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जर्मनी में विदेश मंत्री : जयशंकर बोले- चालबाज चीन बार-बार भारत को पेश कर रहा चुनौती, बेहद कठिन दौर में हैं द्विपक्षीय संबंध

Sun, 20 Feb 2022 12:55 AM IST
Jeet Kumar एएनआई, जर्मनी
एएनआई, जर्मनी Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 20 Feb 2022 12:55 AM IST
सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि वास्तविक सीमा रेखा पर सैनिक तैनात करने को लेकर हुए समझौतों का उल्लंघन चीन ने किया है। गलवां घाटी में हुआ संघर्ष इसका एक उदाहरण है। ऐसे में साफ है कि चीन के साथ भारत के संबंध अभी बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं।

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External Affairs Minister S Jaishankar said in Munich Germany that We are having a problem with China
एस जयशंकर - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को एक बार फिर चीन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चीन समझौतों का उल्लंघन कर सीमा पर बार-बार भारत के लिए चुनौती पेश कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सीमा के मौजूदा हालातों पर यह संबंध पर निर्भर करेंगे।

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म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे विदेश मंत्री ने यहां आयोजित एक पैनल चर्चा के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने भारत-चीन सीमा तनाव पर वैश्विक मंच के समक्ष अपनी बात रखते हुए गलवान घाटी में हुए संघर्ष की याद भी दिलाई। 
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बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं संबंध
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि समस्या यह है कि 45 साल तक सीमा पर शांति रही, सीमा प्रबंधन स्थिर था, 1975 से सीमा पर कोई जवान हताहत नहीं हुआ था। परंतु अब यह बदल गया है। चीन के साथ वास्तविक सीमा रेखा पर कम से कम सैन्य बलों की तैनाती को लेकर भारत ने समझौते किए थे। लेकिन चीन ने उन समझौतों का उल्लंघन किया। साफ है चीन के साथ हमारे संबंध बहुत कठिन दौर में हैं।
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जयशंकर यहां भारत-चीन सीमा तनाव और पश्चिम की ओर भारत के रुख में निर्णायक बदलाव को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंध बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं और जून 2020 से पहले भी पश्चिम के साथ संबंध काफी अच्छे थे, इसलिए जहां तक पश्चिम के साथ अच्छे संबंधों का संबंध है, तो इसके पीछे वह कोई कारण नहीं और ना ही उसने इन्हें प्रभावत किया है।

उल्लेखनीय है कि जून 2020 में गलवान घाटी में चीन ने वास्तविक सीमा रेखा का उल्लंघन करते हुए भारतीय सैनिकों पर हमला बोला था। इस हिंसक झड़प में कई सैनिकों ने अपनी जान गवां दी थी। हालांकि कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन के ज्यादा सैनिकों की मौत हुई। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ गया था। गलवान संघर्ष के बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ता भी हुई, लेकिन अभी तक इसका उचित हल नहीं निकला है।

दुनिया बहुत अधिक एक-दूसरे पर आश्रित
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (एमएससी) 2022 में पैनल चर्चा के दौरान इंडो-पैसिफिक की केंद्रीयता को रेखांकित करते हुए जयशंकर ने यहां कहा कि आज की दुनिया 'बहुत अधिक अन्योन्याश्रित, अंतर-भेदक और प्रकृति में विरोधाभासी' है, जहां एक देश को हितों के एक बड़े टकराव के बावजूद दूसरे के साथ व्यापार करना पड़ता है।

विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की क्षमताएं और प्रभाव बढ़ा है। जयशंकर ने जर्मनी की अपनी यात्रा के दौरान यूरोप, एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों के मंत्रियों के साथ कई बैठकें कीं। अब वह शुक्रवार को एक सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने के लिए जर्मनी के म्यूनिख पहुंचे थे।

आसियान के साथ हमारे संबंध अच्छे 
विदेश मंत्री एस जयशंकर इस दौरान कहा कि आसियान देशों के साथ हमारे संबंध अच्छी तरह से आगे बढ़ रहे हैं। दो बड़े बदलाव हो रहे हैं। आसियान के साथ हमारा सुरक्षा सहयोग बहुत मजबूत है... सिंगापुर, इंडोनेशिया और वियतनाम के साथ हमारे मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं।

जयशंकर ने जर्मनी और आयरलैंड के मंत्रियों से की मुलाकात
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सम्मेलन से इतर जर्मनी के आर्थिक सहयोग और विकास मंत्री स्वेंजा शुल्ज से मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट किया कि हमने विकास साझेदारी दृष्टिकोण पर चर्चा की। हम हरित विकास और स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक प्रतिबद्धता साझा करते हैं। इसके अलावा विदेश मंत्री जयशंकर ने म्यूनिख में आयरलैंड के अपने समकक्ष साइमन कोवेनी से भी मुलाकात की। उन्होंने इस संबंध में भी एक ट्वीट में लिखा कि हमने यूएनएससी में साथ मिलकर काम किया है। आयरलैंड हमारे ईयू से जुड़ाव में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
Munich
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