कोरोना वायरस: जर्मनी से हम ले सकते हैं ये सीख, जानें क्या है भारत की स्थिति
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भारत में कोरोना वायरस अबतक 1251 लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है जबकि 32 लोगों की मौत हो गई है। दुनिया की बात करें तो अमेरिका, इटली और स्पेन की हालत बहुत खराब है। अमेरिका वायरस का नया केंद्र बनता जा रहा है। इसी बीच जर्मनी में 30 मार्च तक संक्रमितों की संख्या 63,000 पहुंच गई थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जर्मनी महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक है।
हालांकि देश में इस वायरस के कारण केवल 560 लोगों की मौत हुई है। यानी जर्मनी में मृत्यु दर सिर्फ 0.9 प्रतिशत है। जिससे यह जर्मनी को दुनिया में सबसे कम मृत्यु दर वाला देश बना देता है। इटली में पॉजिटिव मामलों में से 11 प्रतिशत की मौत चुकी है। वहीं अमेरिका की बात करें तो यहां मृत्यु दर 1.8 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों के अनुसार जर्मनी में मृत्यु दर इसलिए कम है क्योंकि वहां बहुत सारे लोगों का परीक्षण किया गया है। जर्मनी में उल्म विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट फॉर एपिडेमियोलॉजी के निदेशक डॉक्टर डायट्रिच रोथेनबैचर ने कहा, 'कुछ देशों में केवल लक्षण दिखाई देने वाले मामलों का परीक्षण किया जाता है (जैसे इटली) और अन्य (जैसे जर्मनी) में व्यापक परीक्षण रणनीति अपनाई जा रही है।'
भारत की बात करें तो यहां भी केवल उन लोगों का परीक्षण किया जा रहा है जिनमें वायरस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं या फिर जो संक्रमितों के संपर्क में आए हैं। जर्मनी वर्तमान में विश्व के सबसे अधिक पांच संक्रमित देशों में से एक है। मगर यहां व्यापक स्तर पर हुए परीक्षण की वजह से अपुष्ट मामलों की संख्या कम है।
15 मार्च तक जर्मनी केवल संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के पीछे था, जहां प्रति एक लाख लोगों के हिसाब से 2,023 का परीक्षण किया गया जो दुनिया में सबसे अधिक है। 20 मार्च को रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष लोथर विलेर ने कहा, 'जर्मनी के मुख्य सार्वजनिक स्वास्थ्य निकाय ने कहा कि हमारी प्रयोगशालाएं अब हर हफ्ते लगभग 160,000 परीक्षण करने में सक्षम हैं।' यह संख्या उनके द्वारा दो महीने में किए गए टेस्ट से ज्यादा है।
जनवरी में जर्मनी कोविड-19 के परीक्षण के लिए एक विश्वसनीय पद्धति विकसित करने वाले पहले देशों में से एक बन चुका था। चूंकि जर्मनी में स्वास्थ्य सेवा पर सरकार का नियंत्रण है इसलिए निजी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर उन परीक्षणों का उत्पादन करने के लिए तेजी से कदम उठाए।
जर्मनी में बने टेस्ट किट को डब्ल्यूएचओ ने कियाथा वितरित
फरवरी के अंत तक विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दुनिया भर में वितरित किए गए टेस्ट किट में से कम से कम 1.4 मिलियन का उत्पादन बर्लिन में स्थित एक जर्मन कंपनी द्वारा किया गया था। चूंकि जर्मनी ने महामारी के बढ़ते स्तर को देखते हुए परीक्षणों की संख्या बढ़ा दी थी इसलिए उसने शुरुआती मामलों का पता लगा लिया।
जर्मनी और इटली की जनसंख्या लगभग बराबर है लेकिन दोनों देशों में संक्रमण की चपेट में आने वाले लोगों की उम्र में अंतर है। जर्मनी में जहां सबसे ज्यादा संक्रमितों की उम्र 46 है वहीं इटली में 63 साल है। इसके अलावा जर्मनी में इंटेसिव केयर बेड की संख्या बहुत ज्यादा है।
2012 की एक रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी मे प्रति एक लाख व्यक्तियों की तुलना में 29.2 क्रिटिकल केयर बेड हैं। यह संख्या इटली की तुलना में दोगुनी है जहां प्रति एक लाख व्यक्तियों की तुलना में 12.5 क्रिटिकल केयर बेड हैं। वहीं अमेरिका में यह संख्या 34.2 है। जर्मनी में अभी केवल 70-80 प्रतिशत बेड पर मरीज हैं।
भारत की स्थिति
भारत में अभी केवल केरल ऐसा राज्य है जहां सबसे ज्यादा टेस्ट हुए हैं। जबकि अधिक आबादी वाले राज्यों उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्यप्रदेश और ओडिशा में बहुत कम लोगों का टेस्ट किया गया है। अभी हम बेशक दूसरे चरण में हैं लेकिन लोग अब भी सरकार के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों में हिस्सा ले रहे हैं। बेवजह घर से बाहर घूम रहे हैं। इतना है नहीं बिमारी के लक्षण दिखाई देने पर नजरअंदाज करते हुए लोगों से मिलकर उनकी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग संदिग्ध वायरस का मरीज बताए जाने पर अस्पताल से भाग रहे हैं। यदि लोग थोड़ी से जागरुक हो जाएं तो वायरस का प्रसार रुक जाएगा और स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा।