Blinken China visit: अमेरिका और चीन में संवाद बना, लेकिन बात ज्यादा आगे नहीं बढ़ी
ब्लिंकन की रविवार को यहां चीन के विदेश मंत्री चिन गांग से बातचीत हुई थी। सोमवार को उनकी यहां चीन के टॉप डिप्लोमेट वांग यी और फिर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात हुई। इन सभी मुलाकातों के बाद दोनों देशों की तरफ से कहा कि दोनों पक्षों में ‘दो टूक, गहराई से और रचनात्मक’ वार्ता हुई...
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की दो दिन चीन यात्रा का ठोस नतीजा यही रहा कि दोनों देश आधिकारिक और गैर-आधिकारिक दोनों स्तरों पर बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए। पर्यवेक्षकों के मुताबिक लगातार बढ़ रहे टकराव के बीच दोनों देशों का बातचीत जारी रखने का फैसला सकारात्मक है। पिछले फरवरी में अमेरिका में चीनी गुब्बारे का मुद्दा गरमाने के बाद ब्लिंकन ने एकतरफा ढंग से अपनी चीन यात्रा रद्द कर दी थी। तब से दोनों देशों के बीच संवाद टूटा हुआ था।
ब्लिंकन की रविवार को यहां चीन के विदेश मंत्री चिन गांग से बातचीत हुई थी। सोमवार को उनकी यहां चीन के टॉप डिप्लोमेट वांग यी और फिर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात हुई। इन सभी मुलाकातों के बाद दोनों देशों की तरफ से कहा कि दोनों पक्षों में ‘दो टूक, गहराई से और रचनात्मक’ वार्ता हुई।
हाल का समय दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर संपर्क टूटने या कमजोर पड़ने का रहा है। लेकिन अब इस पर सहमति बनी है कि दोनों देश एक दूसरे के लिए विमान उड़ानों की संख्या बढ़ाएंगे। साथ ही वे समाज विज्ञान, शैक्षिक और एकेडमिक क्षेत्रों में आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेंगे। वांग यी ने ब्लिंकन से मुलाकात के दौरान कहा कि अमेरिका को ‘चीनी खतरे’ को लेकर शोर मचाना बंद करना चाहिए और चीन पर एकतरफा प्रतिबंध लगाने की नीति छोड़नी चाहिए। साथ ही उसे चीन के अंदरूनी मामलों में दखल देना बंद कर देना चाहिए।
चीन की वेबसाइट डिफेंस टाइम्स पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन मांगों को ब्लिंकन ने अस्वीकार कर दिया। इसका उल्लेख करते हुए चीन के टीकाकारों ने कहा है कि अमेरिका टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन पर प्रतिबंध लगाना या ताइवान के मामले में दखल देना छोड़ेगा, इसकी संभावना नहीं है। इसलिए अमेरिका से चीन के संबंध में सुधार का एकमात्र क्षेत्र जनता के स्तर पर संपर्क बढ़ाने का रह जाता है।
पिछले साल सितंबर में इंडोनेशिया के बाली में हुई जी-20 बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और शी जिनपिंग के बीच शिखर वार्ता हुई थी। तब बाइडन ने आश्वासन दिया था कि अमेरिक चीन के साथ शीत युदध शुरू करना नहीं चाहता, ना ही वह चीन की राजनीतिक व्यवस्था को बदलना चाहता है। बाइडन ने कहा था कि अमेरिका ताइवान की आजादी का समर्थन नहीं करता। ब्लिंकन ने अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान इन आश्वासनों को दोहराया। लेकिन चीनी टीकाकारों ने कहा है कि बाइडन प्रशासन ने अपने राष्ट्रपति के वादे के मुताबिक आचरण नहीं किया। इसीलिए अब संदेह जताया गया है कि ब्लिंकन के आश्वासनों से भी सूरत बदलेगी।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन की तरफ से अमेरिकी विदेश मंत्री को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अगर अमेरिका ने ताइवान के मसले में ज्यादा दखल नहीं दिया, तो बाकी क्षेत्रों में चल रही होड़ के बावजूद हालात को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। चीनी अधिकारियों ने दो टूक कहा है कि ताइवान उनके लिए मुख्य मुद्दा है और ताइवान की आजादी की किसी कोशिश को वे स्वीकार नहीं करेंगे।