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नेपाल जलप्रलय: 188 किमी की रफ्तार...7 मिनट में ही 22 किमी क्षेत्र को तबाह कर गया सैलाब; विशेषज्ञ क्या बोले?
Mon, 31 Aug 2026 10:00 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडो।
अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडो।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 31 Aug 2026 10:00 AM IST
सार
नेपाल जलप्रलय का आलम ये रहा कि 188 किमी की रफ्तार से महज 7 मिनट में ही 22 किमी क्षेत्र तबाह हो गया। जलवायु विशेषज्ञ के विश्लेषण के बाद नए खुलासे हुए हैं।
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नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नेपाल महाविनाश लाने वाला सैलाब करीब 188 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आया था। नेपाल के समयानुसार सुबह 8:37 बजे लेन्दे नदी के स्रोत के ऊपरी हिस्से में बर्फ, चट्टान और मलबे के साथ भूस्खलन हुआ। इसके करीब सात मिनट बाद सैलाब केरुंग पहुंच गया। स्रोत से केरुंग की दूरी करीब 22 किलोमीटर मानी गई है।
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इस तरह, पहाड़ से सुनामी की शक्ल में उतरा सैलाब 22 किमी की दूरी केवल सात मिनट में तय कर ली थी। इसी वजह से इसकी तुलना बुलेट ट्रेन की रफ्तार से की जा रही है। जलवायु विशेषज्ञ डॉ. उत्तम बाबू श्रेष्ठ के एक सोशल मीडिया विश्लेषण में सैलाब की रफ्तार को लेकर यह चौंकाने वाला दावा किया गया है। श्रेष्ठ ने अपने प्रारंभिक विश्लेषण में भूस्खलन के आकार और मलबे के नीचे गिरने की दूरी को आधार बनाकर इसकी गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा करीब 51 किलोटन के बराबर होने का अनुमान भी साझा किया है।
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इसी आधार पर कुछ जगहों पर इसकी तुलना हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से की जा रही है। चीनी शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि नेपाल के लांगटांग लिरुंग पर्वत के पास लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई से बुधवार सुबह एक बड़ा हिमखंड खाई में गिर गया।
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इसके बाद यह अपने साथ मिट्टी और चट्टानों का मलबा बहाकर ले गया। चीनी वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बाढ़ ने लगभग 7 मिनट में 22 किलोमीटर की दूरी तय की और नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी तक पहुंच गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि लगभग 1,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सीमा क्षेत्र तक पहुंचते-पहुंचते बाढ़ की गति लगभग 50 मीटर प्रति सेकंड हो गई थी।
फिर से पहले जैसा घर बनाएंगे
विनाशकारी बाढ़ ने हरे-भरे इलाकों को विरान बना दिया है। पहले जहां सबकुछ था, वहां अब केवल बर्बादी की निशानियां ही शेष रह गई हैं। ऐसे ही स्थानों में से एक है बागमती प्रांत के धाडिंग जिले के गलछी क्षेत्र, जहां के लोग बाढ़ से बचने के लिए सुरक्षित जगहों पर भाग गए थे। वे अब धीरे-धीरे अपने घरों को लौट रहे हैं और बचे-खुचे सामान से दोबारा जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिशों में जुटे हैं। लोग घरों में भरे कीचड़ और रेत निकाल रहे हैं। कक्षा 11 के छात्र नयन तिवारी और उनकी चचेरी बहन निवी तिवारी ने कहा कि वे मेहनत करेंगे और अपने घरों को फिर से पहले जैसा बनाएंगे।
बैरियर झील खाली, खतरा टला
चीन ने बताया कि ग्लेशियर टूटने के बाद ग्यिरोंग क्षेत्र में बनी बैरियर झील खाली हो गई है। इससे बड़े सैलाब का खतरा टल गया है। हालांकि नेपाल की छोछेन खोला नदी में करीब 14 लाख घन मीटर पानी अब भी जमा है।
चीन में 23 देशों के 261 नागरिक लापता, इनमें 49 भारतीय... चीन ने पहली बार जानकारी दी कि तिब्बत क्षेत्र में चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट पर हुए बाढ़-भूस्खलन में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक लापता हैं। इनमें 104 नेपाली, 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं।
डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख सुरक्षित लौटे
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व प्रमुख जी. सतीश रेड्डी और उनके साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गया 31 सदस्यीय दल बहुत भाग्यशाली रहा। नेपाल में आपदा से ठीक पहले उनका दल प्रभावित इलाके को पार कर गया था।