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Donald Trump: इंडिया कॉकस के प्रमुख माइक वाल्ज होंगे ट्रंप के सुरक्षा सलाहकार, भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा
Tue, 12 Nov 2024 09:43 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 12 Nov 2024 09:43 AM IST
सार
ट्रंप ने सोमवार को एलान किया कि फ्लोरिडा से सांसद और अमेरिकी संसद में इंडिया कॉकस के प्रमुख माइक वाल्ज उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होंगे।
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माइक वाल्ज
- फोटो : एक्स/ माइक वाल्ज
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विस्तार
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आगामी प्रशासन के लिए एक अहम नियुक्ति की है, जो भारत के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकती है। दरअसल ट्रंप ने अमेरिकी संसद में इंडिया कॉकस के प्रमुख माइक वाल्ज को अपना नया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाने का फैसला किया है। ट्रंप ने सोमवार को एलान किया कि फ्लोरिडा से सांसद और अमेरिकी संसद में इंडिया कॉकस के प्रमुख माइक वाल्ज उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होंगे।
बाइडन की विदेश नीति के रहे हैं कट्टर आलोचक
50 वर्षीय माइक वाल्ट्ज एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं। माइक वाल्ज अमेरिकी सेना के विशेष बल ग्रीन बेरेट में काम कर चुके हैं। माइक वाल्ज साल 2019 में अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए थे। माइक वाल्ज को राष्ट्रपति बाइडन की विदेश नीति का कट्टर आलोचक माना जाता है। माइक वाल्ज हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी, हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी और हाउस इंटेलीजेंस कमेटी में भी बतौर सदस्य काम कर चुके हैं।
वाल्ज यूरोपीय देशों और अमेरिका से यूक्रेन का और मजबूती से समर्थन करने के समर्थक रहे हैं, लेकिन साल 2021 में अफगानिस्तान से जिस तरह से अमेरिकी सेना की वापसी हुई, उसकी वाल्ज ने तीखी आलोचना की थी। वाल्ज ने डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति का समर्थन किया, जिसमें ट्रंप ने नाटो देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने को कहा था। रिपब्लिकन पार्टी ने चीन को लेकर जो टास्क फोर्स बनाई हुई है, उसमें भी माइक वाल्ज शामिल हैं।
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भारत को मिल सकता है फायदा
माइक वाल्ज अमेरिकी संसद में इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष हैं। यह अमेरिकी संसद में किसी देश पर केंद्रित सबसे बड़ा समूह है। इंडिया कॉकस एक द्विदलीय समूह है। इसमें वर्तमान में सीनेट के 40 सदस्य शामिल हैं। वाल्ज का भारत के प्रति रुख नरम रहा है। ऐसे में अमेरिका की हिंद प्रशांत महासागर को लेकर बनने वाली रणनीति में भारत की भूमिका अहम हो सकती है। वाल्ज भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने और चीन का मुकाबला करने के मामले में मजबूत रणनीति बनाने के समर्थक रहे हैं। वह अनुभवी विदेश नीति विशेषज्ञ हैं। उन्हें अमेरिका-भारत गठबंधन का प्रबल समर्थक माना जाता है। उन्होंने भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने की वकालत की है। उनका कहना है कि अमेरिका और भारत को रक्षा व सुरक्षा सहयोग के मामले में आगे बढ़ना चाहिए।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले सूजी विलेस को व्हाइट हाउस का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त कर चुके हैं। इस पद पर नियुक्त होने वाली सूजी विलेस पहली महिला हैं। साथ ही ट्रंप ने स्टीफन मिलर को अपना वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया है। अब ट्रंप ने माइक वाल्ज को अपना राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाने का एलान किया है।
मार्को रूबियो हो सकते हैं अमेरिका के नए विदेश मंत्री
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में विदेश मंत्रालय की कमान फ्लोरिडा से सीनेटर मार्को रूबियो को मिल सकती है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, मार्को रूबियो का नाम अभी आधिकारिक तौर पर तय नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप उनके नाम पर सहमत हैं। मार्को रूबियो क्यूबा मूल के अमेरिकी नागरिक हैं और वे साल 2016 में ट्रंप के साथ रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के दावेदारों में शामिल थे। साल 2024 में ट्रंप के उपराष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवारों में भी मार्को रूबियो का नाम शामिल था।
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बाइडन की विदेश नीति के रहे हैं कट्टर आलोचक
50 वर्षीय माइक वाल्ट्ज एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं। माइक वाल्ज अमेरिकी सेना के विशेष बल ग्रीन बेरेट में काम कर चुके हैं। माइक वाल्ज साल 2019 में अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए थे। माइक वाल्ज को राष्ट्रपति बाइडन की विदेश नीति का कट्टर आलोचक माना जाता है। माइक वाल्ज हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी, हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी और हाउस इंटेलीजेंस कमेटी में भी बतौर सदस्य काम कर चुके हैं।
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वाल्ज यूरोपीय देशों और अमेरिका से यूक्रेन का और मजबूती से समर्थन करने के समर्थक रहे हैं, लेकिन साल 2021 में अफगानिस्तान से जिस तरह से अमेरिकी सेना की वापसी हुई, उसकी वाल्ज ने तीखी आलोचना की थी। वाल्ज ने डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति का समर्थन किया, जिसमें ट्रंप ने नाटो देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने को कहा था। रिपब्लिकन पार्टी ने चीन को लेकर जो टास्क फोर्स बनाई हुई है, उसमें भी माइक वाल्ज शामिल हैं।
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भारत को मिल सकता है फायदा
माइक वाल्ज अमेरिकी संसद में इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष हैं। यह अमेरिकी संसद में किसी देश पर केंद्रित सबसे बड़ा समूह है। इंडिया कॉकस एक द्विदलीय समूह है। इसमें वर्तमान में सीनेट के 40 सदस्य शामिल हैं। वाल्ज का भारत के प्रति रुख नरम रहा है। ऐसे में अमेरिका की हिंद प्रशांत महासागर को लेकर बनने वाली रणनीति में भारत की भूमिका अहम हो सकती है। वाल्ज भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने और चीन का मुकाबला करने के मामले में मजबूत रणनीति बनाने के समर्थक रहे हैं। वह अनुभवी विदेश नीति विशेषज्ञ हैं। उन्हें अमेरिका-भारत गठबंधन का प्रबल समर्थक माना जाता है। उन्होंने भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने की वकालत की है। उनका कहना है कि अमेरिका और भारत को रक्षा व सुरक्षा सहयोग के मामले में आगे बढ़ना चाहिए।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले सूजी विलेस को व्हाइट हाउस का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त कर चुके हैं। इस पद पर नियुक्त होने वाली सूजी विलेस पहली महिला हैं। साथ ही ट्रंप ने स्टीफन मिलर को अपना वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया है। अब ट्रंप ने माइक वाल्ज को अपना राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाने का एलान किया है।
मार्को रूबियो हो सकते हैं अमेरिका के नए विदेश मंत्री
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में विदेश मंत्रालय की कमान फ्लोरिडा से सीनेटर मार्को रूबियो को मिल सकती है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, मार्को रूबियो का नाम अभी आधिकारिक तौर पर तय नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप उनके नाम पर सहमत हैं। मार्को रूबियो क्यूबा मूल के अमेरिकी नागरिक हैं और वे साल 2016 में ट्रंप के साथ रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के दावेदारों में शामिल थे। साल 2024 में ट्रंप के उपराष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवारों में भी मार्को रूबियो का नाम शामिल था।
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