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Hindi News ›   World ›   International Council of Nurses Report : Rich countries recruited nursing staff from vulnerable countries

नैतिक पतन : कोरोना महामारी में भी गरीबों का हक मारना नहीं छोड़ रहे अमीर मुल्क 

Tue, 25 Jan 2022 12:28 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, जिनेवा।
एजेंसी, जिनेवा। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 25 Jan 2022 12:28 AM IST
सार

नर्सों की अंतरराष्ट्रीय परिषद ने अपनी रिपोर्ट में अमीर देशों को लेकर तमाम खुलासे किए है। इनमें सबसे पहला तो यही है कि संपन्न देशों ने ओमिक्रॉन से निपटने के लिए गरीब देशों की नर्सों की जमकर भर्तियां कर ली हैं। इससे पहले की लहरों में पीपीई और टीकों की जमाखोरी हुई थी।

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International Council of Nurses Report : Rich countries recruited nursing staff from vulnerable countries
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : PTI

विस्तार

ओमिक्रॉन स्वरूप के कारण दुनियाभर में जारी कोरोना महामारी की ताजा लहर में एक बार फिर अमीर देशों ने गरीब मुल्कों का हक मारकर सिर्फ अपनी स्वार्थपूर्ति की है। नर्सों की अंतरराष्ट्रीय परिषद (आईसीएन) की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व में पीपीई और टीकों पर कब्जा जमाने वाले धनी देशों ने अब कमजोर मुल्कों के नर्सिंग स्टाफ की जमकर भर्तियां कर ली है ताकि अस्पतालों में उनके मरीजों की उचित देखभाल हो सके। 

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लेकिन इस स्थिति ने न सिर्फ गरीब देशों में नर्सों की भारी कमी पैदा कर दी है बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नैतिक सवाल भी खड़ा किया है। जिनेवा स्थित परिषद के सीईओ होवर्ड कैटॉन का कहना है, ओमिक्रॉन स्वरूप से बढ़ते संक्रमण के बीच गरीब देशों में नर्सिंग कर्मचारियों की अनुपस्थिति महामारी के दो साल में अब तक सबसे ज्यादा दर्ज की गई है।
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अमीर देशों ने अस्पतालों में बढ़ते मरीजों को देखते हुए सैन्य कर्मियों, स्वयंसेवकों की सहायता तो ली ही है लेकिन वैश्विक स्तर पर नर्सों की भर्तियां भी की हैं। कोरोना और ग्लोबल नर्सिंग फोर्स पर रिपोर्ट के सह लेखक कैटॉन ने कहा कि ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों द्वारा नर्सिंग स्टाफ की अंतरराष्ट्रीय भर्तियों में जबरदस्त उछाल आया है। 
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इस स्थिति ने उनके द्वारा पहले की लहरों में पीपीई किटों और टीकों की जमकर खरीदारी और जमाखोरी की यादें ताजा कर दी हैं, जिनका गरीब मुल्क अब तक खामियाजा भुगत रहे हैं। वहीं, अब बड़ी तादाद में कमजोर देशों की नर्सों को अच्छे वेतन और घर का लालच देकर नियुक्त कर लेने से उन पर एक और संकट आ खड़ा हुआ है।


गरीब देशों में 90 फीसदी कमी
आईसीएन के डाटा के मुताबिक, महामारी शुरू होने से पहले वैश्विक स्तर पर 60 लाख नर्सों की कमी थी और इनमें से 90 फीसदी पद निम्न व मध्यम आय वाले देशों में खाली थे। हाल ही में हुई कुछ भर्तियां नाइजीरिया और कैरेबियाई हिस्सों समेत उप-सहारा देशों से की गई हैं।

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