अक्तूबर माह में दो ग्रहों का गोचर हो रहा है जबकि दो ग्रह वक्री होंगे। इस महीने सूर्य और शुक्र ग्रह अपनी-अपनी राशि में बदलाव करेंगे। वहीं बुध और मंगल ग्रह वक्री चाल चलेंगे। इन सभी ग्रहों की चाल में परिवर्तन का सभी राशियों पर शुभ-अशुभ प्रभाव डालेगा। आइए जानते हैं इस महीने कौन से ग्रह अपनी चाल में परिवर्तन करने जा रहे हैं।
अक्तूबर माह में इन ग्रहों का राशि परिवर्तन, जानें प्रभाव
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मंगल देव की वक्री चाल
मंगल ग्रह 4 अक्तूबर को मीन राशि में वक्री हो रहे हैं और 14 नवंबर को मार्गी होंगे। मीन राशि जल तत्व की राशि है और यह बृहस्पति द्वारा शासित है, बृहस्पति और मंगल आपस में मित्र हैं। मीन राशि अंतर्ज्ञान, भावनाओं और करुणा का प्रतिध्वनित करती है वहीं मंगल ग्रह कार्य, साहस और इच्छा शक्ति को दर्शाता है। जल तत्व की राशि में अग्नि तत्व प्रधान ग्रह मंगल के गोचर से भावनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। यदि भावनाओं पर नियंत्रण किया गया तो इससे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है।
बुध वक्री
बुध देव 3 अक्तूबर को वक्री चाल चलेंगे और फिर 3 नवंबर को मार्गी होंगे। बुध ग्रह की उल्टी चाल की अवधि 21 दिनों तक रहेगी। इस समय बुध तुला राशि में स्थित हैं। तुला शुक्र की राशि है जिनसे इनकी परस्पर मित्रता है अतः जिनकी जन्म कुंडलियों में बुध की स्थिति अच्छी है उनके लिए शुभफल ही प्राप्त होंगे किंतु अशुभ स्थिति में फल उतने अच्छे नहीं कहे जाएंगे। मिथुन एवं कन्या राशि के स्वामी बुध मीन राशि में नीच राशि के माने गए हैं जबकि कन्या राशि इनके लिए उच्चराशि है।
शुक्र का कन्या राशि में गोचर
शुक्र ग्रह 23 अक्तूबर को कन्या राशि में गोचर कर रहे हैं और 17 नवंबर तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद शुक्र कन्या से तुला राशि में स्थित रहेंगे। कन्या राशि में शुक्र नीच के होते हैं। शुक्र को नैसर्गिक भोग विलास व दाम्पत्य का कारक माना जाता है। फ़िल्म इंडस्ट्री, फ़ैशन, गीत-संगीत, ललित-कलाओं में शुक्र का प्रतिनिधित्व होता है। शुक्र का नीचराशिस्थ होना इन सभी क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों के लिए प्रतिकूल फलदायक रहेगा।
सूर्य का तुला राशि में गोचर
सूर्य ग्रह 17 अक्तूबर को तुला में प्रवेश कर रहे हैं जो 16 नवंबर तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद सूर्य वृश्चिक राशि में जाएंगे। तुला सूर्य की नीच राशि मानी जाती है। इस राशि में सूर्यदेव का फल अशुभ होता है। वैदिक ज्योतिष में पिता, नेतृत्व, इच्छा शक्ति, साहस, हड्डियों का प्रतिनिधित्व करने वाला सूर्य इस गोचर काल के दौरान अपनी नीच अवस्था में होगा। वैदिक ज्योतिष में मेष राशि में सूर्य उच्च का और तुला राशि में नीच का माना जाता है। सूर्य के इस राशि में आने से सूर्य से संबंधित चीजों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।