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एपस्टीन फाइल्स पर अमेरिका में बवाल: अटॉर्नी जनरल बॉन्डी पर नाम छिपाने का आरोप, न्याय विभाग पर उठे सवाल
Thu, 12 Feb 2026 02:38 AM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Thu, 12 Feb 2026 02:38 AM IST
सार
अमेरिका में एपस्टीन फाइल्स को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संसदीय सुनवाई में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी पर आरोप लगा कि उन्होंने एपस्टीन के प्रभावशाली साथियों के नाम छिपाए। सांसदों ने दस्तावेजों में ज्यादा कटौती पर नाराजगी जताई। बॉन्डी ने कहा कि पीड़ितों की सुरक्षा के लिए ऐसा किया गया।
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एपस्टीन फाइल्स
- फोटो : ANI/PTI
विस्तार
अमेरिका में कुख्यात कारोबारी और दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संसद की एक समिति की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल बॉन्डी पर आरोप लगा कि उन्होंने एपस्टीन के प्रभावशाली साथियों के नाम छिपाए। रिपब्लिकन सांसदों ने न्याय विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि कानून के बावजूद पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने बॉन्डी से सीधे सवाल किए। उन्होंने कहा कि एपस्टीन यौन तस्करी जांच से जुड़े दस्तावेजों में संभावित सह-साजिशकर्ताओं की सूची में अरबपति कारोबारी लेस्ली वेक्सनर का नाम काला कर छिपाया गया। मैसी ने इसे कानून का पालन न करना और बड़ी विफलता बताया। जवाब में बॉन्डी ने कहा कि वेक्सनर का नाम दूसरे जारी दस्तावेजों में मौजूद है और आपत्ति उठने के 40 मिनट के भीतर उसे बिना ढंके जारी कर दिया गया।
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भारी कटौती और ब्लैकआउट पर सांसदों की नाराजगी
संसदीय समिति के कई सदस्यों ने शिकायत की कि एपस्टीन फाइल्स में जरूरत से ज्यादा हिस्से काले किए गए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस ने जिस कानून के तहत फाइलें जारी करने को कहा था, उसमें सीमित छूट की अनुमति है, लेकिन न्याय विभाग ने उससे ज्यादा सामग्री छिपाई। पिछले महीने विभाग ने 30 लाख से ज्यादा पन्नों का अंतिम दस्तावेज सेट जारी किया, लेकिन उसमें भी कई नाम और हिस्से हटाए गए थे।
बॉन्डी का बचाव, पीड़ितों की सुरक्षा का तर्क
बॉन्डी ने अपने बचाव में कहा कि सैकड़ों वकीलों की टीम ने कम समय में फाइलों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि विभाग का मकसद पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखना है। अगर कहीं पीड़ितों के नाम सामने आए तो वह अनजाने में हुई गलती है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा करियर पीड़ितों के लिए लड़ते हुए बीता है और आगे भी ऐसा करती रहेंगी। सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ सांसदों के सवालों को राजनीतिक नाटक भी बताया।
ये भी पढ़ें- तीन घंटे चली नेतन्याहू संग बैठक, खत्म होने पर ट्रंप बोले- ईरान के साथ जारी रहेगी बातचीत
ट्रंप कनेक्शन और पुरानी जांच फिर चर्चा में
एपस्टीन मामला फिर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उसका नाम कई बड़े और ताकतवर लोगों से जुड़ा रहा है। एपस्टीन की 2019 में जेल में मौत हो गई थी, जब वह यौन तस्करी के आरोपों में ट्रायल का इंतजार कर रहा था। एपस्टीन के साथ पुराने संबंधों को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का नाम भी पहले सुर्खियों में रहा है, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और संवेदनशील बन गया है। न्याय विभाग पर यह भी आरोप लग रहा है कि वह कुछ मामलों में सख्ती और कुछ में नरमी दिखा रहा है।
न्याय विभाग की भूमिका पर उठे बड़े सवाल
सुनवाई ऐसे समय हुई जब न्याय विभाग की निष्पक्षता पर भी बहस चल रही है। आलोचकों का कहना है कि विभाग की स्वतंत्र जांच की परंपरा कमजोर हुई है और फैसलों में राजनीतिक असर दिख रहा है। हालांकि विभाग ने इन आरोपों को खारिज किया है। एपस्टीन फाइल्स को लेकर विवाद अभी थमता नहीं दिख रहा और आगे भी इस पर नई कानूनी और राजनीतिक टकराव की संभावना जताई जा रही है।
अन्य वीडियो-
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सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने बॉन्डी से सीधे सवाल किए। उन्होंने कहा कि एपस्टीन यौन तस्करी जांच से जुड़े दस्तावेजों में संभावित सह-साजिशकर्ताओं की सूची में अरबपति कारोबारी लेस्ली वेक्सनर का नाम काला कर छिपाया गया। मैसी ने इसे कानून का पालन न करना और बड़ी विफलता बताया। जवाब में बॉन्डी ने कहा कि वेक्सनर का नाम दूसरे जारी दस्तावेजों में मौजूद है और आपत्ति उठने के 40 मिनट के भीतर उसे बिना ढंके जारी कर दिया गया।
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भारी कटौती और ब्लैकआउट पर सांसदों की नाराजगी
संसदीय समिति के कई सदस्यों ने शिकायत की कि एपस्टीन फाइल्स में जरूरत से ज्यादा हिस्से काले किए गए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस ने जिस कानून के तहत फाइलें जारी करने को कहा था, उसमें सीमित छूट की अनुमति है, लेकिन न्याय विभाग ने उससे ज्यादा सामग्री छिपाई। पिछले महीने विभाग ने 30 लाख से ज्यादा पन्नों का अंतिम दस्तावेज सेट जारी किया, लेकिन उसमें भी कई नाम और हिस्से हटाए गए थे।
बॉन्डी का बचाव, पीड़ितों की सुरक्षा का तर्क
बॉन्डी ने अपने बचाव में कहा कि सैकड़ों वकीलों की टीम ने कम समय में फाइलों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि विभाग का मकसद पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखना है। अगर कहीं पीड़ितों के नाम सामने आए तो वह अनजाने में हुई गलती है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा करियर पीड़ितों के लिए लड़ते हुए बीता है और आगे भी ऐसा करती रहेंगी। सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ सांसदों के सवालों को राजनीतिक नाटक भी बताया।
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न्याय विभाग की भूमिका पर उठे बड़े सवाल
सुनवाई ऐसे समय हुई जब न्याय विभाग की निष्पक्षता पर भी बहस चल रही है। आलोचकों का कहना है कि विभाग की स्वतंत्र जांच की परंपरा कमजोर हुई है और फैसलों में राजनीतिक असर दिख रहा है। हालांकि विभाग ने इन आरोपों को खारिज किया है। एपस्टीन फाइल्स को लेकर विवाद अभी थमता नहीं दिख रहा और आगे भी इस पर नई कानूनी और राजनीतिक टकराव की संभावना जताई जा रही है।
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