रिश्तों में एक गहरे विश्वास और आपसी समझ की भावना है। उन्होंने कहा, हमारी रणनीतिक साझेदारी साझा मूल्यों पर आधारित है - लोकतंत्र, संप्रभुता, स्वतंत्र विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने रक्षा, अंतरिक्ष, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), तकनीक, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
यह भी पढ़ें - Israel: नेतन्याहू ने पीएम मोदी सहित वैश्विक नेताओं से की बात, इस्राइल-ईरान तनाव पर भारत ने जताई चिंता
इंडो-पैसिफिक और समुद्री सुरक्षा
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा, 'भारत और फ्रांस एक खुले और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक की साझा सोच रखते हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा का पालन हो।' इस दिशा में संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्लोबल साउथ (दक्षिणी देशों) की भावना है कि युद्ध जितना जल्दी खत्म हो उतना बेहतर है।
शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संबंध
जयशंकर ने कहा कि फ्रांस में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम होगा। उन्होंने फ्रांस को भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय परियोजना और राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर में सहयोगी भागीदार बताया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 में मनाया जाएगा और इसके लिए दोनों देश अभी से तैयारी में जुटे हैं।
त्रिपक्षीय सहयोग और IMEEC पर मंथन
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने बताया कि भारत और फ्रांस मिलकर त्रिपक्षीय सहयोग जैसे तंत्रों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'हम यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और इन अनुभवों को साझा करना चाहते हैं।' उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रों की हालिया इंडो-पैसिफिक यात्रा का भी जिक्र किया और कहा कि इस पर आगे और गहन बातचीत होगी।
यह भी पढ़ें - Air India Plane Crash: 'मलबा साफ होने के बाद ही पता चलेगी हताहतों की सही संख्या', एनडीआरएफ का बयान
भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा सहयोग में निभाएगा भूमिका : जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईईसी) के पूरा हो जाने पर यह यूरोप से लेकर प्रशांत महासागर तक न सिर्फ संपर्क (कनेक्टिविटी) प्रदान करेगा बल्कि यह वैश्विक व्यापार गतिशीलता को पुनर्परिभाषित करने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। जयशंकर 'रायसीना मेडिटेरेनियन-2025' के उद्घाटन समारोह में आयोजित एक पैनल चर्चा में भूमि, समुद्र और हवाई संपर्क की आवश्यकता पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, वैश्विक संपर्क (ग्लोबल कनेक्टिविटी) आज कूटनीति का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। उन्होंने कहा कि अभी आईएमईईसी विकसित नहीं हुआ है, तब पर भी यूरोप के पास भारत के पश्चिमी तट तक आसान पहुंच है। हालांकि इसमें हूति विद्रोहियों की ओर से मालवाहक जहाजों को खतरा रहता है। उन्होंने कहा, हम पूर्वी भारत को वियतनाम तक जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हम रेलवे में बहुत बड़ा निवेश कर रहे हैं।
जयशंकर ने आमीर्निया से आतंकवाद को सहन न करने पर दिया जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फ्रांस में आर्मीनिया के अपने समकक्ष अरारत मिर्जोयान से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग व क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। जयशंकर द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने और विशेष रूप से 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकवादी हमले के मद्देनजर आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की भारत की नीति से दूसरे देशों को अवगत कराने के लिए यूरोप की यात्रा के तहत फ्रांस में हैं। उन्होंने भारत-फ्रांस सहयोग पर दृढ़ नीतियों से अवगत कराया।
एअर इंडिया विमान हादसे पर प्रतिक्रिया
गुजरात के अहमदाबाद में हुए विमान हादसे पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा, 'यह बेहद दुखद घटना रही है। बीते 24 घंटे में मैंने यूके, पुर्तगाल और कनाडा के विदेश मंत्रियों से बात की क्योंकि उनके नागरिक भी इस दुर्घटना में मारे गए हैं।' उन्होंने फ्रांसीसी सरकार से मिली सहानुभूति और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि, हमें अब जांच की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।'
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Delighted to hold talks with FM @jnbarrot of France in Marseille today.
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Welcomed France’s strong condemnation of terrorism and India’s right to defend itself.
Held productive discussions on our bilateral cooperation including in trade, defence, clean energy, IMEC, culture and… pic.twitter.com/rzJm3XTXbzविज्ञापन विज्ञापन— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) June 13, 2025
रणनीतिक साझेदारी और साझा विश्वास
जयशंकर ने कहा कि भारत और फ्रांस के रिश्तों में एक गहरे विश्वास और आपसी समझ की भावना है। उन्होंने कहा, हमारी रणनीतिक साझेदारी साझा मूल्यों पर आधारित है - लोकतंत्र, संप्रभुता, स्वतंत्र विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने रक्षा, अंतरिक्ष, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), तकनीक, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
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इंडो-पैसिफिक और समुद्री सुरक्षा
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा, 'भारत और फ्रांस एक खुले और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक की साझा सोच रखते हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा का पालन हो।' इस दिशा में संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्लोबल साउथ (दक्षिणी देशों) की भावना है कि युद्ध जितना जल्दी खत्म हो उतना बेहतर है।
शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संबंध
जयशंकर ने कहा कि फ्रांस में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम होगा। उन्होंने फ्रांस को भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय परियोजना और राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर में सहयोगी भागीदार बताया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 में मनाया जाएगा और इसके लिए दोनों देश अभी से तैयारी में जुटे हैं।
त्रिपक्षीय सहयोग और IMEEC पर मंथन
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने बताया कि भारत और फ्रांस मिलकर त्रिपक्षीय सहयोग जैसे तंत्रों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'हम यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और इन अनुभवों को साझा करना चाहते हैं।' उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रों की हालिया इंडो-पैसिफिक यात्रा का भी जिक्र किया और कहा कि इस पर आगे और गहन बातचीत होगी।
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भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा सहयोग में निभाएगा भूमिका : जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईईसी) के पूरा हो जाने पर यह यूरोप से लेकर प्रशांत महासागर तक न सिर्फ संपर्क (कनेक्टिविटी) प्रदान करेगा बल्कि यह वैश्विक व्यापार गतिशीलता को पुनर्परिभाषित करने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। जयशंकर 'रायसीना मेडिटेरेनियन-2025' के उद्घाटन समारोह में आयोजित एक पैनल चर्चा में भूमि, समुद्र और हवाई संपर्क की आवश्यकता पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, वैश्विक संपर्क (ग्लोबल कनेक्टिविटी) आज कूटनीति का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। उन्होंने कहा कि अभी आईएमईईसी विकसित नहीं हुआ है, तब पर भी यूरोप के पास भारत के पश्चिमी तट तक आसान पहुंच है। हालांकि इसमें हूति विद्रोहियों की ओर से मालवाहक जहाजों को खतरा रहता है। उन्होंने कहा, हम पूर्वी भारत को वियतनाम तक जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हम रेलवे में बहुत बड़ा निवेश कर रहे हैं।
जयशंकर ने आमीर्निया से आतंकवाद को सहन न करने पर दिया जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फ्रांस में आर्मीनिया के अपने समकक्ष अरारत मिर्जोयान से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग व क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। जयशंकर द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने और विशेष रूप से 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकवादी हमले के मद्देनजर आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की भारत की नीति से दूसरे देशों को अवगत कराने के लिए यूरोप की यात्रा के तहत फ्रांस में हैं। उन्होंने भारत-फ्रांस सहयोग पर दृढ़ नीतियों से अवगत कराया।
एअर इंडिया विमान हादसे पर प्रतिक्रिया
गुजरात के अहमदाबाद में हुए विमान हादसे पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा, 'यह बेहद दुखद घटना रही है। बीते 24 घंटे में मैंने यूके, पुर्तगाल और कनाडा के विदेश मंत्रियों से बात की क्योंकि उनके नागरिक भी इस दुर्घटना में मारे गए हैं।' उन्होंने फ्रांसीसी सरकार से मिली सहानुभूति और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि, हमें अब जांच की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।'