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USA: जन्मसिद्ध नागरिकता को खत्म करने की ट्रंप की कोशिश को झटका, अमेरिकी अदालत ने बताया असंवैधानिक; लगाई रोक
Thu, 24 Jul 2025 07:14 AM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Thu, 24 Jul 2025 07:14 AM IST
सार
अमेरिकी अपीलीय अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को असंवैधानिक करार दिया है, जिसमें अवैध प्रवासियों के बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता देने से इनकार किया गया था। अदालत ने कहा कि संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति नागरिक है। ट्रंप का आदेश फिलहाल निलंबित रहेगा और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका लगा है। एक संघीय अपीलीय अदालत ने बुधवार को ट्रंप के उस आदेश को असंवैधानिक करार दिया, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले अवैध या अस्थायी प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता देने की व्यवस्था खत्म की जानी थी। 9वीं अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स के तीन जजों की पीठ ने इस फैसले की पुष्टि की और कहा कि ट्रंप का आदेश संविधान का उल्लंघन करता है।
सीएटल के जिला न्यायाधीश जॉन सी. कॉगनॉर की ओर से पहले ही इस आदेश पर रोक लगाई गई थी। अब अपील अदालत ने भी इसे बरकरार रखा है। बहुमत वाले फैसले में कहा गया कि निचली अदालत ने ठीक ही कहा कि राष्ट्रपति का आदेश अमेरिकी संविधान के खिलाफ है। हम इससे पूरी तरह सहमत हैं। अदालत ने यह भी कहा कि संविधान की अनदेखी केवल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं की जा सकती।
संविधान का 14वां संशोधन बना आधार
इस मामले में संविधान के 14वें संशोधन की 'सिटिजनशिप क्लॉज' का उल्लेख हुआ, जो कहता है कि अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिकता पाए व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होते हैं। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि 'यू.एस. जुरिस्डिक्शन' की परिभाषा का मतलब सिर्फ अमेरिका में जन्म लेना नहीं है, बल्कि माता-पिता की कानूनी स्थिति भी मायने रखती है।
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ये भी पढ़ें- यूक्रेन को 322 मिलियन डॉलर के हथियार देगा अमेरिका; जेलेंस्की ने पुतिन को दिया बातचीत का प्रस्ताव
अलग-अलग परिभाषा से अराजकता फैलेगी- अदालत
वॉशिंगटन, एरिजोना, इलिनॉय और ओरेगन राज्यों ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि अगर अमेरिका के कुछ हिस्सों में जन्मसिद्ध नागरिकता मान्य रहे और बाकी हिस्सों में नहीं, तो कानूनी अराजकता फैल जाएगी। अदालत ने इस दलील को मानते हुए देशभर में ट्रंप के आदेश को लागू करने से रोक लगाने के फैसले को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति बुमाटाय का असहमति भरा निर्णय
इस मामले में ट्रंप द्वारा नियुक्त न्यायाधीश पैट्रिक बुमाटाय ने बहुमत से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि राज्यों के पास इस मामले में कानूनी आधार नहीं है कि वे मुकदमा कर सकें। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि ट्रंप का आदेश संविधान के अनुकूल है या नहीं।
ये भी पढ़ें- जलवायु संकट पर संयुक्त राष्ट्र सख्त, अंतरराष्ट्रीय अदालत ने कहा- इसे नजरअंदाज करना होगा कानून का उल्लंघन
अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकता है
इस फैसले के बाद अब ट्रंप प्रशासन या उनके समर्थक इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। लेकिन फिलहाल ट्रंप का आदेश निलंबित रहेगा और जन्मसिद्ध नागरिकता का अमेरिकी प्रावधान पहले की तरह प्रभावी बना रहेगा। इस मुद्दे पर अमेरिका में पहले ही नौ मुकदमे दर्ज हैं।
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सीएटल के जिला न्यायाधीश जॉन सी. कॉगनॉर की ओर से पहले ही इस आदेश पर रोक लगाई गई थी। अब अपील अदालत ने भी इसे बरकरार रखा है। बहुमत वाले फैसले में कहा गया कि निचली अदालत ने ठीक ही कहा कि राष्ट्रपति का आदेश अमेरिकी संविधान के खिलाफ है। हम इससे पूरी तरह सहमत हैं। अदालत ने यह भी कहा कि संविधान की अनदेखी केवल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं की जा सकती।
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संविधान का 14वां संशोधन बना आधार
इस मामले में संविधान के 14वें संशोधन की 'सिटिजनशिप क्लॉज' का उल्लेख हुआ, जो कहता है कि अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिकता पाए व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होते हैं। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि 'यू.एस. जुरिस्डिक्शन' की परिभाषा का मतलब सिर्फ अमेरिका में जन्म लेना नहीं है, बल्कि माता-पिता की कानूनी स्थिति भी मायने रखती है।
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अलग-अलग परिभाषा से अराजकता फैलेगी- अदालत
वॉशिंगटन, एरिजोना, इलिनॉय और ओरेगन राज्यों ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि अगर अमेरिका के कुछ हिस्सों में जन्मसिद्ध नागरिकता मान्य रहे और बाकी हिस्सों में नहीं, तो कानूनी अराजकता फैल जाएगी। अदालत ने इस दलील को मानते हुए देशभर में ट्रंप के आदेश को लागू करने से रोक लगाने के फैसले को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति बुमाटाय का असहमति भरा निर्णय
इस मामले में ट्रंप द्वारा नियुक्त न्यायाधीश पैट्रिक बुमाटाय ने बहुमत से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि राज्यों के पास इस मामले में कानूनी आधार नहीं है कि वे मुकदमा कर सकें। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि ट्रंप का आदेश संविधान के अनुकूल है या नहीं।
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अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकता है
इस फैसले के बाद अब ट्रंप प्रशासन या उनके समर्थक इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। लेकिन फिलहाल ट्रंप का आदेश निलंबित रहेगा और जन्मसिद्ध नागरिकता का अमेरिकी प्रावधान पहले की तरह प्रभावी बना रहेगा। इस मुद्दे पर अमेरिका में पहले ही नौ मुकदमे दर्ज हैं।
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