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बांग्लादेश: इस इस्लामिक देश में शराबखोरी बढ़ाने की तैयारी में सरकार, नए नियमों से अल्कोहल कंपनियों में उत्साह
Sat, 07 May 2022 03:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 07 May 2022 03:15 PM IST
सार
बांग्लादेश में अल्कोहल संबंधी पुराने नियम 100 साल से भी ज्यादा समय से लागू थे। उनके तहत शराब बिक्री पर कड़ा नियंत्रण था। इस कारण बहुत कम रेस्त्रां और बार को शराब बेचने की इजाजत मिलती थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
बांग्लादेश में शराबखोरी बढ़ने वाली है। बांग्लादेश सरकार ने बीते फरवरी में अल्कोहल संबंधी नियमों में एक बड़े बदलाव को मंजूरी दी थी। तब से ही शराब निर्माता कंपनियां उत्साहित हैँ। बांग्लादेश दुनिया के उन देशों में है, जहां शराब की औसत खपत सबसे कम है। लेकिन जल्द ही ये स्थिति बदल सकती है।
बांग्लादेश में शराब बनाने वाली सरकारी कंपनी कैरेव एंड कंपनी (बांग्लादेश) ने फरवरी में ही अपना उत्पादन बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी थी। नियम में बदलाव के जरिए अधिक संख्या बार खोलने और रेस्टॉरेन्ट्स को शराब बेचने की इजाजत देने का प्रावधान किया गया है। कैरेव एंड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद मोशर्रफ हुसैन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘हम जरूरत के मुताबिक सप्लाई करने के लिए तैयार हैं। हमें उम्मीद है कि हमारी बिक्री में बड़ा इजाफा होगा।’
बांग्लादेश में अल्कोहल संबंधी पुराने नियम 100 साल से भी ज्यादा समय से लागू थे। उनके तहत शराब बिक्री पर कड़ा नियंत्रण था। इस कारण बहुत कम रेस्त्रां और बार को शराब बेचने की इजाजत मिलती थी।
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बांग्लादेश की लगभग सवा 16 करोड़ आबादी में 90 फीसदी मुसलमान हैं। ज्यादातर मुसलमान धार्मिक कारणों से आम तौर पर शराब से दूर रहते हैं। बांग्लादेश में पहले के नियम के मुताबिक सिर्फ उन्हीं मुसलमानों को शराब पीने की इजाजत थी, जिन्हें डॉक्टर ने सेहत संबंधी कारणों से ऐसा करने की सलाह दी हो।
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति अल्कोहल की खपत सिर्फ 0.02 लीटर सालाना रही है। जबकि दक्षिण कोरिया में ये खपत 9.7 लीटर है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक नए नियमों के मुताबिक भी सबको- जब चाहे शराब पीने की इजाजत नहीं होगी। फिर भी पुराने नियमों से जुड़ी कुछ भ्रामक पहलुओं को अब दूर कर दिया गया है। इससे बहुत से बार और रेस्तरां कानूनी रूप से शराब बेच सकेंगे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक देश में विदेशियो के बढ़ रहे आगमन को देखते हुए नियमों को बदला गया है। देश में चल रही इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में काम करने के लिए और पर्यटक के रूप में आने वाले विदेशियों की संख्या हाल के वर्षों में काफी बढ़ी है। सरकार पर्यटन को और बढ़ावा देना चाहती है, ताकि देश के लोगों की आदमनी बढ़े।
ढाका स्थित एक रेस्त्रां के मैनेजर सिकंदर अली ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘अगर लाइसेंस हासिल करना आसान हुआ और लोगों की आदमनी बढ़ी, तो शराब की बिक्री में इजाफा तय है।’ जानकारों के मुताबिक अब तक भले कानूनी तौर पर शराब की बिक्री नियंत्रित रही है, लेकिन देश में गैर कानूनी शराब का बड़ा धंधा चलता रहा है। एक अनुमान के मुताबिक गैर कानूनी शराब का सालाना धंधा 19 करोड़ डॉलर का है। विशेषज्ञों के मुताबिक बांग्लादेश सरकार का अब मकसद अवैध शराब के धंधे पर चोट करना है। शराब बिक्री वैध होने पर सरकार की टैक्स आमदनी बढ़ेगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी बांग्लादेश में 85 हजार से अधिक लोगों के पास शराब पीने का लाइसेंस है। इनमें ज्यादातर विदेशी और गैर मुसलमान हैं। अब संभावना जताई जा रही है कि लाइसेंस पाने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या भी बढ़ेगी।
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बांग्लादेश में शराब बनाने वाली सरकारी कंपनी कैरेव एंड कंपनी (बांग्लादेश) ने फरवरी में ही अपना उत्पादन बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी थी। नियम में बदलाव के जरिए अधिक संख्या बार खोलने और रेस्टॉरेन्ट्स को शराब बेचने की इजाजत देने का प्रावधान किया गया है। कैरेव एंड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद मोशर्रफ हुसैन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘हम जरूरत के मुताबिक सप्लाई करने के लिए तैयार हैं। हमें उम्मीद है कि हमारी बिक्री में बड़ा इजाफा होगा।’
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बांग्लादेश में अल्कोहल संबंधी पुराने नियम 100 साल से भी ज्यादा समय से लागू थे। उनके तहत शराब बिक्री पर कड़ा नियंत्रण था। इस कारण बहुत कम रेस्त्रां और बार को शराब बेचने की इजाजत मिलती थी।
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बांग्लादेश की लगभग सवा 16 करोड़ आबादी में 90 फीसदी मुसलमान हैं। ज्यादातर मुसलमान धार्मिक कारणों से आम तौर पर शराब से दूर रहते हैं। बांग्लादेश में पहले के नियम के मुताबिक सिर्फ उन्हीं मुसलमानों को शराब पीने की इजाजत थी, जिन्हें डॉक्टर ने सेहत संबंधी कारणों से ऐसा करने की सलाह दी हो।
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति अल्कोहल की खपत सिर्फ 0.02 लीटर सालाना रही है। जबकि दक्षिण कोरिया में ये खपत 9.7 लीटर है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक नए नियमों के मुताबिक भी सबको- जब चाहे शराब पीने की इजाजत नहीं होगी। फिर भी पुराने नियमों से जुड़ी कुछ भ्रामक पहलुओं को अब दूर कर दिया गया है। इससे बहुत से बार और रेस्तरां कानूनी रूप से शराब बेच सकेंगे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक देश में विदेशियो के बढ़ रहे आगमन को देखते हुए नियमों को बदला गया है। देश में चल रही इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में काम करने के लिए और पर्यटक के रूप में आने वाले विदेशियों की संख्या हाल के वर्षों में काफी बढ़ी है। सरकार पर्यटन को और बढ़ावा देना चाहती है, ताकि देश के लोगों की आदमनी बढ़े।
ढाका स्थित एक रेस्त्रां के मैनेजर सिकंदर अली ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘अगर लाइसेंस हासिल करना आसान हुआ और लोगों की आदमनी बढ़ी, तो शराब की बिक्री में इजाफा तय है।’ जानकारों के मुताबिक अब तक भले कानूनी तौर पर शराब की बिक्री नियंत्रित रही है, लेकिन देश में गैर कानूनी शराब का बड़ा धंधा चलता रहा है। एक अनुमान के मुताबिक गैर कानूनी शराब का सालाना धंधा 19 करोड़ डॉलर का है। विशेषज्ञों के मुताबिक बांग्लादेश सरकार का अब मकसद अवैध शराब के धंधे पर चोट करना है। शराब बिक्री वैध होने पर सरकार की टैक्स आमदनी बढ़ेगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी बांग्लादेश में 85 हजार से अधिक लोगों के पास शराब पीने का लाइसेंस है। इनमें ज्यादातर विदेशी और गैर मुसलमान हैं। अब संभावना जताई जा रही है कि लाइसेंस पाने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या भी बढ़ेगी।