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Bangladesh: 4-20 अगस्त के बीच सांप्रदायिक हिंसा की 2000 से अधिक घटनाएं, नौ की मौत हुई, अल्पसंख्यक समूह का दावा
Thu, 19 Sep 2024 06:37 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 19 Sep 2024 06:37 PM IST
सार
सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की जानकारी देते हुए निर्मल ने बताया कि इस हिंसा से 1705 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए। इनमें 157 परिवारों के घरों पर हमला हुआ था, या उन्हें लूटा गया या उनके घरों में तोड़फोड़ हुई थी।
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बांग्लादेश में हिंसा
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
बांग्लादेश के एक अल्पसंख्यक समूह ने दावा किया है कि शेख हसीना के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और उनके देश छोड़कर जाने के दौरान सांप्रदायिक हिंसा की दो हजार से ज्यादा घटनाएं हुईं। समूह का दावा है कि इस दौरान प्रार्थना की 69 जगहों को निशाना बनाया और उनमें तोड़फोड़ की गई।
बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई ओइक्या परिषद के उपाध्यक्ष निर्मल रोजारियो ने सांप्रदायिक हिंसा के इन मामले में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि देश में 4 अगस्त से 20 अगस्त के बीच तनाव के दौरान 76 में से 68 जिलों में सांप्रदायिक हिंसा के 2010 मामले सामने आए। इन घटनाओं में नौ लोगों मौत हुई।
सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की जानकारी देते हुए निर्मल ने बताया कि इस हिंसा से 1705 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए। इनमें 157 परिवारों के घरों पर हमला हुआ था, या उन्हें लूटा गया या उनके घरों में तोड़फोड़ हुई थी। कुछ लोगों के घरों में आग भी लगाई गई थी। इतना ही नहीं अल्पसंख्यकों की दुकानों और प्रतिष्ठानों में भी लूट, तोड़फोड़ और आगजनी की गई।
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निर्मल ने कहा कि यह परिवार अब मुश्किल हालात में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि खुलना संभाग में सांप्रदायिक हिंसा की सबसे ज्यादा घटनाएं देखी गईं। यहां चार महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ। प्रभावित हुए 1705 परिवारों में 34 स्थानीय समुदाय हैं और इनमें से कई परिवारों की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया।
इतना ही नहीं 69 प्रार्थनास्थलों पर हमला, तोड़फोड़, लूट और आगजनी की घटना हुई। निर्मल ने इस मामले में बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई ओइक्या परिषद के महासचिव राणा दासगुप्ता और अन्य नेताओं पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लेने की भी मांग की। साथ ही देश में जारी सांप्रदायिक हिंसा को रोकने और इसके जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने शनिवार को ढाका समेत पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और रैली निकालने का भी एलान किया।
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बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई ओइक्या परिषद के उपाध्यक्ष निर्मल रोजारियो ने सांप्रदायिक हिंसा के इन मामले में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि देश में 4 अगस्त से 20 अगस्त के बीच तनाव के दौरान 76 में से 68 जिलों में सांप्रदायिक हिंसा के 2010 मामले सामने आए। इन घटनाओं में नौ लोगों मौत हुई।
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सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की जानकारी देते हुए निर्मल ने बताया कि इस हिंसा से 1705 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए। इनमें 157 परिवारों के घरों पर हमला हुआ था, या उन्हें लूटा गया या उनके घरों में तोड़फोड़ हुई थी। कुछ लोगों के घरों में आग भी लगाई गई थी। इतना ही नहीं अल्पसंख्यकों की दुकानों और प्रतिष्ठानों में भी लूट, तोड़फोड़ और आगजनी की गई।
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निर्मल ने कहा कि यह परिवार अब मुश्किल हालात में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि खुलना संभाग में सांप्रदायिक हिंसा की सबसे ज्यादा घटनाएं देखी गईं। यहां चार महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ। प्रभावित हुए 1705 परिवारों में 34 स्थानीय समुदाय हैं और इनमें से कई परिवारों की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया।
इतना ही नहीं 69 प्रार्थनास्थलों पर हमला, तोड़फोड़, लूट और आगजनी की घटना हुई। निर्मल ने इस मामले में बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई ओइक्या परिषद के महासचिव राणा दासगुप्ता और अन्य नेताओं पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लेने की भी मांग की। साथ ही देश में जारी सांप्रदायिक हिंसा को रोकने और इसके जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने शनिवार को ढाका समेत पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और रैली निकालने का भी एलान किया।