पश्चिम एशिया तनाव का भारतीय नाविकों पर कितना असर: फारस की खाड़ी में अब तक 11 की गई जान, कितने सुरक्षित लौटे?
पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी इलाके में हुए संघर्षों में 11 भारतीय नाविकों की जान चली गई है। यह जानकारी शिपिंग सेक्रेटरी विजय कुमार ने गुरुवार को दी।
शिपिंग सेक्रेटरी विजय कुमार ने क्या बताया?
यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि भारत सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य इलाके से 4,200 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी इलाके में जहाजों पर मिसाइल हमले बढ़ गए हैं। इस युद्ध की शुरुआत तब हुई थी जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला किया था, जिसमें देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडर मारे गए थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है खास?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है क्योंकि यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। दुनिया के तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यह लगभग 30 मील चौड़ा है और ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इस मार्ग से होकर हर दिन दर्जनों टैंकर गुजरते हैं, जिनका संचालन एक सुव्यवस्थित ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (TSS) के जरिए किया जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
रणनीतिक रूप से देखें तो इस जलडमरूमध्य के आठ प्रमुख द्वीपों में से सात पर ईरान का नियंत्रण है, जिससे उसे क्षेत्रीय नौवहन पर निगरानी और प्रभाव का लाभ मिलता है। अबू मूसा, ग्रेटर टुंब और लेसर टुंब जैसे द्वीपों पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच वर्षों से विवाद चला आ रहा है। इसके अलावा, ईरान ने चाबहार, बंदर अब्बास और बुशहर जैसे तटीय इलाकों में नौसैनिक अड्डे स्थापित कर इस मार्ग में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत किया है।