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Canada: छात्रों के प्रदर्शन के बीच विदेश मंत्रालय ने खारिज किया भारतीय छात्रों का निर्वासन का आरोप; कही यह बात
Sat, 18 May 2024 08:58 AM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा झा
Updated Sat, 18 May 2024 08:58 AM IST
सार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए कनाडा गए हैं। लेकिन हमने निर्वासन का सामना कर रहे कई छात्रों को नहीं देखा। एक मामला यहां या एक मामला वहां हो सकता है। उन्होंने व्यापक निर्वासन के दावों का खंडन पूरी तरह से खंडन किया।
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विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जयसवाल
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
आखिरकार विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कनाडा से भारतीय छात्रों के निर्वासन के आरोपों का जवाब दिया। प्रवक्ता ने कहा कि हमने ऐसा नहीं देखा कि कई छात्र निर्वासन का सामना कर रहे हों। हो सकता है कि एक मामला कहीं तो दूसरा मामला कहीं और हो।
9 मई को सरकारी भवनों के आसपास सैकड़ों भारतीय छात्र आव्रजन नीतियों में अचानक बदलाव के बाए एकत्र हुए। छात्र इन नीतियों से असंतुष्ट हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि इन संशोधन के कारण पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद वर्क परमिट देने से इंकार कर दिया गया है। इस कारण से उनके निवास की स्थिति खतरे में पड़ गई। छात्रों ने बड़े पैमाने पर इन नीतियों के खिलाफ में कनाडा के प्रिंस एडवर्ड आइलैंड में विरोध प्रदर्शन किया।
इसके बाद से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए कनाडा गए हैं। लेकिन हमने बड़ी संख्या में निर्वासन का सामना करने वाले छात्रों को नहीं देखा। हो सकता है एक मामला यहां, एक मामला वहां हो सकता है। लेकिन कनाडा में छात्रों के साथ कोई बड़ी समस्या नजर नहीं आ रही।
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बता दें एक वीडियो में भारतीय छात्रों के बड़े समूहों को चार्लोटाउन की सड़कों पर मार्च करते हुए देखा है। छात्रों ने विरोध के साथ धमकी भी दी है कि अगर मई के मध्य तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे भूख हड़ताल करेंगे, साथ ही विरोध प्रदर्शन भी अब बड़ी संख्या में करेंगे।
क्या है संशोधित आप्रवासन नीति ?
पिछले जुलाई में, पीईआई ने स्नातकोत्तर कार्य परमिट को सीमित करन के लिए कानून बनाया। यह केवल निर्माण, गृह-निर्माण और स्वास्थ्य देखभाल में योग्यता वाले छात्रों के लिए ही परमिट किया गया। इस अहम बदलाव के कारण अन्य उद्योगों में लगे कई छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया। इस कारण से उनके परमिट की समाप्ति की तिथि करीब आ गई। इसके अलावा पीईआई सरकार द्वारा 2024 में प्रांतीय नामांकित कार्यक्रम (पीएनपी) के माध्यम से स्थायी निवास के लिए नामांकित व्यक्तियों की संख्या को 25 प्रतिशत तक कम करने के निर्णय ने छात्रों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके बाद एक प्रदर्शनकारी ने टूटे हुए वादों पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने हमें बुलाया, हमें झूठी उम्मीदें दी। और अब वो चाहते हैं कि हम चले जाएं। यह तो पूरी तरह हमारा शोषण है। हमें गलत जानकारी दी जा रही है।
क्या है भारतीय छात्रों की मांग ?
प्रदर्शनकारी छात्रों ने वर्क परमिट के विस्तार और हालिया आव्रजन नीति परिवर्तनों की समीक्षा की मांग की है। वे आव्रजन प्रणाली में स्थिरता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना चाहते हैं। अपनी पिछली परिस्थितियों के आधार पर नए नियमों में छूट चाहते हैं।
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9 मई को सरकारी भवनों के आसपास सैकड़ों भारतीय छात्र आव्रजन नीतियों में अचानक बदलाव के बाए एकत्र हुए। छात्र इन नीतियों से असंतुष्ट हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि इन संशोधन के कारण पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद वर्क परमिट देने से इंकार कर दिया गया है। इस कारण से उनके निवास की स्थिति खतरे में पड़ गई। छात्रों ने बड़े पैमाने पर इन नीतियों के खिलाफ में कनाडा के प्रिंस एडवर्ड आइलैंड में विरोध प्रदर्शन किया।
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इसके बाद से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए कनाडा गए हैं। लेकिन हमने बड़ी संख्या में निर्वासन का सामना करने वाले छात्रों को नहीं देखा। हो सकता है एक मामला यहां, एक मामला वहां हो सकता है। लेकिन कनाडा में छात्रों के साथ कोई बड़ी समस्या नजर नहीं आ रही।
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बता दें एक वीडियो में भारतीय छात्रों के बड़े समूहों को चार्लोटाउन की सड़कों पर मार्च करते हुए देखा है। छात्रों ने विरोध के साथ धमकी भी दी है कि अगर मई के मध्य तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे भूख हड़ताल करेंगे, साथ ही विरोध प्रदर्शन भी अब बड़ी संख्या में करेंगे।
क्या है संशोधित आप्रवासन नीति ?
पिछले जुलाई में, पीईआई ने स्नातकोत्तर कार्य परमिट को सीमित करन के लिए कानून बनाया। यह केवल निर्माण, गृह-निर्माण और स्वास्थ्य देखभाल में योग्यता वाले छात्रों के लिए ही परमिट किया गया। इस अहम बदलाव के कारण अन्य उद्योगों में लगे कई छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया। इस कारण से उनके परमिट की समाप्ति की तिथि करीब आ गई। इसके अलावा पीईआई सरकार द्वारा 2024 में प्रांतीय नामांकित कार्यक्रम (पीएनपी) के माध्यम से स्थायी निवास के लिए नामांकित व्यक्तियों की संख्या को 25 प्रतिशत तक कम करने के निर्णय ने छात्रों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके बाद एक प्रदर्शनकारी ने टूटे हुए वादों पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने हमें बुलाया, हमें झूठी उम्मीदें दी। और अब वो चाहते हैं कि हम चले जाएं। यह तो पूरी तरह हमारा शोषण है। हमें गलत जानकारी दी जा रही है।
क्या है भारतीय छात्रों की मांग ?
प्रदर्शनकारी छात्रों ने वर्क परमिट के विस्तार और हालिया आव्रजन नीति परिवर्तनों की समीक्षा की मांग की है। वे आव्रजन प्रणाली में स्थिरता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना चाहते हैं। अपनी पिछली परिस्थितियों के आधार पर नए नियमों में छूट चाहते हैं।