फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   With the help of Japan forest rises in Uttarakhand

जापान की मदद से उत्तराखंड में उगेगा जंगल

Fri, 02 Aug 2013 08:06 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Fri, 02 Aug 2013 08:06 PM IST
विज्ञापन
With the help of Japan forest rises in Uttarakhand

उत्तराखंड में आपदा से क्षतिग्रस्त हुए वनों में फिर से हरियाली की चार ओढ़ाने के लिए जापान आगे आया है। उत्तराखंड सरकार और जापान के विशेषज्ञों की देखरेख में फिर से वह जंगल हरे-भरे हो सकेंगे जो कि आपदा की भेंट चढ़ चुके हैं।

विज्ञापन


उत्तराखंड में जापान की मदद से उन वन पंचायतों में जंगल उगाया जाएगा, जहां पर आपदा के दौरान वनों की क्षति हुई है। जंगलात महकमे की ओर से प्रदेश के एक हजार ऐसे वन पंचायतों को चिह्नित किया गया है।
विज्ञापन


आठ साल में खर्च होंगे 655 करोड़ रुपये
इसको लेकर अगले आठ साल में 655 करोड़ रुपये की रकम खर्च की जाएगी। इसके जरिये स्थानीय लोगों को आजीविका से भी जोड़ा जाएगा, जिससे उनके पलायन को रोका जा सकें। जापान द्वारा अप्रैल 2014 से वित्तीय मदद देने का सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रदेश में 12 हजार वन पंचायतें है। इसमें से एक हजार उन वन पंचायतों का चयन किया गया है, जहां जंगलों की स्थिति दयनीय हो गई है। उन जंगलों को पुराने स्वरूप में लौटने के लिए जापान वित्तीय मदद देने को तैयार है।

शुक्रवार को मंथन करेगी जापानी टीम
इसको जंगलात महकमे की ओर से 655 करोड़ रुपये का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) किया गया है। इस डीपीआर का जापान की टीम के सामने शुक्रवार को मंथन सभागार में प्रजेंटेशन दिया गया। इस डीपीआर को लेकर जापान की टीम मौके पर अगले तीन माह तक चेक करेगी।

इसके बाद जो भी संशोधन होगा, उसे दिसंबर तक में ठीक किया जाएगा। मार्च 2013 तक जापान, केंद्र और उत्तराखंड सरकार के बीच एमओयू हो जाएगा। उत्तराखंड जंगलात महकमे की ओर से 655 करोड़ के अलावा 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की गई है।

यह रकम उत्तराखंड में आपदा के दौरान उक्त वन पंचायतों में खर्च की जाएगी। जंगल उगाने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों की मदद से एक हजार वन पंचायतों के ग्रामीणों को रोजगार भी दिलाया जाएगा, जिससे उन्हें गांव से मजबूरी में बाहर न जाना पड़े। महकमे की ओर से एक हजार हेक्टेयर वन भूमि में फिर से जंगल उगाने का लक्ष्य तय किया गया है।


क्या कहतें हैं अधिकारीः
प्रदेश के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीरता से काम किया जा रहा है, जिससे जंगल तो बढ़े ही। साथ ही लोगों को रोजगार भी मिल सकें।
- डा.आरबीएस रावत,  प्रमुख वन संरक्षक

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed