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यहां मानव करते हैं देवताओं का संस्कार
अमर उजाला, अगस्त्यमुनि
Updated Wed, 21 Aug 2013 08:20 PM IST
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देवता इंसानों से सर्वोपरि हैं और हर संस्कार में देवता पूजे जाते हैं, यह तो बचपन से सुनते आए हैं, लेकिन उत्तराखंड में एक जगह ऐसी भी है जहां मानव देवताओं के संस्कार करते हैं।
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तल्ला नागपुर पट्टी में रक्षाबंधन के पर्व पर ब्राह्मणों की ओर से तुंगनाथ मंदिर में देवताओं का उपनयन संस्कार प्रतिवर्ष परंपरानुसार किया जाता है।
जनेऊ धारण
कहा जाता है कि तल्ला नागपुर के फलासी गांव में स्थित तुंगनाथ मंदिर ऐसा मंदिर हैं, जहां मनुष्य देवताओं का उपनयन संस्कार (जनेऊ धारण कराना) कराता है।
भगवान तुंगनाथ के गुरु ब्राह्मण वंशज आचार्य जगदंबा प्रसाद बेंजवाल के अनुसार यह पूजा श्रावणी कहलाती है, जिसमें लोग रीति परंपराओं और वैदिक पूजा अर्चना के साथ सूत से बने विशेष यज्ञोपवीत से भगवान तुंगनाथ के स्वयंभू लिंग को ढका जाता है।
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पूर्णमासी के दिन पर्व
रात्रि के चार प्रहरों के बाद पूर्णमासी के दिन पर्व समय में इन यज्ञोपवीतों को पूजा अर्चना के बाद निकाल लिया जाता है। स्थानीय भाषा में तुंगनाथ का जनेऊ कहा जाता है।
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इन जनेऊ को सर्वप्रथम ऋषियों और अन्य देवताओं को प्रतीकात्मक समर्पित किया जाता है।
इसके बाद भगवान तुंगनाथ के हक हकूकधारी पंचकोटी के ग्यारह गांव फलासी, बछनी, उर्खोली, तड़ाग, खाली-खमोली, कांडा-क्यूड़ी, कोलू-भन्नू, दानकोट, कुंडा, मलाऊं, जाखणी और छतोरा में प्रसाद स्वरूप प्रत्येक परिवार को यह जनेऊ वितरित किए जाते हैं।