{"_id":"68554522e60c643a490a560a","slug":"iran-supreme-leader-ayatollah-ali-khamenei-successor-election-israel-us-warnings-netanyahu-trump-explained-new-2025-06-20","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"US-इस्राइल के लिए आसान नहीं ईरान का शासन बदलना: खामनेई के उत्तराधिकारी का है पूरा प्लान, जानें कौन है दावेदार","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
US-इस्राइल के लिए आसान नहीं ईरान का शासन बदलना: खामनेई के उत्तराधिकारी का है पूरा प्लान, जानें कौन है दावेदार
Fri, 20 Jun 2025 04:55 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 20 Jun 2025 04:55 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
Please wait...
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई के उत्तराधिकार के लिए दावेदार नेता।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। इस्राइल की तरफ से ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने और उसके सैन्य अधिकारियों को मार गिराने के बाद से स्थिति तनावपूर्ण है। ईरान भी जवाब में इस्राइल के प्रमुख शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर रहा है।इस बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग मौकों पर दावा किया कि उन्हें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई के ठिकाने की बिल्कुल सही जानकारी है। इस बीच इस्राइल ने खुली धमकी दी कि अयातुल्ला खामनेई अब जिंदा नहीं बचेंगे। माना जा रहा है कि इस्राइल ईरान के सुप्रीम लीडर को निशाना बनाकर देश के शासन में बदलाव करना चाहता है। दूसरी तरफ अमेरिका ने भी कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर कोई भी फैसला अगले दो हफ्ते में कर सकते हैं।
अगर इस्राइल या अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान के सुप्रीम लीडर तक पहुंच जाते हैं या शासन को बदलने की कोशिश में सफल होते हैं तो इसका असर क्या होगा? ईरान में शासन व्यवस्था में क्या बदलाव हो सकता है? इस देश में सर्वोच्च नेता चुने जाने की प्रक्रिया क्या है और खामनेई की गैरमौजूदगी की स्थिति में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? इस पद के लिए कितने दावेदार हैं और इनकी क्या खासियत है? आइये जानते हैं...
सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी में कैसे चलती है ईरान की शासन व्यवस्था?
इस्राइल या अमेरिका अगर ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई तक पहुंचने या उन्हें निशाना बनाने में सफल हो जाते हैं तो इसकी संभावना काफी कम है कि ईरान में शासन व्यवस्था में कोई बदलाव होगा। इसकी वजह यह है कि 1979 में जब ईरान में क्रांति हुई थी, तब यहां सुप्रीम लीडर द्वारा शासन की व्यवस्था आ गई। किसी एक सर्वोच्च नेता के न होने पर भी ईरान में सरकार के माध्यम से शासन की व्यवस्था पहले से तय है। इसके अलावा देश में सुप्रीम लीडर के चुने जाने की प्रक्रिया भी पहले से ही चिह्नित है।
इस्राइल या अमेरिका अगर ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई तक पहुंचने या उन्हें निशाना बनाने में सफल हो जाते हैं तो इसकी संभावना काफी कम है कि ईरान में शासन व्यवस्था में कोई बदलाव होगा। इसकी वजह यह है कि 1979 में जब ईरान में क्रांति हुई थी, तब यहां सुप्रीम लीडर द्वारा शासन की व्यवस्था आ गई। किसी एक सर्वोच्च नेता के न होने पर भी ईरान में सरकार के माध्यम से शासन की व्यवस्था पहले से तय है। इसके अलावा देश में सुप्रीम लीडर के चुने जाने की प्रक्रिया भी पहले से ही चिह्नित है।
विशेषज्ञ सभा के उम्मीदवारों को चुनने वाली गार्डियन काउंसिल में 12 सदस्य होते हैं। इनमें छह इस्लामिक फकीह (इस्लामी कानून में विशेषज्ञ) और छह न्यायविद होते हैं। गार्डियन काउंसिल न सिर्फ ईरान में स्थानीय-राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वालों को परखती है, बल्कि चुनाव कराने और संसद से पास कानूनों को वीटो करने का भी अधिकार रखती हैं।
Khamenei vs Netanyahu: पश्चिम एशिया की किस्मत बदलने की कोशिश में दो ताकतवर नेता, जानें दोनों की कहानी
खामनेई की गैरमौजूदगी में कौन-कौन होगा सुप्रीम लीडर पद का दावेदार?
1. मोजतबा खामनेईईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अगले सर्वोच्च नेता के लिए मोजतबा खामनेई की दावेदारी सबसे मजबूत है। मोजतबा मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के दूसरे बेटे हैं और राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। मोजतबा खामनेई का जन्म साल 1969 में ईरान के मशहद में हुआ था। ईरान की सरकार में मोजतबा खामेनेई का गहरा प्रभाव है और कहा जाता है कि ईरान की खुफिया और सशस्त्र सेनाओं में भी मोजतबा खामनेई के करीबी शामिल हैं।
मोजतबा ईरान-इराक में हुए युद्ध में भी भाग ले चुके हैं। उन्होंने धार्मिक शिक्षा हासिल की है और वे इस्लामिक मामलों के जानकार हैं, लेकिन उनकी गिनती शीर्ष स्तर के धर्मगुरुओं में नहीं होती है। मोजतबा साल 1990 से ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं। 2005 तक लोगों की नजर से दूर रहे मोजतबा की मोहम्मद अहमदिनेजाद को ईरान का राष्ट्रपति बनाने में अहम भूमिका रही थी। हालांकि, बाद में दोनों में विवाद हो गया और अहमदीनेजाद ने मोजतबा पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
ईरान के मीडिया पर भी मोजतबा की पकड़ है और उन्होंने साल 2014 में ईरान के सरकारी टीवी आईआरआईबी के निदेशक को नौकरी से निकाल दिया था। देश में जब साल 2009 में विरोध प्रदर्शन हुए थे तो उन्हें सख्ती से कुचलने के पीछे भी मोजतबा का ही दिमाग माना जाता है। उस दौरान कई लोग मारे गए थे। 2021 में मोजतबा को अयातुल्ला की पदवी दी गई। ईरान का सुप्रीम लीडर बनने के लिए यह पदवी होना सबसे अहम है। बीते कुछ दशकों में ईरान में उनकी राजनीतिक पहुंच बढ़ी है। कई जानकारों का मानना है कि ईरान की सेना-रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और वहां धर्मगुरुओं के बीच अच्छी पैठ होने की वजह से मोजतबा अपने पिता की जगह लेने के लिए सबसे उपयुक्त दावेदार हैं।
2. अलीरेजा अराफी
सुप्रीम लीडर पद के दूसरे बड़े दावेदार अलीरेजा अराफी हैं। अराफी लंबे समय से अयातुल्ला खामनेई के करीबी रहे हैं। वे खुद सर्वोच्च नेता चुनने वाली विशेषज्ञ सभा का हिस्सा रहे हैं। वे उम्मीदवारों की छंटनी करने वाली गार्डियन काउंसिल में भी उन्होंने लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। बताया जाता है कि अराफी तकनीकी तौर पर भी काफी आगे हैं और धर्मगुरुओं से नई तकनीक को अपनाने की वकालत करते रहे हैं।
अराफी का तर्क है कि इसके जरिए ही धार्मिक संस्थानों को सदियों पुराने अलग-थलग हो चुके रिवाजों से बाहर निकाला जा सकेगा। हालांकि, वे खामनेई की इस्लामिक विचारधारा के पैरोकार रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई जहां काले रंग का साफा सिर पर बांधते हैं वहीं, अराफी सफेद साफा बांधते हैं। माना जाता है कि काला साफा मुख्यतः सैयद पहनते हैं, जो कि खुद को पैगंबर मोहम्मद और शियाओं के पहले इमाम- इमाम अली का वंशज मानते हैं। ऐसे में अराफी के सुप्रीम लीडर बनने की राह में यह एक बड़ा अवरोध है।
हालांकि, एक गौर करने वाली बात यह भी है कि 1989 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी बीमार थे, तब उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर पहले हुसैन अली मोंताजरी को नियुक्त किया था। मोंताजरी भी सफेद साफा पहनने वाले धर्मगुरु थे।
सुप्रीम लीडर पद के दूसरे बड़े दावेदार अलीरेजा अराफी हैं। अराफी लंबे समय से अयातुल्ला खामनेई के करीबी रहे हैं। वे खुद सर्वोच्च नेता चुनने वाली विशेषज्ञ सभा का हिस्सा रहे हैं। वे उम्मीदवारों की छंटनी करने वाली गार्डियन काउंसिल में भी उन्होंने लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। बताया जाता है कि अराफी तकनीकी तौर पर भी काफी आगे हैं और धर्मगुरुओं से नई तकनीक को अपनाने की वकालत करते रहे हैं।
अराफी का तर्क है कि इसके जरिए ही धार्मिक संस्थानों को सदियों पुराने अलग-थलग हो चुके रिवाजों से बाहर निकाला जा सकेगा। हालांकि, वे खामनेई की इस्लामिक विचारधारा के पैरोकार रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई जहां काले रंग का साफा सिर पर बांधते हैं वहीं, अराफी सफेद साफा बांधते हैं। माना जाता है कि काला साफा मुख्यतः सैयद पहनते हैं, जो कि खुद को पैगंबर मोहम्मद और शियाओं के पहले इमाम- इमाम अली का वंशज मानते हैं। ऐसे में अराफी के सुप्रीम लीडर बनने की राह में यह एक बड़ा अवरोध है।
हालांकि, एक गौर करने वाली बात यह भी है कि 1989 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी बीमार थे, तब उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर पहले हुसैन अली मोंताजरी को नियुक्त किया था। मोंताजरी भी सफेद साफा पहनने वाले धर्मगुरु थे।
3. अली असगर हेजाजी
अली असगर हेजाजी इस वक्त अयातुल्ला अली खामनेई के अंतर्गत राजनीतिक सुरक्षा मामलों के मंत्रालय को संभाल रहे हैं। उनके पास ईरानी खुफिया विभाग की जिम्मेदारी है। उनके आईआरजीसी और शीर्ष धर्मगुरुओं के साथ अच्छे संबंध हैं। हेजाजी अक्सर ईरान के रक्षा और कूटनीतिक मामलों पर फैसले में शामिल होते हैं। हालांकि, उन्हें अब तक अयातुल्ला की पदवी नहीं मिली है, जो कि सुप्रीम लीडर बनने के लिए अनिवार्य है।
Israel-Iran Conflict: 'सद्दाम हुसैन जैसा हो सकता है खामनेई का अंजाम', इस्राइली रक्षा मंत्री ने दी चेतावनी
अली असगर हेजाजी इस वक्त अयातुल्ला अली खामनेई के अंतर्गत राजनीतिक सुरक्षा मामलों के मंत्रालय को संभाल रहे हैं। उनके पास ईरानी खुफिया विभाग की जिम्मेदारी है। उनके आईआरजीसी और शीर्ष धर्मगुरुओं के साथ अच्छे संबंध हैं। हेजाजी अक्सर ईरान के रक्षा और कूटनीतिक मामलों पर फैसले में शामिल होते हैं। हालांकि, उन्हें अब तक अयातुल्ला की पदवी नहीं मिली है, जो कि सुप्रीम लीडर बनने के लिए अनिवार्य है।
Israel-Iran Conflict: 'सद्दाम हुसैन जैसा हो सकता है खामनेई का अंजाम', इस्राइली रक्षा मंत्री ने दी चेतावनी
4. हासिम हुसैनी बुशहरी
ईरान में हासिम अली बुशहरी को भी सुप्रीम लीडर पद का अहम दावेदार माना जा रहा है। बुशहरी ईरान में प्रमुख धर्मगुरु के साथ-साथ कई और भूमिकाओं में रह चुके हैं। इनमें विशेषज्ञ सभा के पहले उप-प्रधान के अलावा धार्मिक मामलों से जुड़ी कई समितियों और प्रार्थना सभाओं की जिम्मेदारियां शामिल हैं। बुशहरी के सुप्रीम लीडर खामनेई से भी अच्छे संबंध हैं, जो कि सर्वोच्च पद के लिए उन्हें अहम दावेदार बनाती है।
ईरान में हासिम अली बुशहरी को भी सुप्रीम लीडर पद का अहम दावेदार माना जा रहा है। बुशहरी ईरान में प्रमुख धर्मगुरु के साथ-साथ कई और भूमिकाओं में रह चुके हैं। इनमें विशेषज्ञ सभा के पहले उप-प्रधान के अलावा धार्मिक मामलों से जुड़ी कई समितियों और प्रार्थना सभाओं की जिम्मेदारियां शामिल हैं। बुशहरी के सुप्रीम लीडर खामनेई से भी अच्छे संबंध हैं, जो कि सर्वोच्च पद के लिए उन्हें अहम दावेदार बनाती है।
5. अली अकबर वेलायती
ईरान में कभी विदेश मंत्री की भूमिका निभाग चुके अली अकबर विदेश मामलों में खामनेई के करीबी सलाहकार हैं। वे लंबे समय तक राजनयिक की भूमिका में भी रह चुके हैं और परमाणु समझौते के लिए बातचीत में भी शामिल रहे हैं। वे ईरानी नेतृत्व के काफी करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।
ईरान में कभी विदेश मंत्री की भूमिका निभाग चुके अली अकबर विदेश मामलों में खामनेई के करीबी सलाहकार हैं। वे लंबे समय तक राजनयिक की भूमिका में भी रह चुके हैं और परमाणु समझौते के लिए बातचीत में भी शामिल रहे हैं। वे ईरानी नेतृत्व के काफी करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।