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China infant birth rate: चीन में गंभीर हो रही है शिशु जन्म दर गिरने की समस्या, आर्थिक अनिश्चितता है बड़ी वजह

Thu, 23 Mar 2023 01:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 23 Mar 2023 01:21 PM IST
सार

China infant birth rate: जानकारों के मुताबिक अब चीन में आबादी में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ने की समस्या खड़ी हो रही है, हालांकि वहां ऐसा एक अलग तरह की आर्थिक परिस्थितियों के बीच हो रहा है। जापान 1980 के दशक तक दुनिया के सबसे धनी देशों में शामिल हो चुका था। लेकिन चीन आज भी मध्यम आय वर्ग का देश है...

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China infant birth rate: falling infant birth rate is getting serious in China due to economic uncertainty
china infant birth rate - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन में आबादी घटने को लेकर चिंताएं गहराती जा रही हैं। चीन पिछले साल ही जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो गया, जहां आबादी में बुजुर्गों का अनुपात तेजी से बढ़ रहा है। ऐसा बच्चों और युवाओं का आबादी में अनुपात घटने के कारण हो रहा है। दक्षिण कोरिया में शिशु जन्म दर दुनिया के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है। सिंगापुर, थाईलैंड और ताइवान भी आबादी घटने की समस्या का सामना कर रहे हैं। वियतनाम और फिलीपीन्स जैसे देशों में आबादी की वृद्धि दर गिर गई है। लेकिन चीन की समस्या अलग किस्म की है।

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जनसंख्या विशेषज्ञों के मुताबिक अगर किसी देश में बुजुर्गों का अनुपात उसकी समृद्धि के दौर में बढ़े, तब इसे समस्या नहीं माना जाता। उस स्थिति में बुजुर्ग आरामदायक अवस्था में रियाटरमेंट के बाद की उम्र गुजारने की स्थिति में होते हैं। लेकिन जापान में ऐसा तब हुआ, जब वह अपनी समृद्धि के शिखर से उतरने लगा था। जापान 1980 के दशक में अपनी समृद्धि के चरम पर पहुंचा था।

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ऑस्ट्रेलिया में सिडनी यूनिवर्सिटी स्थित चाइना स्टडीज सेंटर में एसोसिएट प्रोफेसर लॉरेन जॉनस्टन वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘जापान धनी होने के बाद के दौर में बुजुर्गों का देश बना। दूसरे विश्व युद्ध के बाद वहां जन्मी पीढ़ी ने सबसे समृद्ध जीवन गुजारा था।’ जानकारों के मुताबिक अब चीन में आबादी में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ने की समस्या खड़ी हो रही है, हालांकि वहां ऐसा एक अलग तरह की आर्थिक परिस्थितियों के बीच हो रहा है। जापान 1980 के दशक तक दुनिया के सबसे धनी देशों में शामिल हो चुका था। लेकिन चीन आज भी मध्यम आय वर्ग का देश है। इस बीच वहां आबादी में कामकाजी उम्र वाले लोगों की संख्या घटती जा रही है। इसका चीन की अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी असर हो सकता है।

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चीन के विश्लेषक भी देश में लगातार गिर रही जन्म दर पर चिंता जता रहे हैं। 2022 में चीन में प्रति महिला जन्म सिर्फ 1.1 दर्ज हुई, जबकि 2.1 से इस दर के नीचे आने को चिंता की बात समझा जाता है। चाइना पॉपुलेशन एसोसिएशन के अध्य़क्ष झाई झेनवू ने पिछले वर्ष एक चीनी अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था- ‘1.3 या उससे नीचे की जन्म दर हमारे हित में नहीं है। हमारी राय है कि अगर जन्म दर 1.5 से 1.6 तक रखी जा सके, तो हमारी अर्थव्यवस्था और समाज के विकास के लिए वह अधिक अनुकूल होगी।’

शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज की भविष्यवाणी है कि साल 2100 में चीन की आबादी सिर्फ 58 करोड़ 70 लाख रह जाएगी। यानी आज की तुलना में वहां आधी से भी कम आबादी ही रहेगी। इसका यह अर्थ भी होगा कि कामकाजी उम्र के हर 100 व्यक्ति पर 120 बुजुर्ग लोग होंगे, जिनकी देखभाल की जरूरत पड़ेगी।

बताया जाता है कि देश में मौजूद आर्थिक अनिश्चय का माहौल जन्म दर में आ रही गिरावट का एक प्रमुख कारण है। परिवार के पालन-पोषण के महंगा होने के कारण कम संख्या में लोग विवाह कर रहे हैं या कम बच्चे पैदा कर रहे हैं। यह पहलू 2016 में ही सामने आ गया था, जब पिकिंग यूनिवर्सिटी के एक सर्वे से सामने आया कि 1980 के बाद जन्मीं महिलाओं के बीच शिशु जन्म दर 1.2 रह गई है।

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