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दूसरे इंसानी ग्रह की खोज: क्या इंसान एलियंस से मिलने के लिए हैं तैयार? पता लगाने के लिए नासा धर्मशास्त्रियों की ले रहा मदद

Wed, 29 Dec 2021 03:02 AM IST
Kuldeep Singh वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Kuldeep Singh Updated Wed, 29 Dec 2021 03:02 AM IST
सार

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप जल्द ही ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने के लिए काम करना शुरू कर देगा, जिसमें ग्रहों से लेकर सितारों तक नेबुला से लेकर आकाशगंगाओं और उससे आगे तक सभी ब्रह्मांडों का अवलोकन किया जाएगा। इस बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या इंसान एलियंस से मिलने के लिए तैयार हैं?

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Are humans ready to meet aliens? NASA is taking help of theologians to find out
James Webb Space Telescope - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पिछले हफ्ते क्रिसमस पर दुनिया की सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष दूरबीन जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को कक्षा में प्रक्षेपित किया था, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर क्षितिज की ओर अग्रसर हुई। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप जल्द ही ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने के लिए काम करना शुरू कर देगा, जिसमें ग्रहों से लेकर सितारों तक नेबुला से लेकर आकाशगंगाओं और उससे आगे तक सभी ब्रह्मांडों का अवलोकन किया जाएगा।

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काफी स्वाभाविक रूप से इसे एलियंस के जीवन के अस्तित्व के बारे में सभी बहस को निर्णायक रूप से निपटाने के तरीके के रूप में देखा जा रहा है। इस बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या इंसान एलियंस से मिलने के लिए तैयार हैं?
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नासा 24 धर्मशास्त्रियों की ले रहा है मदद
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, नासा ने पहले से ही इस अंतर को पाटने के लिए कदम उठाए हैं। नासा 24 धर्मशास्त्रियों की मदद ले रहा है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि दुनिया भर के विभिन्न धर्म के लोग एलियंस के संपर्क में कैसे आएंगे। 
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टाइम्स यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार, अभी एक धर्मशास्त्री यह समझने के लिए पहले से ही नासा के साथ काम कर रहे हैं कि अलौकिक लोगों की खोज लोगों को कैसे प्रभावित करेगी। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक ब्रिटिश धर्मशास्त्री रेव डॉ एंड्रयू डेविसन उन 24 धर्मशास्त्रियों में से एक हैं, जो सेंटर फॉर थियोलॉजिकल इंक्वायरी (सीटीआई) में नासा द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

धार्मिक परंपराएं एक महत्वपूर्ण विशेषता होगी कि मानवता कहीं और जीवन की ऐसी किसी भी पुष्टि के माध्यम से कैसे काम करेगी। इसके कारण, यह नासा के चल रहे उद्देश्य के हिस्से के रूप में 'खगोल विज्ञान के सामाजिक प्रभाव' पर काम करने के लिए, विभिन्न साझेदार संगठनों के साथ काम कर रहा है।

हालांकि अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है, नासा और अन्य ने जोर देकर कहा कि यह संभव और वास्तव में संभावित है कि पृथ्वी से परे जीवन मौजूद है। पिछले कुछ दशकों में खगोलविज्ञानी ने अलौकिक जीवन के बारे में सवालों के जवाब देने के लिए असंख्य सुरागों का खुलासा किया है।

वेब टेलीस्कोप इस खोज को छोटा और सरल बनाने में मदद कर सकता है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों द्वारा की गई टिप्पणियों के अंशों का हवाला देते हुए, कई ऑनलाइन प्लेटफार्म अब आश्वस्त हैं कि यह (कम से कम आंशिक रूप से) एक 'विदेशी डिटेक्टर' है।


नासा की वेबसाइट के एक अंश के अनुसार, "यह हमारे ब्रह्मांड के इतिहास में हर चरण का अध्ययन करेगा, जिसमें बिग बैंग के बाद पहली चमकदार चमक से लेकर, पृथ्वी जैसे ग्रहों पर जीवन का समर्थन करने में सक्षम सौर प्रणालियों के निर्माण से लेकर हमारे अपने सौर मंडल के विकास तक शामिल हैं।"

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