फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   'India can be better mediator than Pakistan,' says Special Envoy Fleur Hassan-Nahoum

West Asia: 'पश्चिम एशिया संकट में भारत बन सकता है बेहतर मध्यस्थ', इस्राइली दूत ने PAK की भूमिका पर उठाए सवाल

Tue, 31 Mar 2026 03:52 AM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरूशलम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरूशलम Published by: Pavan Updated Tue, 31 Mar 2026 03:52 AM IST
सार

West Asia Conflict: पश्चिम एशिया संघर्ष में मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश भले ही पाकिस्तान जोर-शोर कर रहा है। लेकिन उसके दावों की हवा निकलती दिख रही है। दरअसल, इस संघर्ष में शामिल इस्राइल का साफ कहना है कि आतंकवाद से जूझ रहा पाकिस्तान इसमें सफल नहीं होगा और भारत उससे बेहतर मध्यस्थ बन सकता है।

विज्ञापन
'India can be better mediator than Pakistan,' says Special Envoy Fleur Hassan-Nahoum
फ्लेउर हसन-नहूम, इस्राइली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब दूसरे महीने में पहुंच चुका है और इसी बीच इस्राइल के विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लेर हसन-नहूम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष शुरू से ही एक 'मल्टी-फ्रंट यानी कई मोर्चों वाला क्षेत्रीय युद्ध' बन गया था और इस्राइल ने इसमें सैन्य रूप से काफी बढ़त हासिल की है। यरुशलम से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि 7 अक्तूबर को दक्षिण से हमास ने हमला किया, जिसे उन्होंने ईरान का समर्थन प्राप्त संगठन बताया। इसके अगले ही दिन उत्तर दिशा से भी हमला हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि इस्राइल को एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना पड़ रहा है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - US-Iran War: 'पर्दे के पीछे अमेरिका-ईरान की बातचीत जारी', व्हाइट हाउस का बड़ा दावा; फिर भी तेहरान को चेताया
विज्ञापन


'भारत पाकिस्तान से बेहतर मध्यस्थ हो सकता है'
पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद की समस्या से जूझ रहा है और वह इस मामले में ज्यादा सफल नहीं होगा। वहीं भारत की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के सभी देशों के साथ अच्छे संबंध हैं और वह पाकिस्तान से बेहतर मध्यस्थ साबित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ईरान की जिद के कारण नहीं हुआ समझौता- नहूम
अमेरिका की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा बातचीत का मौका दिया है, लेकिन ईरान की जिद के कारण समझौता नहीं हो पाया। उन्होंने इस रणनीति को सही बताते हुए कहा कि एक तरफ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहिए और दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई जारी रखनी चाहिए।


'इस्राइल ने विरोधी ताकतों को किया कमजोर'
फ्लेर हसन-नहूम ने दावा किया कि पिछले एक महीने में इस्राइल ने विरोधी ताकतों को काफी कमजोर कर दिया है। उनके मुताबिक, ईरान से जुड़े रॉकेट लॉन्च सिस्टम का करीब 80% हिस्सा नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोधी पक्ष की नौसेना और शीर्ष सैन्य व राजनीतिक नेतृत्व को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के अंदर अस्थिरता और अव्यवस्था का भी दावा किया, जहां नेतृत्व में दरारें और भगदड़ जैसी स्थिति बताई जा रही है।

यह भी पढ़ें - West Asia Crisis: 'किसी और की जंग में मत कूदो', खाड़ी देशों को रूस की सख्त चेतावनी; US-इस्राइल पर साधा निशाना

'ईरान को परमाणु हथियार रखने की नहीं मिल सकती अनुमति'
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी हालत में ऐसे देश को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जो खुले तौर पर विनाश की बात करता हो।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed