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विशेषज्ञों का आरोप: खाद्य संकट पर जरूरी कदम उठाने में नाकाम रहे जी-7 देश

Wed, 29 Jun 2022 04:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एलमाउ
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एलमाउ Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 29 Jun 2022 04:04 PM IST
सार

जी-7 देशों ने यूक्रेन को कई तरह की मदद देने का इरादा जताया है। इनमें वित्तीय, मानवीय, सैनिक और राजनयिक सहायता शामिल है। रूस की सैनिक और आर्थिक क्षमता को कैसे भोथरा बनाया जाए, इस बारे में भी इन धनी देशों ने खास रणनीति पर विचार किया...

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G7 Summit: G7 countries expressed intention to provide financial, humanitarian, military and diplomatic assistance to Ukraine
G7 शिखर सम्मेलन 2022 में G7 नेता - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

सात धनी देशों के समूह जी-7 की यहां मंगलवार को पूरी हुई शिखर बैठक पर यूक्रेन युद्ध, दुनिया भर में बढ़ी महंगाई, और चीन को लेकर उनकी चिंता का साया लगातार बना रहा। ये बात शिखर बैठक के बाद जारी हुए लंबे साझा बयान से भी सामने आई। लेकिन खाद्य संकट से दुनिया को राहत दिलाने के लिए जी-7 देशों ने जो घोषणा की, उसे विशेषज्ञों ने नाकाफी बताया है।

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अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने यहां तीन दिन तक दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने की साझा रणनीति पर विचार किया। इस बार जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, और सेनेगल को भी आमंत्रित किया गया था। इन चारों देशों के साथ मिल कर जी-7 देशों ने एक अलग वक्तव्य जारी किया, जिसमें लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा का संकल्प व्यक्त किया गया।

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34 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार

जी-7 देशों ने यूक्रेन को कई तरह की मदद देने का इरादा जताया है। इनमें वित्तीय, मानवीय, सैनिक और राजनयिक सहायता शामिल है। रूस की सैनिक और आर्थिक क्षमता को कैसे भोथरा बनाया जाए, इस बारे में भी इन धनी देशों ने खास रणनीति पर विचार किया।

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रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर में फैल रहा खाद्य और ईंधन संकट यहां इकट्ठा हुए नेताओं की खास चिंता का विषय रहा। खाद्य संकट से निपटने के लिए जी-7 ने ग्लोबल एलायंस फॉर फूड सिक्योरिटी को 4.5 बिलियन डॉलर की मदद देने का वादा किया है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) ने इस वादे का स्वागत किया है। लेकिन यह साफ है कि उसकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं। जी-7 शिखर बैठक से पहले डब्लूएफपी ने जी-7 नेताओं से आग्रह किया था कि वे इस वर्ष के लिए 22.2 बिलियन डॉलर की सहायता दें। डब्ल्यूएफपी ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि 45 देशों में लगभग पांच करोड़ लोग अकाल के कगार पर हैं, जबकि दुनिया में साढ़े 34 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हो गए हैं।

जी-7 के 'नाकाफी' एलान की आलोचना

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खाद्य सुरक्षा मुहैया कराने के लिए जी-7 के 'नाकाफी' एलान की आलोचना की है। गैर-सरकारी संस्था ऑक्सफेम के विषमता नीति विभाग के प्रमुख मैक्स लॉसन ने कहा है- ‘इस समय की पीढ़ी भूख की सबसे गंभीर समस्या का सामना कर रही है। उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि जो जरूरत है, उसके मुताबिक कदम उठाने में जी-7 देश नाकाम रहे हैं। नतीजतन, करोड़ों लोग भयानक भूख और भुखमरी का शिकार हो जाएंगे।’



यूक्रेन दुनिया में गेहूं, सूरजमुखी तेल और मक्के के सबसे निर्यातकों में एक है। लेकिन वहां युद्ध जारी रहने के कारण ये सारा निर्यात ठहरा हुआ है। जी-7 देशों ने युद्ध के कारण काला सागर के रास्ते होने वाले परिवहन में खड़ी हुई अड़चन को खत्म कराने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन से अनाज का निर्यात फिर शुरू कराने के लिए जरूरी कदम वे उठाएंगे। लेकिन युद्ध के जारी रहते ऐसा कैसे होगा, इसका कोई रोडमैप उन्होंने नहीं बताया है।

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