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Israel-Iran Conflict: न इस्राइल रुक रहा, न ईरान झुक रहा... अमेरिका के फैसलों से संघर्ष पर कितना होगा असर?

Fri, 20 Jun 2025 06:12 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 20 Jun 2025 06:12 PM IST
सार

Israel-Iran Conflict: ईरान और इस्राइल के बीच संघर्ष बीते एक हफ्ते और तेज हो गया है। दोनों ओर से मिसाइल और हवाई हमलों में कई  जानें गई हैं। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द फैसला ले सकते हैं कि उनका देश इस संघर्ष में सीधे उतरेगा या कूटनीति अपनाएगा। उनका फैसला इस संघर्ष को वैश्विक बना सकता है।

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Israel-Iran How much will us decisions affect the conflict
डोनाल्ड ट्रंप, अयातुल्ला अली खामनेई - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

इस्राइल-ईरान संघर्ष को शुरू हुए एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और विस्फोटक हो गए हैं। इस्राइल ने शुक्रवार को ईरान पर 60 से अधिक लड़ाकू विमानों से हमला किया, जिसमें मिसाइल निर्माण फैक्ट्रियों और परमाणु अनुसंधान केंद्र एसपीएनडी जैसे संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने इस्राइल के दक्षिणी इलाकों में मिसाइलें दागीं, जिससे रिहायशी इलाकों में भारी नुकसान हुआ। बीयरशेबा के सोरोका चिकित्सा केंद्र पर हमले में दर्जनों मरीज और चिकित्साकर्मी घायल हुए। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध में अमेरिका की भूमिका को लेकर दो हफ्ते के भीतर फैसला करने वाले हैं।

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अमेरिका के फैसले ईरान-इस्राइल संघर्ष की दिशा तय कर सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप अगर फोर्ड जैसे संवेदनशील ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला करते हैं, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय स्तर से निकलकर वैश्विक संकट में बदल सकता है। वहीं, अगर अमेरिका कूटनीतिक रास्ता अपनाता है, तो यूरोपीय देशों के साथ बातचीत की संभावना बढ़ सकती है। इस्राइल पहले से अमेरिकी समर्थन का दावा कर रहा है, जबकि ईरान अमेरिका को युद्ध का साझेदार मान रहा है। ऐसे में ट्रंप का निर्णय न केवल युद्ध का रुख बदलेगा, बल्कि पश्चिम एशिया की स्थिरता पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।
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ईरानी विदेश मंत्री जिनेवा के लिए रवाना
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची जिनेवा की ओर रवाना हुए हैं, जहां वे यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन, फ्रांस तथा जर्मनी के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। हालांकि, अराघची ने साफ किया है कि जब तक इस्राइल हमले करता रहेगा, ईरान किसी से बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिका पर इस्राइल का साझेदार और साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया और कहा कि ट्रंप लगातार हम शब्द का इस्तेमाल करके इस्राइली हमलों को अमेरिकी हमले जैसा बना रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन की इस्राइली नेताओं के साथ बैठक
वॉशिंगटन में ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की इस्राइली नेताओं के साथ बैठकें भी इस युद्ध में अमेरिका की संभावित सैन्य भूमिका को लेकर गंभीरता दिखा रही हैं। ट्रंप का मुख्य फोकस ईरान के फोर्दो यूरेनियम संवर्धन केंद्र पर हमला करने पर है, जो एक पहाड़ के नीचे बना हुआ है और केवल अमेरिका के बंकर बस्टर बम ही उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर अमेरिका ने यह कदम उठाया तो युद्ध का दायरा क्षेत्रीय से वैश्विक हो सकता है।


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इस्राइली पीएम नेतन्याहू को अमेरिका से उम्मीद
इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने उम्मीद जताई है कि ट्रंप 'अमेरिका के हित में सबसे बेहतर फैसला लेंगे' और संकेत दिए हैं कि अमेरिका पहले से ही इस्राइल को पीछे से सैन्य मदद कर रहा है। वहीं, इस्राइली रक्षा मंत्री ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई को खुलेआम चेतावनी दी है कि वे अब इस युद्ध का वैध निशाना हैं। ये बयान साफ करते हैं कि युद्ध अब केवल ठिकानों और सैन्य बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रहने वाला।

ईरान-इस्राइल युद्ध में अब तक कितनी मौतें?
अब तक के युद्ध में ईरान में 657 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 263 आम नागरिक हैं। वहीं, इस्राइल में 24 मौतों की पुष्टि हुई है। ईरान ने 450 मिसाइलें और 1,000 ड्रोन हमले किए हैं, जबकि इस्राइल की मल्टीलेयर एयर डिफेंस ने ज्यादातर हमलों को नाकाम किया है। इस्राइल के हवाई हमलों में नतांज, इस्फहान और तेहरान के आसपास के परमाणु और मिसाइल ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। दोनों देशों की जिद और अमेरिका की उलझन इस युद्ध को और खतरनाक बना रही है, जिसका अंत अब कूटनीति से कम और ताकत से ज्यादा तय होता दिख रहा है।

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