COP 29: 'पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के लिए मजबूत न्यायिक तंत्र जरूरी', भारत के NGT अध्यक्ष ने रखी महत्वपूर्ण बात
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के 29वें सम्मेलन (कॉप-29) में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण नियंत्रण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पर्यावरण कानूनों को लागू करने में न्यायपालिका महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के 29वें सम्मेलन (कॉप-29) में भारत ने कहा कि सरकारों और उद्योगों को पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के लिए जवाबदेह बनाने के लिए मजबूत न्यायिक तंत्र की जरूरत है।
बाकू में आयोजित सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव ने किया। अपने संबोधन में जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा कि वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण नियंत्रण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पर्यावरण कानूनों को लागू करने में न्यायपालिका महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौतों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय न्यायालयों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचों के बीच मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया। बता दें कि बाकू में शुक्रवार को न्यायपालिका की भूमिका पर कई अन्य देशों से आए प्रतिनिधियों ने भी श्रीवास्तव का समर्थन किया।
शंघाई, टोक्यो, न्यूयॉर्क ह्यूस्टन में सबसे अधिक ग्रीन हाउस गैसें
एआई के नए आंकड़ों के अनुसार, एशिया व अमेरिका के शहर जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देने वाली सबसे अधिक गर्मी उत्सर्जित करने वाली ग्रीन हाउस गैस फैला रहे हैं, जिसमें शंघाई सबसे अधिक प्रदूषणकारी है। पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति अल गोर ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में कहा, ये प्रांत 1 अरब मीट्रिक टन से अधिक ग्रीनहाउस गैसें उगलते हैं। इनमें शंघाई, टोक्यो, न्यूयॉर्क, ह्यूस्टन शामिल हैं।
भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी
डब्ल्यूएचओ की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि भारत में लगभग हर व्यक्ति पर अब जलवायु परिवर्तन का असर पड़ा रहा है और देश में स्वास्थ्य, लैंगिक एवं आर्थिक स्थिरता पर इसके प्रभावों से निपटने के लिए अंतर-मंत्रालयी व अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन संबंधी स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा महिलाओं-बच्चों पर अधिक है। स्वामीनाथन ने बाकू में कॉप-29 सम्मेलन से इतर कहा, इस असर में अत्यधिक गर्मी से लेकर ‘वेक्टर’ जनित बीमारियां शामिल हैं।
भारतीय जलवायु नीति में महिला-समर्थक रणनीति का अभाव
भारत की राष्ट्रीय जलवायु नीति में समेकित, लैंगिक समानता पर आधारित वित्त रणनीति का अब भी अभाव है जो जलवायु परिवर्तन से निपटने संबंधी प्रयासों में नेताओं के रूप में महिलाओं को व्यापक समर्थन देती है। नई रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन से निपटने को लेकर भारत की प्रतिक्रिया खंडित बनी हुई है।
- कॉप-29 में प्रस्तुत ‘ग्लोबल काउंसिल’ द्वारा समर्थित अनुसंधान और सार्वजनिक नीति परामर्श कंपनी ‘चेज इंडिया’ की रिपोर्ट इस अंतर को रेखांकित करती है तथा महिलाओं को निष्क्रिय लाभार्थियों पर ध्यान केंद्रित करती है।
जलवायु वार्ता में सुधार जरूरी
जलवायु विशेषज्ञों और पूर्व नेताओं के एक समूह ने कहा है कि वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता (कॉप-29) अब उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं है और इसमें सुधार की आवश्यकता है। शिखर सम्मेलन के बीच में यह एक विवादास्पद लेकिन अहम पत्र प्रकाशित किया गया है। उधर, वार्ता में कुछ लोग रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी युद्धों को वार्ताकारों का कामकाज जटिल बनाते हुए देख रहे हैं। यह चिंतनीय है। वार्ताकारों ने माना कि अब तक हुई वार्ताओं में काफी कम प्रगति दिखाई दे रही है। इस दिशा में अभी काफी काम करना जरूरी है।