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टकराव की आशंका: विशेषज्ञों की राय- हिंद-प्रशांत इलाके में सैन्य होड़ से बढ़ता जा रहा है खतरा

Sat, 20 Nov 2021 06:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 20 Nov 2021 06:32 PM IST
सार

जानकारों का कहना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इसकी वजह से सबसे ज्यादा चिंता जापान और दक्षिण कोरिया की बढ़ी है। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने पिछले महीने कहा था कि उनकी सरकार देश के रक्षा बजट को अपने जीडीपी के दो फीसदी तक ले जाएगी...

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Japan and South Korea are modernize their military due to threat from China and North Korea in indo pacific area
हिंद-प्रशांत क्षेत्र - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

हालांकि हाल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हाल में दुनिया का सारा ध्यान ताइवान को लेकर सैनिक टकराव की बढ़ रही आशंका पर केंद्रित रहा है, लेकिन इस क्षेत्र के कई दूसरे देश भी हथियारों की होड़ में शामिल हो गए है। इन देशों में हथियारों की खरीद और सैनिक तैयारियों पर खर्च बढ़ा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस इलाके में जिस तरह तनाव बढ़ रहा है, उसमें कभी दुर्घटनावश युद्ध छिड़ जाने का अंदेशा गहराता जा रहा है।

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चीन और उत्तर कोरिया से खतरा बढ़ा

अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक विशेष रिपोर्ट में बताया गया है कि जापान और दक्षिण कोरिया ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण की बड़ी मुहिम छेड़ी हुई है। इन दोनों देशों का कहना है कि उनके लिए चीन और उत्तर कोरिया से खतरा बढ़ गया है, इसलिए उनके पास सैन्य तैयारियों में जुटने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में मौजूद कई दूसरे देशों ने भी इसी दलील के आधार अपनी सैनिक तैयारियों की गति तेज कर दी है।

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ऑस्ट्रेलिया के स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट से जुड़े वरिष्ठ विश्लेषक मैल्कम डेविस ने सीएनएन से कहा कि यह पूरा इलाका ही ‘सुरक्षा संबंधी असमंजस’ का शिकार हो गया है। उन्होंने कहा- ‘इस क्षेत्र में बड़ी शक्तियों के बीच युद्ध की गुंजाइश लगातार बढ़ रही है। यहां भावी संकट की जमीन तैयार की जा रही है।’
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गुजरे दस साल में चीन ने अपनी सेना का तेजी से विकास किया है। चीनी सेना के पास अब दुनिया की एक बेहद मजबूत नौ सेना, तकनीकी रूप से उन्नत लड़ाकू जहाज और लगातार बढ़ रहे परमाणु हथियार हैं। चीन लगातार अपनी सेना का आधुनिकीकरण करने में लगा हुआ है। चीन का सैन्य बजट 200 बिलियन डॉलर तक पहुंचने वाला है। यह अभी भी अमेरिका के 740 बिलियन डॉलर से काफी कम है, लेकिन उसने तकनीकी उन्नति के मामले में कई क्षेत्रों में अमेरिका की बराबरी कर ली है।

जापान बढ़ाएगा रक्षा बजट

जानकारों का कहना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इसकी वजह से सबसे ज्यादा चिंता जापान और दक्षिण कोरिया की बढ़ी हैं। नतीजतन इन दोनों देशों ने भी सेना के आधुनिकीकरण के बड़े कार्यक्रम पर अमल शुरू कर दिया है। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने पिछले महीने कहा था कि उनकी सरकार देश के रक्षा बजट को अपने जीडीपी के दो फीसदी तक ले जाएगी।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक जापान की चिंता सिर्फ चीन नहीं है। बल्कि दक्षिण कोरिया के साथ उसके रिश्ते भी हाल में बिगड़े हैं। स्विट्जरलैंड की वेबस्टर यूनिवर्सिटी में इंडो-पैसिफिक के विशेषज्ञ लायोनेल फैटॉन के मुताबिक दक्षिण कोरिया के पास नौ सैनिक बेड़े हैं। अब जापान भी वैसे बेड़े हासिल करने की कोशिश में है।

इस होड़ से कई दूसरे देशों की चिंता बढ़ रही है। बीते जुलाई में वियतनाम के सैन्य विशेषज्ञ न्गूयेन दा फुंग ने एक लेख में लिखा था कि बजट की कमी के कारण वियतनाम को अपनी सेना के आधुनिकीकरण का कार्यक्रम रोकना पड़ा है। उधर सितंबर में फिलीपींस के रक्षा मंत्री डेल्फिन लोरेजाना ने सार्वजनिक रूप से शिकायत की थी कि अमेरिका उसे हाईटेक हथियार देने से इनकार कर रहा है, जबकि दूसरे देश ऐसे हथियार हासिल कर चुके हैं। इससे फिलीपींस के लिए खतरा बढ़ गया है।



मैल्कम डेविस की राय है कि वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देश इस क्षेत्र में टकराव टालना चाहते हैं। लेकिन चीन, जापान, और दक्षिण कोरिया के बीच चल रही होड़ आगे चल कर उन्हें भी अपना रक्षा बजट बढ़ाने पर मजबूर कर सकती है।

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