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UN: यूएन में पाकिस्तान ने फिर अलापा कश्मीर राग, भारत ने लगाई लताड़ा, कहा- ध्यान भटकाने की एक और नाकाम कोशिश
Thu, 27 Jun 2024 10:35 AM IST
काव्या मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Thu, 27 Jun 2024 10:35 AM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप प्रतिनिधि आर रवींद्र ने कहा कि यह और कुछ नहीं बल्कि बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघनों से ध्यान हटाने का एक और आदतन प्रयास है, जो पाकिस्तान में बेरोकटोक जारी है।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप प्रतिनिधि आर रवींद्र
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर भारत ने पाकिस्तान को जमकर खरी-खरी सुनाई। दरअसल, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के एक सत्र के दौरान जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया। जिस पर जवाब देते हुए भारत ने जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की आधारहीन टिप्पणियों के लिए उसकी आलोचना की। उसने टिप्पणियों को राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया। कहा कि यह उसके अपने देश में बच्चों के खिलाफ जारी गंभीर उल्लंघनों से ध्यान हटाने का एक और आदतन प्रयास है।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर खुली बहस के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप प्रतिनिधि आर रवींद्र ने बुधवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अलग-अलग हिस्से हैं।
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मुझे इस मुद्दे पर बोलने दें
बहस के दौरान अपना बयान समाप्त करने से पहले आर रवींद्र ने कहा, 'मुझे समय के हित में टिप्पणियों का संक्षेप में जवाब देने दें, जो स्पष्ट रूप से राजनीति से प्रेरित और निराधार थीं, जो मेरे देश के खिलाफ एक प्रतिनिधि द्वारा की गई थीं। मैं स्पष्ट रूप से इन आधारहीन टिप्पणियों को खारिज करता हूं और उनकी निंदा करता हूं।'
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बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघनों से ध्यान हटाने का प्रयास
उन्होंने कहा, 'यह और कुछ नहीं बल्कि बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघनों से ध्यान हटाने का एक और आदतन प्रयास है, जो उनके अपने देश में बेरोकटोक जारी है। यह इस साल महासचिव की बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर रिपोर्ट में उजागर किया गया है। जहां तक केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का सवाल है, वे भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे, भले ही यह विशेष प्रतिनिधि या उनका देश क्या मानता या चाहता हो।'
उनकी यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने के बाद आई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बहस के दौरान आर रवींद्र ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वार्षिक बहस से सशस्त्र संघर्ष की स्थितियों में बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बच्चों के खिलाफ उल्लंघन को रोकने के महत्व को पहचानने में मदद मिली है।
वार्षिक बहस से सामने लाया मुद्दा
भारतीय दूत ने कहा, 'इस साल बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1261 को अपनाए जाने के 25 साल पूरे हो रहे हैं। पिछले कुछ सालों में, वार्षिक बहस ने सशस्त्र संघर्ष की स्थितियों में बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों को सामने लाया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बच्चों के खिलाफ उल्लंघनों को रोकने और समाप्त करने के महत्व को पहचानने में मदद की है।'
उन्होंने कहा कि इस दिशा में हम महासचिव के विशेष प्रतिनिधि के कार्यालय के काम की बहुत सराहना करते हैं। हालांकि, सशस्त्र संघर्षों के बदलते परिदृश्य और बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों को देखते हुए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि इस चुनौती पर केवल उस सरकार द्वारा दृढ़ कार्रवाई करके ही काबू पाया जा सकता है, जिसके क्षेत्र में ऐसी संस्थाएं संचालित होती हैं।