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Iran-US: अमेरिका पर भरोसा नहीं कर पा रहा ईरान, विदेश मंत्री अराघची बोले- हम बातचीत और जंग दोनों के लिए तैयार
Thu, 12 Feb 2026 03:00 AM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Thu, 12 Feb 2026 03:00 AM IST
सार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि देश अमेरिका के साथ कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन हमले की स्थिति में जवाब देने को भी तैयार है। उन्होंने अमेरिका पर पूरा भरोसा न होने की बात कही। ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताया और मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत से इनकार किया।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची
- फोटो : ANI/Reuters
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विस्तार
ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर चल रही बातचीत के बीच सख्त और साफ संदेश दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अगर हमला हुआ तो जवाब देने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि बातचीत ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन हाल की घटनाओं ने अमेरिका पर भरोसा कमजोर किया है। उनके बयान से साफ है कि वार्ता और तनाव दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।
एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि ईरान अब भी अमेरिका के साथ बातचीत चाहता है, लेकिन पूरा भरोसा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पिछले साल जून में जब बातचीत चल रही थी, उसी दौरान हमला हुआ, जो ईरान के लिए खराब अनुभव रहा। उनके मुताबिक सैन्य हमले और धमकियां किसी देश की तकनीकी प्रगति को नहीं रोक सकतीं। इसलिए स्थायी समाधान सिर्फ कूटनीति से ही निकलेगा।
ये भी पढ़ें- एपस्टीन फाइल्स पर अमेरिका में बवाल: अटॉर्नी जनरल बॉन्डी पर नाम छिपाने का आरोप, न्याय विभाग पर उठे सवाल
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परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का पक्ष साफ
अराघची ने दोहराया कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और यह देश का संप्रभु अधिकार है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए 5 प्रतिशत से कम संवर्धन की जरूरत होती है। तेहरान रिसर्च रिएक्टर के लिए 20 प्रतिशत तक संवर्धन का ईंधन चाहिए, जिसका उपयोग कैंसर इलाज के लिए मेडिकल आइसोटोप बनाने में होता है। उन्होंने कहा कि प्रतिशत से ज्यादा जरूरी यह है कि कार्यक्रम का मकसद शांतिपूर्ण है। ईरान इस बात की गारंटी देने को भी तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
क्षेत्रीय गठजोड़ पर बातचीत से इनकार
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर बात करेगा। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों पर कोई बातचीत नहीं होगी। अराघची ने कहा कि ये मांगें बिल्कुल स्वीकार नहीं हैं। दूसरी तरफ इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू चाहते हैं कि ईरान से होने वाली किसी भी डील में मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय संगठनों का मुद्दा भी शामिल हो।
ये भी पढ़ें- कनाडा के स्कूल में गोलीबारी, हमलावर समेत 10 की मौत; जांच में जुटी पुलिस
युद्ध की तैयारी का भी दावा
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अगर बातचीत नाकाम होती है और नया हमला होता है तो ईरान जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल इस्राइल और अमेरिका की बमबारी के बाद ईरान की सैन्य तैयारी संख्या और गुणवत्ता दोनों में बढ़ी है। उन्होंने नेतन्याहू को युद्ध भड़काने वाला नेता बताया और आरोप लगाया कि वह अमेरिका को बड़े टकराव में खींचना चाहते हैं। अराघची ने चेतावनी दी कि दोबारा हमला हुआ तो क्षेत्र में अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर आ सकते हैं।
अमेरिका-इस्राइल की कूटनीति
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें लगता है कि ईरान परमाणु समझौता चाहता है। उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन चेतावनी दी कि डील नहीं होने पर बहुत सख्त परिणाम होंगे। ट्रंप परमाणु हथियार और मिसाइल रोकने वाली सख्त डील चाहते हैं। वहीं नेतन्याहू ने अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात कर क्षेत्रीय मुद्दों और ईरान वार्ता पर चर्चा की। साफ है कि कूटनीति जारी है, लेकिन अविश्वास और खतरा दोनों बने हुए हैं।
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एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि ईरान अब भी अमेरिका के साथ बातचीत चाहता है, लेकिन पूरा भरोसा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पिछले साल जून में जब बातचीत चल रही थी, उसी दौरान हमला हुआ, जो ईरान के लिए खराब अनुभव रहा। उनके मुताबिक सैन्य हमले और धमकियां किसी देश की तकनीकी प्रगति को नहीं रोक सकतीं। इसलिए स्थायी समाधान सिर्फ कूटनीति से ही निकलेगा।
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परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का पक्ष साफ
अराघची ने दोहराया कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और यह देश का संप्रभु अधिकार है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए 5 प्रतिशत से कम संवर्धन की जरूरत होती है। तेहरान रिसर्च रिएक्टर के लिए 20 प्रतिशत तक संवर्धन का ईंधन चाहिए, जिसका उपयोग कैंसर इलाज के लिए मेडिकल आइसोटोप बनाने में होता है। उन्होंने कहा कि प्रतिशत से ज्यादा जरूरी यह है कि कार्यक्रम का मकसद शांतिपूर्ण है। ईरान इस बात की गारंटी देने को भी तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
क्षेत्रीय गठजोड़ पर बातचीत से इनकार
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर बात करेगा। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों पर कोई बातचीत नहीं होगी। अराघची ने कहा कि ये मांगें बिल्कुल स्वीकार नहीं हैं। दूसरी तरफ इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू चाहते हैं कि ईरान से होने वाली किसी भी डील में मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय संगठनों का मुद्दा भी शामिल हो।
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युद्ध की तैयारी का भी दावा
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अगर बातचीत नाकाम होती है और नया हमला होता है तो ईरान जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल इस्राइल और अमेरिका की बमबारी के बाद ईरान की सैन्य तैयारी संख्या और गुणवत्ता दोनों में बढ़ी है। उन्होंने नेतन्याहू को युद्ध भड़काने वाला नेता बताया और आरोप लगाया कि वह अमेरिका को बड़े टकराव में खींचना चाहते हैं। अराघची ने चेतावनी दी कि दोबारा हमला हुआ तो क्षेत्र में अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर आ सकते हैं।
अमेरिका-इस्राइल की कूटनीति
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें लगता है कि ईरान परमाणु समझौता चाहता है। उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन चेतावनी दी कि डील नहीं होने पर बहुत सख्त परिणाम होंगे। ट्रंप परमाणु हथियार और मिसाइल रोकने वाली सख्त डील चाहते हैं। वहीं नेतन्याहू ने अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात कर क्षेत्रीय मुद्दों और ईरान वार्ता पर चर्चा की। साफ है कि कूटनीति जारी है, लेकिन अविश्वास और खतरा दोनों बने हुए हैं।
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