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प. एशिया में फिर गहराया संकट: यूएई ने किया ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा, अमेरिका हमलों से भड़का तेहरान
Mon, 31 Aug 2026 02:30 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, दुबई
पीटीआई, दुबई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 31 Aug 2026 02:30 PM IST
सार
अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव का असर खाड़ी क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। यूएई ने अपने समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर रहे एक ईरानी ड्रोन को नष्ट करने की जानकारी दी है। यह कार्रवाई अमेरिकी बलों द्वारा ईरान के लारक द्वीप के पास सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद हुई। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिन्हें जॉर्डन ने रोकने का दावा किया।
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पश्चिम एशिया संघर्ष
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
संयुक्त अरब अमीरात की वायुसेना ने सोमवार को अपने समुद्री क्षेत्र के ऊपर एक ईरानी ड्रोन को रोक दिया। रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी। यह घटना सप्ताहांत में अमेरिका की ओर से लारक द्वीप किए गए सैन्य हमले और ईरान के पलटवार के बाद सामने आई है। एक महीने में दोनों देशों के बीच यह पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई थी। रक्षा मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि ईरान की ओर से उसके जलक्षेत्र में आते हुए पाए गए एक ईरानी ड्रोन से नष्ट किया गया।
ईरान की ओर से तत्काल इस घटना की जिम्मेदारी लेने का कोई दावा नहीं किया गया और न ही किसी नुकसान की सूचना मिली। बाद में यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक और बयान जारी कर ईरानी मीडिया में आई उस खबर को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि दुबई स्थित अल मेनहाद एयर बेस को ईरानी मिसाइलों ने निशाना बनाया।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने किया पलटवार
यह घटना रविवार को अमेरिकी बलों द्वारा ईरान के एक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाए जाने के बाद हुई। इससे छह महीने से अधिक समय से जारी युद्ध में कुछ समय से चली आ रही शांति टूट गई। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिन्हें रोक लिया गया।
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ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार तड़के कहा कि ईरान वैध रक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा और किसी भी सैन्य आक्रमण का निर्णायक जवाब देगा। शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ किर्गिस्तान रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता। वह संघर्ष का बातचीत के जरिए समाधान करने के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने कहा, "लेकिन हम हमलावरों को निर्णायक जवाब देंगे।"
पुतिन से मिलेंगे पेजेशकियन
शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में ऐसे देशों का समूह शामिल है, जिसे अमेरिकी वैश्विक प्रभाव के मुकाबले एक ताकत के रूप में देखा जाता है। इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। पेजेशकियन की मंगलवार को सम्मेलन से इतर पुतिन से मुलाकात होनी थी।
जी20 देशों के वित्त मंत्रियों संग स्कॉट बेसेंट की बैठक
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट सोमवार और मंगलवार को उत्तरी कैरोलिना में जी20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने वाले थे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका दूसरे देशों पर ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में मदद करने का दबाव बना रहा है, ताकि उसके नेताओं से युद्ध समाप्त करने के लिए रियायतें हासिल की जा सकें।
पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका का ध्यान ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने पर था। हालांकि, रविवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना के अनुसार, उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के बलों को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों से लैस रॉकेट दागने की तैयारी करते हुए देखा था।
खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान का हमला
ईरान के अर्ध-सरकारी समाचार माध्यमों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में लारक द्वीप के पास विस्फोटों की आवाज सुनाई देने की खबर दी। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि इस घटना में लोग हताहत हुए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने ईरान के इस दावे को खारिज किया कि हालिया अमेरिकी हमले आक्रामक कार्रवाई थे। उन्होंने इसे सीमित और सटीक कार्रवाई बताया और कहा कि निशाना समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने वाले बल थे।
बाद में ईरानी सरकारी टेलीविजन ने अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के दृश्य दिखाए। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ मिसाइलों को रोक लिया। खुले तौर पर संघर्ष फिर शुरू होना क्षेत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से 28 फरवरी को ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।
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ईरान की ओर से तत्काल इस घटना की जिम्मेदारी लेने का कोई दावा नहीं किया गया और न ही किसी नुकसान की सूचना मिली। बाद में यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक और बयान जारी कर ईरानी मीडिया में आई उस खबर को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि दुबई स्थित अल मेनहाद एयर बेस को ईरानी मिसाइलों ने निशाना बनाया।
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अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने किया पलटवार
यह घटना रविवार को अमेरिकी बलों द्वारा ईरान के एक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाए जाने के बाद हुई। इससे छह महीने से अधिक समय से जारी युद्ध में कुछ समय से चली आ रही शांति टूट गई। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिन्हें रोक लिया गया।
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ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार तड़के कहा कि ईरान वैध रक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा और किसी भी सैन्य आक्रमण का निर्णायक जवाब देगा। शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ किर्गिस्तान रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता। वह संघर्ष का बातचीत के जरिए समाधान करने के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने कहा, "लेकिन हम हमलावरों को निर्णायक जवाब देंगे।"
पुतिन से मिलेंगे पेजेशकियन
शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में ऐसे देशों का समूह शामिल है, जिसे अमेरिकी वैश्विक प्रभाव के मुकाबले एक ताकत के रूप में देखा जाता है। इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। पेजेशकियन की मंगलवार को सम्मेलन से इतर पुतिन से मुलाकात होनी थी।
जी20 देशों के वित्त मंत्रियों संग स्कॉट बेसेंट की बैठक
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट सोमवार और मंगलवार को उत्तरी कैरोलिना में जी20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने वाले थे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका दूसरे देशों पर ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में मदद करने का दबाव बना रहा है, ताकि उसके नेताओं से युद्ध समाप्त करने के लिए रियायतें हासिल की जा सकें।
पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका का ध्यान ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने पर था। हालांकि, रविवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना के अनुसार, उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के बलों को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों से लैस रॉकेट दागने की तैयारी करते हुए देखा था।
खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान का हमला
ईरान के अर्ध-सरकारी समाचार माध्यमों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में लारक द्वीप के पास विस्फोटों की आवाज सुनाई देने की खबर दी। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि इस घटना में लोग हताहत हुए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने ईरान के इस दावे को खारिज किया कि हालिया अमेरिकी हमले आक्रामक कार्रवाई थे। उन्होंने इसे सीमित और सटीक कार्रवाई बताया और कहा कि निशाना समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने वाले बल थे।
बाद में ईरानी सरकारी टेलीविजन ने अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के दृश्य दिखाए। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ मिसाइलों को रोक लिया। खुले तौर पर संघर्ष फिर शुरू होना क्षेत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से 28 फरवरी को ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।