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रोहिंग्या संकट हल नहीं हुआ तो आतंकवाद का खतरा : बांग्लादेश
Tue, 15 Sep 2020 01:30 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 15 Sep 2020 01:30 AM IST
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रोहिंग्या कैंप
- फोटो : Facebook
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बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके मोमन ने कहा है कि म्यांमार को रोहिंग्या संकट का हल निकालने के लिए भारत समेत सभी मित्र देशों के गैर-सैन्य नागरिक पर्यवेक्षकों के साथ वार्ता करना चाहिए। उन्होंने चेताया कि यदि मानवीय समस्या को हल करने में नाकामी हाथ लगी तो आगे चलकर कट्टरपंथ और आतंकवाद के रूप में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर खतरा मंडरा सकता है।
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दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के क्षेत्रीय फोरम की 27वीं आसियान एसोसिएशन की वर्चुअल मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए मोमन ने कहा, रोहिंग्या मुख्य रूप से उनकी मातृभूमि (म्यांमार) नहीं लौट रहे हैं क्योंकि वे सुरक्षा के मुद्दों पर वहां की सरकार का भरोसा नहीं करते हैं।
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ऐसे में बांग्लादेश ने अपनी अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और सामाजिक प्रभाव के लिए खतरे के बावजूद मानवीय आधार पर म्यांमार में सताए करीब 11 लाख लोगों को आश्रय दिया है। मोमन ने कहा, यदि समस्या हल नहीं हुई और आतंकवाद बढ़ा तो हालात बिगड़ सकते हैं।
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चूंकि आतंकवादियों की कोई सीमा और ईमान नहीं होती है, इसलिए क्षेत्र में अनिश्चित माहौल बनने की आशंका है, जो शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर क्षेत्र की हमारी उम्मीदों को धूमिल कर सकती है।
सहमति के बाद भी शरणार्थियों की वापसी नहीं
विदेश मंत्री एके मोमेन ने कहा, बांग्लादेश ने अब तक म्यांमार के साथ रोहिंग्या प्रत्यावर्तन के लिए तीन समझौते किए हैं और म्यांमार भी शरणार्थियों की वापसी और उनके स्वैच्छिक प्रत्यावर्तन पर सहमत हुआ। लेकिन आज तक कोई भी शरणार्थी अपने देश म्यांमार में वापस नहीं गया और अनुकूल माहौल बनाने के बजाय, म्यांमार के रखाइन प्रांत में लड़ाई और गोलाबारी चल रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।