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Azam Khan taken into ED custody immediately upon his release from Rampur jail; he erupted in anger and gave th
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रामपुर जेल से रिहा होते ही ED की हिरासत में आजम खान, फूटा गुस्सा खूब सुनाया!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम
Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Sun, 01 Nov 2026 01:33 AM IST
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की जेल से रिहाई के कुछ ही मिनट बाद एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गईं। शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 की शाम रामपुर जिला जेल से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। दरअसल, आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैनकार्ड रखने से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की थी। इसके बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर शनिवार शाम दोनों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ। आजम खान और अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई की जानकारी मिलते ही ईडी की टीम पहले से ही जेल परिसर के बाहर पहुंच गई थी। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी तैनात किए गए थे।
जैसे ही आजम खान जेल के मुख्य द्वार से बाहर आए, ईडी की टीम ने उन्हें अपने साथ ले लिया। इस दौरान अधिकारियों और आजम खान के बीच कुछ देर तक तीखी बहस होने की भी खबर सामने आई। इसके बाद ईडी की टीम उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर वहां से रवाना हो गई। वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जेल से रिहाई मिल गई और वह अपने घर के लिए रवाना हो गए। रामपुर के एएसपी अनिल सिंह सिसोदिया के अनुसार, ईडी की टीम आजम खान को पूछताछ के लिए गाजियाबाद ले गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक अलग मामले में गिरफ्तार किया है और रविवार को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश करने की तैयारी थी।
जेल से बाहर निकलते समय आजम खान ने मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी और पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा, "अब कहने को बचा ही क्या है? मैं क्या कहूं? कानून का वजूद खत्म हो चुका है।" इसके बाद उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या यह एक मुसलमान होने की सजा है? हमारी गलती यह थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनाए। क्या यह हमारा गुनाह है?" उनका यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। आजम खान ने अपनी बातों के जरिए कार्रवाई को लेकर नाराजगी जाहिर की और इसे अपने विश्वविद्यालय तथा शिक्षा से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में देखा।
दरअसल, ईडी की जांच मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन को लेकर चल रही है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च की गई रकम और घोषित वित्तीय विवरणों के बीच अंतर है। ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि, एजेंसी के आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में होना बाकी है। इस पूरे घटनाक्रम ने आजम खान की रिहाई की खुशी को कुछ ही मिनटों में नई कानूनी चुनौती में बदल दिया। अब सबकी नजर गाजियाबाद की अदालत में होने वाली सुनवाई और ईडी की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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