जो बाइडन ने पलट दी अमेरिका की 40 साल पुरानी सोच
996 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा था कि बिग गवर्नमेंट्स का युग खत्म हो गया है। उसके 25 साल बाद उसी मंच से बाइडन ने जो कहा, उसका यही मतलब समझा गया है कि बिग गवर्नमेंट का दौर लौट आया है और अब वक्त ये साबित करने का है कि ऐसी सरकार कारगर होती है...
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राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के 99वें दिन जो बाइडन ने कांग्रेस (संसद) के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए अपनी जो आर्थिक सोच सामने रखी, उसे अमेरिकी नीति में एक छोर से दूसरे छोर पर जाने जैसा बदलाव समझा गया है। उन्होंने कहा- ‘प्रिय अमेरिकावासियों, ट्रिकल डाउन इकोनॉमिक्स कभी कारगर नहीं हुआ है। अब समय है, जब हम नीचे और मध्य स्तरों से अपना विकास करें।’ ट्रिकल डाउन अर्थव्यवस्था का मतलब यह होता है कि अगर धनी तबकों के पास पैसा आता है, तो वह धीरे-धीरे रिस कर निम्न वर्ग तक जाता है। इससे सबकी स्थिति बेहतर होती है। इसीलिए अमेरिका धनी तबकों और बड़ी कंपनियों के टैक्स में कटौती के रास्ते पर चलता रहा है। लेकिन कोरोना महामारी के बाद बने हालात में जो बाइडन प्रशासन ने अब उस पुरानी सोच को पलटने का इरादा दिखाया है।
बतौर राष्ट्रपति जो बाइडन का कांग्रेस के संयुक्त सत्र में ये पहला संबोधन था। इसमें उन्होंने अति धनी तबकों पर टैक्स बढ़ाने की जरूरत बताई, ताकि अमेरिका में आर्थिक गैर-बराबरी की समस्या को हल किया जा सके। बाइडन इसके पहले अपने ‘अमेरिकन जॉब्स प्लान’ के तहत धनी तबकों पर टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव कर चुके हैँ। लेकिन उसका रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के भी कुछ सांसद विरोध कर रहे हैं। गुरुवार को बाइडन ने अपने भाषण में ध्यान दिलाया कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर में हुई टैक्स कटौती अति धनी अमेरिकियों के लिए वरदान साबित हुआ। उससे देश में आर्थिक गैर-बराबरी और बढ़ी है।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि अगर बाइडन ने अपने कार्यकाल के आरंभिक दिनों में ही पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के जमाने से चल रही इस सोच को पलट दिया है कि सरकार समस्या का समाधान नहीं, बल्कि खुद एक समस्या है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति रीगन ने 1981 में ये बात दो टूक कही थी। उसके बाद अमेरिका की तमाम सरकारें निजीकरण की राह पर चलती रही हैं। लेकिन उसके उलट बाइडन इस समझ पर चल रहे हैं कि सरकार अगर ठीक से काम करे, तो वह आम जनता की जिंदगी सुधार सकती है। संयुक्त सत्र में बाइडन ने कहा- ‘हमें साबित करना है कि लोकतंत्र अभी भी कारगर है। हमें साबित करना है कि सरकार अभी भी काम करती है और लोगों का भला कर सकती है।’ उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी रोकने के लिए देश में हुए टीकाकरण और नौकरियां पैदा करने के लिए घोषित की गई योजना से सरकार का महत्त्व साबित हो गया है।
बाइडन की ये राय पूर्व डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों की सोच भी अलग है। 1996 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा था कि बिग गवर्नमेंट्स (अधिक भूमिका वाली सरकारों) का युग खत्म हो गया है। उसके 25 साल बाद उसी मंच से बाइडन ने जो कहा, उसका यही मतलब समझा गया है कि बिग गवर्नमेंट का दौर लौट आया है और अब वक्त ये साबित करने का है कि ऐसी सरकार कारगर होती है।
अपनी इसी सोच के तहत जो बाइडन बड़े सरकारी खर्च के साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिकी आवाम की जिंदगी को सुधारने की योजनाएं पेश कर रहे हैं। राष्ट्रपति बनते ही उन्होंने 1.9 ट्रिलियन डॉलर का कोरोना राहत पैकेज लागू किया। उसके बाद उन्होंने सवा दो अरब ट्रिलियन का अमेरिकी जॉब्स प्लान घोषित किया, जिसे इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज भी कहा गया है। बुधवार को उन्होंने शिक्षा, बाल देखभाल और पेड फैमिली लीव (पूरे वेतन के साथ परिवारों को अवकाश देने) की 1.8 ट्रिलियन डॉलर की योजना पेश की। इस तरह वे लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर के सरकारी खर्च की कल्याण योजनाएं घोषित कर चुके हैं।
टीवी चैनल सीएनएन पर दिखाए गए एक जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक अमेरिका के ज्यादातर लोगों ने पहले सौ दिन में जो बाइडन के काम पर संतोष जताया है। एनबीसी चैनल पर दिखाए गए एक सर्वे में 55 फीसदी लोगों की ये राय सामने आई कि जो बाइडन प्रशासन को समस्याओं को हल करने के लिए और भी ज्यादा कदम उठाने चाहिए। जनमत की इस राय को बिग गवर्नमेंट की सोच का समर्थन माना गया है। इससे उत्साहित जो बाइडन ने संयुक्त सत्र में कहा कि वे ‘मानव बुनियादी ढांचे’ में निवेश करेंगे, जिससे मध्य वर्ग का विकास होगा और लोगों को गरीबी से निकलने में मदद मिलेगी।